बीजिंग, एपी। शिनजियांग प्रांत में उइगर मुस्लिमों के साथ हो रही ज्‍यादतियों को लेकर की जा रही आलोचनाओं से चीन भड़क गया है। चीन ने कहा है कि उसने फैसला किया है कि वह अमेरिकी सीनेटरों मार्को रुबिओ (Marco Rubio) और टेड क्रूज (Ted Cruz) के अलावा धार्मिक स्वतंत्रता संबंधी राजदूत सैम ब्राउनबैक (Samuel Brownback) और क्रिस स्मिथ (Chris Smit) के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाएगा। चीन का कहना है कि उसने यह प्रतिबंध अल्पसंख्यक समूहों और सत्तारूढ़ चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की नीतियों की उनकी आलोचना को लेकर उक्‍त प्रतिबंध लगाए हैं।  

हालांकि माना जा रहा है कि चीन ने ये प्रतिबंध हाल ही में अमेरिका द्वारा चीनी अधिकारियों और चीनी कम्‍यूनिस्‍ट पार्टी के सदस्‍यों पर लगाए गए बैन के बदले में लगाया है। बीते दिनों अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोंपियो चीन के अधिकारियों पर वीजा प्रतिबंध लगाए जाने की बात कही थी। अमेरिका ने तिब्‍बत एक्‍ट के विरोध स्‍वरूप उक्‍त कदम उठाए थे। हाल ही में अमेरिका ने चीन के शिनजियांग प्रांत में उइगर मुस्लिमों के मानवाधिकार हनन को लेकर चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (Chinese Communist Party) के तीन वरिष्ठ अधिकारियों पर प्रतिबंध लगा दिया था।  

चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने इस कदम पर कहा कि अमेरिका द्वारा की गई कार्रवाइयों से चीन-अमेरिका संबंधों को गंभीर नुकसान पहुंचा है। चीन इसे अपने आंतरिक मामलों में दखल के तौर पर देखता है। उन्‍होंने कहा कि चीन अपनी राष्ट्रीय संप्रभुता बनाए रखने को लेकर दृढ़ है। हालांकि चीनी विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा कि वह अमेरिका से गुजारिश करता है कि प्रतिबंध लगाने के फैसले पर दोबारा विचार करे। उल्‍लेखनीय है कि शिनजियांग में मुस्लिम अल्पसंख्यक समूहों के 10 लाख से ज्यादा सदस्यों को कैद करके रखा गया है लेकिन चीन का कहना है कि ये शिविर लोगों को कट्टरपंथ से मुक्त कराने वाले केंद्र हैं न की हिरासती गृह... 

बीते दिनों अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोंपियो ने कहा था कि संयुक्त राज्य अमेरिका आज शिनजियांग में भयावह दुर्व्यवहार के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है। उन्‍होंने सभी राष्ट्रों का आह्वान किया था जो मानव अधिकारों और उइगर मुस्लिमों पर सीसीपी की ज्‍यादतियों के बारे में चिंताओं को साझा करते हैं और इस तरह के व्यवहार की निंदा करते हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री ने हाल ही में तिब्‍बत की स्‍वायत्‍तता का समर्थन करते हुए कहा था कि तिब्बती लोगों के बुनियादी मानवाधिकारों के लिए, उनके विशिष्ट धर्म, संस्कृति और भाषायी पहचान को संरक्षित रखने के लिए वह दृढ़ संकल्पित हैं।

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