बीजिंग, रायटर। चीन के प्रधानमंत्री ली कछ्यांग ने ताइवान के साथ एकीकरण की बीजिंग की इच्छा जताते हुए शांतिपूर्ण शब्द को छोड़ दिया। यह चीन की ताइवान को लेकर नीति में स्पष्ट बदलाव है। कोरोना वायरस महामारी शुरू होने के बाद से ताइवान ने चीनी सैन्य उत्पीड़न की शिकायत की है। इसमें लड़ाकू जेट और नौसेना के जहाज नियमित रूप से द्वीप की तरफ जाते हैं और अभ्यास करते हैं। हालांकि, चीन इसे अपना नियमित अभ्यास बताता है।

चीन का कहना है कि ताइवान उसका सबसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण क्षेत्रीय मुद्दा है। ली ने चीन की संसद की वाíषक बैठक की शुरुआत में कहा कि उनका देश ताइवान की स्वतंत्रता की मांग करने वाले किसी भी अलगाववादी गतिविधियों का विरोध करेगा।

उन्होंने कहा कि चीन ताइवान जलडमरूमध्य में आदान-प्रदान और सहयोग को प्रोत्साहित करने के लिए नीतियों और उपायों में सुधार करेगा और ताइवान के लोगों की भलाई करेगा। उन्होंने कहा, हम उन्हें ताइवान की स्वतंत्रता का विरोध करने और चीन के साथ एकीकरण को बढ़ावा देने में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करेंगे। इन प्रयासों के साथ, हम निश्चित रूप से चीनी राष्ट्र के कायाकल्प के लिए एक सुंदर भविष्य बना सकते हैं।

ताइवान को 18 करोड़ डालर के टॉरपीडो बेचने पर अमेरिका पर भड़का चीन

अमेरिकी सरकार ने कांग्रेस (संसद) को सूचित किया है कि वह ताइवान को 18 करोड़ डालर के उन्नत किस्म के टॉरपीडो की संभावित बिक्री कर सकती है। इससे अमेरिका और चीन के बीच तनावपूर्ण संबंधों में और खटास आ गई है। ज्यादातर देशों की तरह अमेरिका के ताइवान के साथ अधिकारिक राजनयिक संबंध नहीं हैं लेकिन वह कानूनी रूप से इसे देश की रक्षा के लिए मदद करने को बाध्य है। हालांकि चीन हमेशा ही ताइवान को अमेरिकी हथियारों की बिक्री का विरोध करता रहा है।

अमेरिकी रक्षा सुरक्षा सहयोग एजेंसी ने बुधवार को एक बयान में बताया कि अमेरिकी विदेश विभाग ने ताइवान को 18 एमके-48 मॉड 6 टॉरपीडो और संबंधित उपकरणों की बिक्री को मंजूरी दी है। इस सौदे की लागत करीब 18 करोड़ डालर होगी। अमेरिकी रक्षा सुरक्षा सहयोग एजेंसी ने इस संभावित बिक्री के लिए जरूरी प्रमाण पत्र हासिल करने के लिए कांग्रेस को यह जानकारी दी है।

Posted By: Nitin Arora

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