वाशिंगटन, एएफपी।  दक्षिण चीन सागर में अमेरिका और चीन की तल्‍खी फिर दिखी। चीन के एक युद्धपोत ने दक्षिण चीन सागर में अमेरिका के जंगी जहाज यूएसएस डिकेटर का रास्ता रोक लिया। चीनी युद्धपोत लुयांग इस दौरान अमेरिकी पोत के बेहद करीब आ गया था। अमेरिका ने चीनी नौसेना के इस रवैये को असुरक्षित और गैरपेशेवर करार दिया है।

 

गश्‍त पर था अमेरिकी युद्धपोत

अमेरिकी प्रशांत बेड़े के प्रवक्ता कमांडर नेट क्रिस्टेनसन ने सोमवार को यहां इस घटना की जानकारी देते हुए कहा, 'मिसाइलों से सुसज्जित डिकेटर स्वतंत्र आवाजाही अभियान के तहत दक्षिण चीन सागर से जा रहा था।

अमेरिका का आरोप: चीन ने उकसाया

डिकेटर के साथ यह घटना स्प्राटली द्वीप के गेवन और जॉनसन रीफ से 12 नॉटिकल मील के दायरे में हुई। चीनी जहाज ने कई आक्रामक गतिविधियां कीं। साथ ही हमें चेतावनी दी कि हम क्षेत्र को जल्द छोड़ दें।' चीन के रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि बिना इजाजत चीनी सीमा में आए डिकेटर को क्षेत्र छोड़ने के लिए चेतावनी दी गई थी।

चीन के अलावा भी कई दावेदार

चीन पूरे दक्षिण चीन सागर पर अपना हक जताता है। चीन के अलावा ताइवान, फिलीपींस, ब्रुनेई, मलेशिया और वियतनाम भी इसके कुछ हिस्सों पर अपना दावा करते हैं।

इसे पहले भी हुए थे आमने-सामने

दक्षिण चीन सागर में और पूर्वी चीन सागर के ऊपर से अमेरिकी बमवर्षक बी-52 ने उड़ान भरी थी। इसका चीन ने विरोध किया था। चीन के रक्षा मंत्रालय अमेरिका की इस कार्रवाई को उकसावे वाली कार्रवाई बताया था।

अंतरराष्‍ट्रीय कोर्ट ने सुनाया था चीन के खिलाफ फैसला

समुद्री मामलों पर अंतरराष्ट्रीय न्यायाधिकरण ने वर्ष 2016 में चीन के दक्षिण सागर में उसके हक जताने का फैसला सुनाया था। कोर्ट ने कहा था कि चीन के दावों का कोई कानूनी आधार नहीं है। अमेरिका भी क्षेत्र पर चीन के दावों को खारिज करता है।

Posted By: Prateek Kumar

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