साओ पाउलो, रायटर। दुनिया में कोरोना वायरस (कोविड-19) के खिलाफ लड़ाई में वैक्सीन (टीका) अहम भूमिका निभाने वाली है। अब इनके प्रभाव पर सभी की निगाहें हैं। इस बीच, ब्राजील ने चीन की कोरोना वैक्सीन को लेकर एक बड़ा दावा किया है। ब्राजील के शोधकर्ताओं का कहना है कि सिनोवैक बायोटेक द्वारा विकसित कोरोनावैक वैक्सीन कोरोना वायरस के खिलाफ सिर्फ 50.4 फीसद ही असरदार है।

75 फीसद कारगर होने का किया गया था दावा

गौरतलब है कि पिछले हफ्ते की इस वैक्सीन के तीसरे चरण के ट्रायल से जुड़ा डाटा जारी किया गया था, जिसमें इस वैक्सीन को 75 फीसद कारगर बताया गया था। इसके बाद कोरोना वैक्सीन के इमरजेंसी इस्तेमाल की मंजूरी मांगी गई थी।

ठगा महसूस कर रहा ब्राजील

चीनी वैक्सीन को लेकर आए नवीनतम परिणाम ब्राजील के लिए निराशाजनक हैं, क्योंकि ब्राजील टीकाकरण के लिए तैयार है और इसके लिए उसने दो वैक्सीन में से एक के लिए चीन वैक्सीन को चुना है। ऐसे में ब्राजील के लिए आगे की रणनीति आसान नहीं होगी। कई विज्ञानियों ने अध्ययन के नए आंकड़ों को भ्रमित करने वाला और अवास्तविक बताया है।

लोगों से अपील आंकड़ों पर न दे ध्‍यान

ब्राजील में सिनोवेक वैक्सीन की पार्टनर बुटानटन इंस्टीट्यूट ने लोगों से कहा है कि वे वैक्सीन के नए आंकड़ों पर ध्यान ना दें। चीन की इस वैक्सीन का नाम कोरोनावैक है। बुटानटन इंस्टीट्यूट ने ब्राजील हेल्थ रेगुलेटर के सामने इस वैक्सीन का नया डेटा पेश किया जिसमें इसकी एफीकेसी (प्रभावकारिता) रेट 50.4 फीसदी बताई गई है।

बेहद निराशाजनक प्रदर्शन

प्रसिद्ध माइक्रोबायोलॉजिस्ट नतालिया पास्ट्रेनक ने कहा, 'दुनिया में अब तक न तो सबसे अच्छी और न ही सबसे आदर्श वैक्सीन उपलब्ध है। नया शोध बेहद निराशाजनक है।

तुर्की के वैज्ञानिकों ने चीन के पक्ष में किए थे दावे

इससे पहले तुर्की के शोधकर्ताओं ने पिछले महीने कहा कि एक अंतरिम विश्लेषण के आधार पर कोरोनावैक 91.25 फीसद प्रभावी थी। इंडोनेशिया ने सोमवार को अंतरिम डाटा के आधार पर वैक्सीन आपातकालीन उपयोग की मंजूरी दी, यह 65 फीसद प्रभावी है।

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