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कब तक ईरान का साथ देगा चीन? मिडिल ईस्ट में ड्रैगन के फंसे 270 अरब डॉलर ने उड़ाई चिनफिंग की नींद

Published: Fri, 10 Apr 2026 11:52 AM (IST)

चीन के खाड़ी देशों में 270 अरब डॉलर के निवेश मध्य-पूर्व संघर्षों के कारण खतरे में हैं। पहले ईरान का ...और पढ़ें

मिडिल ईस्ट में चीन ने किया तगड़ा इन्वेस्टमेंट।

मिडिल ईस्ट में चीन ने किया तगड़ा इन्वेस्टमेंट।

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भले ही चीन ईरान के सबसे बड़े कूटनीतिक सहयोगियों में से एक बना हुआ है, लेकिन खाड़ी क्षेत्र में फैले चीनी पूंजी के विशाल विस्तार के कारण राष्ट्रपति शी चिनफिंग का इस्लामिक गणराज्य के प्रति समर्थन सीमित हो रहा है।

महामारी के बाद से चीन ने मिडिल ईस्ट में अपना निवेश जमकर बढ़ाया। मंदी से प्रभावित कंपनियों ने इस मौका का फायदा उठाने की कोशिश की क्योंकि खाड़ी देश जीवाश्म ईंधन से हटकर ग्रीन टेक और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में विविधता लाने पर जोर दे रहे थे और इन क्षेत्रों में चीन की मजबूत पकड़ है। जाम्बिया और श्रीलंका जैसे विकासशील देशों के अपने कर्ज चुकाने में नाकाम रहने के बाद तेल भंडार से समृद्ध देश निवेश के लिए एक आकर्षक विकल्प नजर आए।

अमेरिका से आगे निकल रहा चीन

इस रणनीति की वजह से हाल के वर्षों में मिडिल-ईस्ट में चीनी निवेश और निर्माण कार्य दुनिया में सबसे तेज गति से बढ़ा है, जिससे यह क्षेत्र शी जिनपिंग की प्रमुख 'बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव' का एक अहम लाभार्थी बन गया है। क्षेत्रीय फाइनेंसर के तौर पर चीन, अमेरिका से आगे निकल रहा है।

AidData के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर ब्रैड पार्क्स के अनुसार, 2014 से 2023 के बीच बीजिंग ने खाड़ी देशों को वॉशिंगटन द्वारा दान या उधार दिए गए हर एक डॉलर के मुकाबले लगभग 2.34 डॉलर दिए।

खतरे में चीन की स्थिरता

अब अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच के युद्ध ने वैश्विक बाजारों को हिलाकर रख दिया है और चीन की उस स्थिरता को खतरे में डाल दिया है, जिस पर वह अपने आर्थिक प्रभाव को बढ़ाने के लिए निर्भर था। हालांकि ट्रंप ने ईरानी अधिकारियों को दो हफ्ते के युद्धविराम के लिए राजी करने का श्रेय चीनी अधिकारियों को दिया है, लेकिन उस क्षेत्र में स्थायी शांति को लेकर अभी भी बड़े सवाल बने हुए हैं।

PM Modi Attack On Congress Over Middle East (19)

अमेरिकन एंटरप्राइज इंस्टीट्यूट के 'चाइना ग्लोबल इन्वेस्टमेंट ट्रैकर' के अनुसार, चीन ने पिछले दो दशकों में लगभग 270 अरब डॉलर के निवेश और निर्माण परियोजनाएं खड़ी की हैं।

चीन को खाड़ी देशों को दिलाना होगा भरोसा

एशिया ग्रुप में ग्रेटर चाइना प्रैक्टिस के पार्टनर जॉर्ज चेन ने कहा, "खाड़ी क्षेत्र में चीन का दांव बहुत बड़ा है। यहां लोगों से जुड़ा जोखिम है, निवेश का जोखिम है और ऊर्जा-संसाधनों से जुड़ा जोखिम भी है।" बीजिंग को अब ईरान को तनाव कम करने में मदद करनी होगी और साथ ही खाड़ी देशों को यह भरोसा भी दिलाना होगा कि वह उनके साथ सहयोग जारी रखेगा।

संयुक्त राष्ट्र में चीन के दूत फू कोंग ने इस हफ्ते एक्स पर एक पोस्ट में दोनों पक्षों के दृष्टिकोणों में संतुलन बनाने की अपने देश की इच्छा को जाहिर की। फू ने लिखा कि अमेरिका और इजरायल के हमले अंतरराष्ट्रीय मानदंडों का स्पष्ट उल्लंघन थे और साथ ही उन्होंने शिपिंग मार्गों और ऊर्जा बुनियादी ढाँचे की सुरक्षा की भी अपील की। यह तेहरान पर एक परोक्ष रूप से कटाक्ष था।

निशाने पर चीनी प्रोजेक्ट

चीनी प्रोजेक्ट्स पहले से ही निशाने पर हैं। दुबई, कतर और ओमान में चीन की फंडिंग से बने कम से कम तीन इंफ्रास्ट्रक्चर एसेट्स पर ईरान ने हमले किए हैं। अमेरिका की विलियम एंड मैरी यूनिवर्सिटी की रिसर्च लैब AidData के अनुमानों के मुताबिक, 12 अन्य प्रोजेक्ट्स भी ज्यादा जोखिम वाले इलाकों में हैं। इससे करीब 4.66 अरब डॉलर की फंडिंग कमिटमेंट्स खतरे में पड़ गई हैं, जिनमें वे प्रोजेक्ट्स भी शामिल हैं जो पहले ही प्रभावित हो चुके हैं।

