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चीन बढ़ा रहा है अपनी परमाणु क्षमता, 7 साइट्स पर देखी गईं नई गतिविधियां; क्या है ड्रैगन की प्लानिंग?

By Shubham KumarEdited By: Shubham Kumar
Published: Thu, 24 Sep 2026 11:54 AM (IST)

चीन सात प्रमुख ठिकानों पर परमाणु बुनियादी ढांचे का तेजी से विस्तार कर रहा है, जिससे दुनिया की चिंताएं बढ़ गई हैं।

चीन का तेजी से बढ़ता परमाणु कार्यक्रम।

चीन का तेजी से बढ़ता परमाणु कार्यक्रम।

HighLights

  1. चीन सात रणनीतिक ठिकानों पर परमाणु विस्तार कर रहा है।

  2. नए ICBM silos और उन्नत पनडुब्बियां विकसित की जा रही हैं।

  3. विश्लेषकों ने चीन की 'नो-फर्स्ट-यूज' नीति पर सवाल उठाए।

डिजिटल डेस्क, बीजिंग। चीन का परमाणु कार्यक्रम एक बार फिर वैश्विक राजनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है। वजह है हाल ही में सामने आई एक रिपोर्ट, जिसमें किए गए दावों ने दुनियाभर की चिंताओं को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है। 

इस पूरे मामले को ऐसे समझिए कि एक अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट के मुताबित चीन अपने परमाणु बुनियादी ढांचे का बड़े पैमाने पर विस्तार कर रहा है। इतना ही नहीं देश भर के रणनीतिक ठिकानों पर नए निर्माण और आधुनिकीकरण का काम तेजी से चल रहा है।

ऐसे में अब सवाल यह खड़ा हो रहा है कि युद्ध की चिंताओं से घिरी दुनिया के बीच ड्रैगन आखिर क्या संदेश देना चा रहा है? क्या कुछ बड़ा सोच रहे शी चिनफिंग? आइए जानते हैं।

पहले समझिए कहां-कहां चल रहा है काम?

सैटेलाइट तस्वीरों और विशेषज्ञों के विश्लेषण पर आधारित 'द टेलीग्राफ' की एक जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि चीन के सात महत्वपूर्ण स्थलों पर संदिग्ध गतिविधियां देखी गई हैं। इनमें पिंगटोंग, जितोंग, लोप नुर, जिउक्वान, मियांग, जिंटा और गुआंगयुआन शामिल हैं।

गतिविधियां सामने आने के बाद 'फेडरेशन ऑफ अमेरिकन साइंटिस्ट्स' (FAS) की 2026 की न्यूक्लियर नोटबुक रिपोर्ट के मुताबिक, इस समय चीन के पास अनुमानित तौर पर 620 परमाणु हथियार हैं। ऐसे में नए डिलीवरी सिस्टम यानी हथियारों के लक्ष्य तक पहुंचने के लिए चीन लगातार और हथियार बनाने के काम पर जोर दे रहा है। 

जमीन, हवा और समंदर तीनों मोर्चों पर मजबूत ड्रैगन

अब आज के समय में इस बात में तो कोई दोराय नहीं है कि चीन सिर्फ जमीन आधारित मिसाइलों जैसे नए ICBM silos और DF-5 silos तक सीमित नहीं है। वह अपनी नौसेना को मजबूत करते हुए टाइप 094 (Type 094A) पनडुब्बियों में लंबी दूरी की JL-3 मिसाइलें फिट कर रहा है और अगली पीढ़ी की टाइप 096 पनडुब्बी पर भी काम कर रहा है। इसके अलावा, परमाणु क्षमता से लैस एयर-लॉन्च मिसाइलों वाले H-6 बॉम्बर को भी इस मिशन में लगाया गया है।

शी जिनपिंग का अमेरिका दौरा और नई कूटनीति की कहानी

अच्छा, अब इस पूरे मामले में गौर करने वाली बात यह है कि यह रिपोर्ट ऐसे समय में सामने आई है जब चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप वाशिंगटन में मुलाकात कर रहे हैं।

अपनी अमेरिकी यात्रा को लेकर जारी एक लिखित बयान में शी चिनफिंग ने कहा कि अमेरिका और चीन को प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि साझीदार होना चाहिए। उन्होंने सहयोग और मतभेदों को संभालने पर जोर दिया, भले ही जमीनी हकीकत परमाणु हथियारों की दौड़ की तरफ इशारा कर रही हो। दूसरी और सबसे अहम बात यह है कि इन सभी चिजों के बीच बीजिंग लगातार यह दावा करता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह से रक्षात्मक है।

नो-फर्स्ट-यूज नीति पर लगातार दे रहा जोर

इसके अलावा परमाणु अप्रसार संधि (NPT) समीक्षा प्रक्रिया में चीन ने दोहराया है कि वह अपनी सुरक्षा के लिए न्यूनतम स्तर पर परमाणु ताकत रखता है और वह कभी भी पहले परमाणु हथियार का इस्तेमाल नहीं करेगा।

अब इस बात को पुरानी कड़ी से जोड़ा जाए तो इस साल अप्रैल में चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन और मई में हथियार नियंत्रण अधिकारी सन शियाओबो ने स्पष्ट किया था कि चीन किसी भी देश के साथ परमाणु हथियारों की होड़ में शामिल नहीं होना चाहता।

चीन के प्लान पर विश्लेषकों की राय क्या है?

कुल मिलाकर, भले ही चीन आधिकारिक तौर पर अपनी 'नो-फर्स्ट-यूज' नीति पर कायम रहने की बात कहता हो, लेकिन पश्चिमी और स्वतंत्र विश्लेषकों का मानना है कि इस भारी विस्तार ने वैश्विक चिंता बढ़ा दी है।

'फेडरेशन ऑफ अमेरिकन साइंटिस्ट्स' का कहना है कि इस बात के पुख्ता सबूत नहीं हैं कि बीजिंग ने अपनी 'नो-फर्स्ट-यूज' नीति को आधिकारिक तौर पर छोड़ दिया है। हालांकि, इसमें कोई दोराय नहीं है कि चीन का बढ़ता हुआ और आधुनिक होता शस्त्रागार उसकी परमाणु क्षमता को पहले से कहीं अधिक सुरक्षित और शक्तिशाली बना रहा है।