बीजिंग, एएफपी। चीन ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) का प्रयोग करके फेक न्यूज बनाने वालों पर प्रतिबंध लगाते हुए इस संबंध में नए नियम जारी किए हैं। शुक्रवार को जारी किए गए नियमों में कहा गया है कि एआइ का प्रयोग करके फेक न्यूज के लिए ऑनलाइन वीडियो और आडियो बनाने, उसे वितरित करने और प्रसारित करने की अनुमति नहीं होगी। अगर कोई व्यक्ति इन नियमों के उल्लंघन का दोषी पाया जाता है तो उसे आपराधिक कृत्य का दोषी माना जाएगा। यह नियम एक जनवरी 2020 से प्रभावी होंगे।

डीपफेक तकनीक के खतरों पर चिंता जताई

नए नियमों में कहा गया है कि अगर कोई वीडियो या आडियो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस या आभासी तकनीक के माध्यम से बनाया गया है तो इसके लिए स्पष्ट तौर पर चेतावनी जारी करनी होगी। बनाए गए नए नियमों में विशेष तौर पर 'डीपफेक' तकनीक के खतरों पर चिंता जताई गई है। चीन की साइबरस्पेस अथॉरिटी ने चेतावनी दी है कि 'डीपफेक' तकनीक से जहां सामाजिक व्यवस्था छिन्न-भिन्न होने का खतरा बढ़ा है, वहीं देश की राजनीतिक स्थिरता पर नकारात्मक प्रभाव भी पड़ा है। 2016 के अमेरिकी चुनाव अभियान के दौरान बड़ी संख्या में ऑनलाइन फेक न्यूज के इस्तेमाल के बाद इसको लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। बता दें कि चीन में एक फेस स्वैपिंग एप 'जाओ' का प्रयोग होता है, जिसमें आप किसी अभिनेता के चेहरे पर अपना पसंदीदा चेहरा लगा सकते हैं।

 क्या होता है डीपफेक

डीपफेक दो शब्दों के मेल से बनता है। 'डीप लर्निंग' और 'फेक'। डीप लर्निंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का एक हिस्सा है। डीपफेक 'ह्यूमन इमेज सिंथेसिस' नाम की तकनीक पर काम करता है। जैसे हम किसी भी चीज की फोटो कॉपी कर लेते हैं, वैसे ही ये तकनीक चलती-फिरती चीजों की कॉपी कर सकती है। यानी स्क्रीन पर एक इंसान को आप चलते-फिरते, बोलते देख सकते हैं, जो नकली होगा।

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