PM Modi Attack On Congress Over Middle East (18)

हालांकि ईरान के बाहर किसी भी चीनी मजदूर के घायल होने की कोई खबर नहीं है, फिर भी हजारों लोग युद्ध क्षेत्र में काम कर रहे हैं। चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, संघर्ष शुरू होने से पहले अकेले संयुक्त अरब अमीरात में ही लगभग 3,70,000 चीनी नागरिक मौजूद थे। तब से मिडिल ईस्ट से 10,000 से ज़्यादा लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया है, लेकिन कई ऐसे लोग जिन्होंने वहां बसने के लिए पैसे खर्च किए थे, वे वहीं रुके हुए हैं।

2023 में बीजिंग की तेहरान के साथ दोस्ती और खाड़ी देशों के साथ व्यापारिक संबंध चर्चा का मुख्य केंद्र रहे, जब चीन ने कट्टर दुश्मन सऊदी अरब और ईरान के बीच सुलह करवाई। उस समय इस सफलता की व्यापक रूप से सराहना की गई थी और इसे इस क्षेत्र में शी के बढ़ते प्रभाव का संकेत माना गया था।

संघर्ष के बाद संयम बरत रहा चीन

लेकिन, तब से लेकर अब तक जब से मध्य-पूर्व में संघर्ष फिर से भड़का है, चीन काफी हद तक पीछे हट गया है। अक्टूबर 2023 में हमास द्वारा इजरायल पर किए गए हमलों और उसके बाद बढ़े तनाव ने चीन के प्रभाव की सीमाओं को उजागर कर दिया है। बीजिंग ने खुद को संयम बरतने और तनाव कम करने की अपीलों तक ही सीमित रखा है और उसने अपने तेजी से बढ़ते कारोबार पर ध्यान देना ज्यादा बेहतर समझा है।

सऊदी अरब में चीन का निवेश

चीन के इस रुख का सऊदी अरब ने स्वागत किया है। चीन के विदेशी निवेश पर नजर रखने वाले अमेरिकन एंटरप्राइज इंस्टीट्यूट के सीनियर फेलो डेरेक सिजर्स का कहना है कि अब सऊदी दुनिया भर में चीन की निर्माण गतिविधियों का सबसे बड़ा प्राप्तकर्ता बन गया है। खासतौर पर स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में, जहां चीनी कंपनियां बड़े-बड़े सोलर प्लांट और विंड टर्बाइन बना रही हैं।

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उन्होंने कहा, "यह क्षेत्र चीन की तकनीकी विशेषज्ञता की सराहना करता है। चीनी कंपनियां ऐसे काम कर सकती हैं जिनकी काफी कद्र होती है।" संयुक्त अरब अमीरात में चीनी कंपनियां दुनिया का सबसे बड़ा बैटरी ऊर्जा भंडारण तंत्र विकसित कर रही हैं, जबकि सऊदी अरब में वे सौर संयंत्र और डेटा केंद्र बना रही हैं। इसके अलावा, पिछले साल चीनी कारों के लिए यूएई दुनिया भर में तीसरा सबसे बड़ा बाजार रहा।

खतरों के बावजूद धड़ल्ले से चल रहा काम

सिंघुआ यूनिवर्सिटी में इंटरनेशनल रिलेशन्स के एसोसिएट प्रोफेसर शी गैंगझेंग के अनुसार, अब यह युद्ध उन संबंधों को और भी पेचीदा बनाने का खतरा पैदा कर रहा है। शी ने कहा, "खाड़ी क्षेत्र अब चीन के लिए वैसी 'सोने की खान' नहीं रह गया है, जैसा वह कभी हुआ करता था।"

PM Modi Attack On Congress Over Middle East (16)

खतरों के बावजूद इजरायल, यूएई और सऊदी अरब जैसे देशों में कई कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट्स तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। 7 मार्च को दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास एक ड्रोन हमले के कुछ ही घंटों बाद एक चीनी मजदूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Douyin पर बताया, "कंस्ट्रक्शन साइट पर काम अभी भी पूरी रफ्तार से चल रहा है।"

चीन के लिए अच्छा मौका

जैसे-जैसे मध्य पूर्व में हालात बदल रहे हैं, चीन के लिए लंबे समय के अवसर खुल सकते हैं। अमेरिका के सहयोगियों के खिलाफ ईरान की जवाबी कार्रवाई ने अमेरिका की साख को चोट पहुंचाई है, जिससे बीजिंग को इस संघर्ष के बाद एक और भी बड़ी आर्थिक भूमिका निभाने का मौका मिल गया है। खबरों के मुताबिक, ईरान अभी से ही होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने के लिए कुछ भुगतान युआन में ले रहा है, जिससे चीनी मुद्रा को बढ़ावा मिल रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि जब हालात सामान्य हो जाएंगे, तब भी चीन एक प्रमुख आर्थिक शक्ति बना रहेगा। भले ही इसमें ऐसे जोखिम और सुरक्षा संबंधी पहलू शामिल हों, जिन्हें पहले ध्यान में नहीं रखा गया था।

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