बीजिंग, पीटीआइ। छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमानों के निर्माण में अमेरिकी वायुसेना ने चीन को पीछे छोड़ दिया है। हांगकांग के साउथ चाइना मार्निग पोस्ट द्वारा बुधवार को प्रकाशित खबर के मुताबिक छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान के निर्माण में अमेरिका सबसे आगे चल रहा है और उसकी वायुसेना ने कुछ दिनों पहले ऐसे विमान के प्रोटोटाइप का परीक्षण भी किया था। बता दें कि अमेरिका के पास फिलहाल पांचवीं पीढ़ी के दो लड़ाकू विमान हैं। लॉकहीड मार्टिन एफ-22 और एफ-35।

वर्ष 1997 में चीन ने पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान बनाने की शुरुआत की थी। हालांकि इस पीढ़ी के पहले विमान चेंगदू जे-20 ने वर्ष 2011 में पहली बार उड़ान भरी और वर्ष 2017 में इसे वायुसेना में शामिल किया गया। जे-20 लड़ाकू विमान बनाने वाले चेंगदू एयरक्राफ्ट इंडस्ट्री गु्रप के चीफ डिजाइनर वांग हैफेंग ने पूर्व में ही इस बात की पुष्टि की थी कि चीन ने अगली पीढ़ी के लड़ाकू विमानों पर काम करना शुरू कर दिया है।

वांग के हवाले से अखबार ने लिखा कि युद्ध की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए तकनीकी विशेषताओं पर काम शुरू हो गया है। वांग ने विश्वास जताया है कि वर्ष 2035 या उससे पहले एक शक्तिशाली हथियार दुनिया के सामने होगा। छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमानों में क्या विशेषताएं होंगी यह तो नहीं पता, लेकिन वांग ने कहा कि विमान ड्रोन और लेजर हथियार से लैस होगा। अमेरिका और चीन के अलावा रूस भी छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान पर काम कर रहा है।

वह पांचवी पीढ़ी के एसयू-57 पर ही कुछ नई तकनीकों का परीक्षण कर रहा है। फ्रांस की कंपनी दासो और एयरबेस ने पिछले साल हुए पेरिस एयर शो में छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान का प्रोटोटाइप प्रदर्शित किया था और वर्ष 2026 में विमान की पहली उड़ान की बात कही थी। ब्रिटेन ने भी छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान 'टेम्पेस्ट' का कुछ दिनों पहले विंड टनल परीक्षण किया था। इसके 2035 तक तैयार होने की उम्मीद है।  

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