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एक दशक के लंबे इंतजार के बाद खुलेगा चीन-उत्तर कोरिया को जोड़ने वाला नया पुल, मजबूत होंगे व्यापारिक रिश्ते 

Published: Wed, 14 Oct 2026 01:28 PM (IST)

चीन और उत्तर कोरिया को जोड़ने वाला नया 'यालू नदी पुल' एक दशक से अधिक की देरी के बाद यातायात ...और पढ़ें

एक दशक बाद खुला खुलेगा चीन-उत्तर कोरिया का नया यालू नदी पुल (फोटो- रॉयटर्स)

एक दशक बाद खुला खुलेगा चीन-उत्तर कोरिया का नया यालू नदी पुल (फोटो- रॉयटर्स)

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डिजिटल डेस्क, बीजिंग। चीन और उत्तर कोरिया को आपस में जोड़ने वाला नया 'यालू नदी पुल' एक दशक से अधिक समय की देरी के बाद कल यानी गुरुवार को यातायात के लिए खोल दिया जाएगा। दोनों देशों के बीच मजबूत होते रणनीतिक और आर्थिक संबंधों के बीच चीनी शहर डांडोंग को उत्तर कोरिया के सिनुइजू शहर से जोड़ने वाले इस पुल की लंबाई 3 किलोमीटर है।

चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, दोनों देश न्यू यालू रिवर ब्रिज के उद्घाटन के लिए एक समारोह आयोजित करेंगे। चार लेन वाला यह 3 किलोमीटर लंबा पुल चीन के उत्तर-पूर्वी शहर डैंडोंग को उत्तर कोरिया के शहर सिनुइजु से जोड़ेगा।

इस पुल के खुलने की उम्मीद तब से की जा रही थी जब चीनी राष्ट्रपति शी चिनपिंग जून में किम के साथ बैठक के लिए प्योंगयांग गए थे। अपनी शिखर बैठक के दौरान, शी ने व्यापार, कृषि, निर्माण और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में आपसी सहयोग बढ़ाने की बीजिंग की इच्छा जाहिर की थी, जबकि किम ने चीन के साथ संबंधों को सबसे बड़ी रणनीतिक प्राथमिकता बताया था।

एक दशक से ज्यादा की देरी के बाद होगा उद्घाटन

दरअसल, इस पुल के 2014 में खुलने की संभावना था। चीन की तरफ से पहुंचने वाली सड़कें, कस्टम सुविधाएं और अन्य संबंधित बुनियादी ढांचे का निर्माण 2014 में लगभग पूरा कर लिया गया था। लेकिन उत्तर कोरिया की तरफ से इससे संबंधित कोई काम नहीं किया गया, जिसके चलते यह इंतजार बढ़ गया।

उत्तर कोरिया की तरफ से कोई ठोस काम न होने पर अटकलें लगाई गईं कि उत्तर कोरिया आर्थिक निर्भरता बढ़ने से डर रहा था या फिर वह इस बात से नाराज था कि चीन ने उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को कड़ा करने वाले संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों के पक्ष में वोट दिया था। कुछ जानकारों का कहना था कि पुल की जगह को लेकर भी उत्तर कोरिया और चीन के बीच मतभेद थे।

दक्षिण कोरिया के इंस्टीट्यूट फॉर नेशनल यूनिफिकेशन के एनालिस्ट जियोंग यून-ई के अनुसार, उत्तर कोरिया-चीन पुल बहुत बड़ा है और इस पर चौबीसों घंटे दोनों तरफ से कंटेनर और भारी कार्गो ट्रक समेत गाड़ियां चल सकती हैं।

पुराने पुल का कम होगा लोड

इस नए लिंक से डैंडोंग-सिनुइजु रूट पर मौजूद पुराने पुल पर बोझ कम होने की उम्मीद है। इस पुराने पुल से दोनों देशों के बीच 70 प्रतिशत से ज्यादा आधिकारिक व्यापार होता है। 1937 में बने इस पुराने पुल पर रेलवे लाइन के साथ-साथ कारें और ट्रक भी चलते हैं, लेकिन गाड़ियों का ट्रैफिक एक बार में सिर्फ एक ही तरफ चल सकता है।

चीन-कोरिया संबंध

ज्ञात हो कि चीन लंबे समय से उत्तर कोरिया का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार और आर्थिक सहारा रहा है। लेकिन पिछले कुछ सालों में, उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग-उन ने मॉस्को को प्राथमिकता दी है और यूक्रेन में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की जंग में मदद के लिए हजारों सैनिक और पारंपरिक हथियार भेजे हैं।

किम हाल ही में चीन के करीब आए हैं, जिसका मकसद अर्थव्यवस्था को बेहतर बनाना और अमेरिका के खिलाफ़ एक मोर्चा बनाना है। (समाचार एजेंसी एपी के इनपुट के साथ)