बीजिंग, प्रेट्र। चीन ने गुरुवार को तिब्बती मुद्दों के लिए अमेरिकी विशेष समन्वयक उजरा जेया की दलाई लामा से मुलाकात और उनके धर्मशाला दौरे की तीखी आलोचना की है। उन्‍होंने कहा कि यह अमेरिका की प्रतिबद्धता का उल्लंघन है कि तिब्बत चीन का हिस्सा है और वह तिब्बती अलगाववादियों का समर्थन नहीं करता है। जेया ने गुरुवार को हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में दलाई लामा से मुलाकात की। इस दौरान संयुक्त राज्य अमेरिका और भारत में स्वतंत्रता और लोकतंत्र की समृद्ध परंपराओं पर चर्चा की।

निर्वासित तिब्बती सरकार ने एक प्रेस बयान में कहा कि श्रोताओं को दी गई जानकारी में जेया ने अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन और अमेरिकी लोगों की ओर से दलाई लामा को बधाई दी। जेया दलाई लामा और निर्वासित तिब्बती सरकार के प्रतिनिधियों से मुलाकात के लिए धर्मशाला के दो दिवसीय यात्रा पर थीं। उन्‍होंने दलाई लामा द्वारा दिए गए शांति के संदेशों के लिए दुनिया का आभार व्यक्त किया। चीनी विदेश मंत्रालय ने जेया की यात्रा की आलोचना करते हुए इसे चीन के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप बताया।

चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियन ने 86 वर्षीय शीर्ष तिब्बती बौद्ध नेता के साथ भारतीय मूल की वरिष्ठ अमेरिकी राजनयिक की मुलाकात के बारे में पूछे जाने पर एक मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि तिब्बत चीन का हिस्सा है और तिब्बती धार्मिक मामले चीन का आंतरिक मामला है। उन्होंने कहा कि अमेरिका द्वारा तिब्बती मुद्दों के लिए एक विशेष समन्वयक की नियुक्ति चीन के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप है। उन्होंने कहा कि चीन इस पर दृढ़ता से आपत्ति जताता है और इसे कभी मान्यता नहीं दी है।

झाओ ने कहा कि अमेरिका को अपनी प्रतिबद्धता का ईमानदारी से पालन करना चाहिए कि तिब्बत चीन का हिस्सा है और तिब्बत की स्वतंत्रता का समर्थन नहीं करता है। उन्होंने कहा कि उसे चीन विरोधी दलाई गुट द्वारा अलगाववादी गतिविधियों के लिए कोई समर्थन नहीं देना चाहिए। चीन अपनी संप्रभुता, सुरक्षा और विकास हितों की रक्षा के लिए मजबूती से उपाय करना जारी रखेगा।

बुधवार को जेया ने केंद्रीय तिब्बती प्रशासन का दौरा किया और इसके नेतृत्व के साथ चर्चा की। उन्होंने निर्वासित तिब्बती संसद, तिब्बती प्रदर्शन कला संस्थान, तिब्बत संग्रहालय का भी दौरा किया और तिब्बती नागरिक समाज के सदस्यों से भी मुलाकात की।

झाओ लिजियन ने कहा कि मैं यह कहना चाहूंगा कि निर्वासन में तथाकथित तिब्बती सरकार एक बाहरी अलगाववादी राजनीतिक समूह है। यह चीन के संविधान और कानून का गंभीर उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि यह अवैध है और दुनिया के किसी भी देश द्वारा मान्यता प्राप्त नहीं है।

14 वें दलाई लामा एक धार्मिक व्यक्ति के रूप में एक राजनीतिक निर्वासन है। वह चीन विरोधी अलगाववादी गतिविधियों में संलग्न हैं और तिब्बत को चीन से विभाजित करने का प्रयास कर रहे हैं। दलाई लामा 1959 में तिब्बत पर चीनी आक्रमण के बाद तिब्बत से भाग जाने के बाद से भारत में रह रहे हैं। निर्वासित तिब्बती सरकार धर्मशाला से संचालित होती है। भारत में 1,60,000 से अधिक तिब्बती रहते हैं।

Edited By: Arun Kumar Singh