बीजिंग, एजेंसी। ‘कान’ इंसान के शरीर का बेहद संवेदनशील अंग होता है। कान में जरा सी तकलीफ इंसान को असहज कर देती है। लेकिन, चीन के 24 साल के एलवी की दाद देनी होगी जिनके कान में कॉकरोचों ने घर बना लिया और उन्‍हें कानोंकान खबर नहीं हुई। पिछले महीने एक दिन जब भयंकर दर्द उठा तो वह ईएनटी डॉक्टर के पास पहुंचे। उन्‍होंने डॉक्टर को बताया कि उन्‍हें ऐसा महसूस हो रहा है कि कान में कुछ रेंगता हुए उसे कुतर रहा है। इसके बाद शुरू हुआ जांचों का सिलसिला। 

ग्वांगडोंग प्रांत के हुआंग जिले के सनेह अस्पताल में डॉक्टर ने जब बारीकी से जांच की तो उसके होश उड़ गए। डॉक्‍टर ने बताया कि तुम्हारे कान को कॉकरोचों ने अपना घर बना लिया है। ईएनटी (नाक-कान-गले का डॉक्टर) विशेषज्ञ ने बताया कि उन्‍हें जांच में 10 से अधिक कॉकरोच के जीवित बच्चे मिले जो कान के अंदर इधर-उधर घुम रहे थे। डॉक्‍टर के मुताबिक, काले और भूरे रंग वाली मादा कॉकरोचों की तुलना में बच्चों का रंग हल्का था। 

विशेषज्ञ ने सबसे पहले चिमटी की मदद से पहले बड़े शरीर वाली मादा कॉकरोच से एक-एक करके बच्चों को निकाला। कान में कॉकरोच पहुंचे कैसे इस बारे में रिपोर्टों में चौंकाने वाला खुलासा किया गया है। दरअसल इन महोदय को एक बुरी आदत थी। रात का बचा खाना बेड पर ही बगल रखकर सो जाते थे। इसी चक्कर में एक मादा कॉकरोच इनके कान में घुस गई और अंदर जाकर उसने दस अंडे दे दिए। बहरहाल, कॉकरोचों को कान से बाहर निकालने से एलवी को राहत मिली है। 

चीन के हुइझोऊ प्रांत में हुई उक्‍त घटना से मिलती जुलती कुछ दूसरी कहानियां भी हैं। ऐसी ही एक घटना में पिछले साल फ्लोरिडा में हुई थी। तब एक महिला के कान से भी कॉकरोच निकाला गया था। यह कॉकरोच नौ दिन तक कान में मौजूद था। बीजिंग में साल 2015 में ऐसा ही एक मामला सामने आया था। इसमें एक 19 साल के युवक के कान में 25 कॉकरोचों ने डेरा जमा लिया था। अमूमन कहा जाता है कि जगते वक्‍त आंख और कान खुला रखें लेकिन उक्‍त घटनाएं सोते वक्‍त बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में भी सर्तक करती हैं। 

Posted By: Krishna Bihari Singh

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