बीजिंग, एपी। चीन के हालिया सैन्य अभ्यास का मकसद ताइवान और उसके विदेशी मददगारों को स्पष्ट संदेश देना था। संदेश यह कि चीन अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए पूरी तरह तत्पर है। चीन सरकार के प्रवक्ता मा शियोगुआंग ने कहा कि सैन्य अभ्यास एक आवश्यक कदम था, क्योंकि ताइवानी नेता चीन से स्वतंत्रता की औपचारिक घोषणा करने की तैयारी में जुटे थे। चीन के विकास को रोकने की कोशिशों के तहत ताइवानी नेता बाहरी मदद ले रहे हैं।

इस समय भी स्थिति गंभीर और जटिल बनी हुई है। इसके पीछे ताइवान की सत्ताधारी डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी और उसके समर्थकों का हाथ है। उन्होंने कहा कि हम ताइवान की स्वतंत्रता की चाल को विफल कर देने अपने देश की संप्रभुता व क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए संकल्पित और सक्षम हैं। वहीं, ताइवान ने कहा कि सैन्य अभ्यास के दौरान पिछले सप्ताह चीन के लड़ाकू विमानों ने दो दिन उसके हवाई क्षेत्र का अतिक्रमण किया।

ताइवान ने कहा कि चीन की ओर से की गई यह उकसाने वाली कार्रवाई थी। यह क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए गंभीर खतरा है। ताइवान ने यह भी कहा है कि चीनी सेना के कारण पूरे क्षेत्र को खतरा है और विश्व समुदाय को इस पर ध्यान देना चाहिए। बीते दिनों ताइवान के उपराष्ट्रपति लाई चिंग ने कहा था कि चीन लाइन क्रॉस न करें। ताइवान शांति चाहता है लेकिन हम अपने लोगों की हर हाल में सुरक्षा करेंगे।

बीते दिनों ताइवान की राष्ट्रपति साई इंग-वेन ने दक्षिण चीन सागर और ताइवान की खाड़ी में चीन के आक्रामक रवैये की तरफ इशारा करते हुए उसे क्षेत्रीय स्थिरता के लिए बड़ा खतरा बताया था। उन्होंने कहा था कि इससे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अस्थिरता पैदा हो सकती है। दुनिया के लोकतांत्रिक देशों को इसके खिलाफ एकजुट होना चाहिए। उन्‍होंने यह भी कहा था कि एकतरफा आक्रामक कार्रवाइयों पर अंकुश लगाने के लिए मित्र देशों को एक तंत्र बनाना चाहिए।  

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