बीजिंग, रायटर। अमेरिका के साथ तनातनी के बीच चीन ने तीन अमेरिकी पत्रकारों को देश से बाहर जाने का आदेश दिया है। विदेश मंत्रालय ने न्यूयॉर्क टाइम्स, वाशिंगटन पोस्ट और वॉल स्ट्रीट जर्नल के पत्रकारों को 10 दिनों के अंदर अपने मीडिया पास वापस करने के लिए कहा गया है। चीन ने कहा है कि उसने अमेरिका में चीन के मीडिया संस्थानों पर अनुचित प्रतिबंध के जवाब में यह कदम उठाया है। फैसले के मुताबिक, तीनों पत्रकारों को हांगकांग और मकाऊ सहित चीन के किसी भी हिस्से में काम करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

कामकाज के बारे में लिखित जानकारी भी मांगी

चीन ने वॉयस ऑफ अमेरिका, द न्यूयॉर्क टाइम्स, द वॉल स्ट्रीट जर्नल, द वाशिंगटन पोस्ट और टाइम मैगजीन से भी कहा है कि वह चीन में मौजूद अपने कर्मचारियों, संपत्तियों, कामकाज और रियल एस्टेट प्रॉपर्टी के बारे में लिखित में जानकारी दें। स्वतंत्र पत्रकारिता को लेकर दोनों देशों के बीच विवाद फरवरी में उस समय शुरू हुआ था जब चीन ने वॉल स्ट्रीट जर्नल के तीन पत्रकारों को देश से निष्कासित कर दिया था।

यह संपादकीय छपने से खफा हुआ चीन

यह कार्रवाई 'चीन ए रियल सिक मैन ऑफ एशिया' शीर्षक से छपे संपादकीय को लेकर की गई थी। जिन पत्रकारों को निष्कासित किया गया था उनमें दो अमेरिकी और एक ऑस्ट्रेलियाई नागरिक थे। इसी की प्रतिक्रिया में मार्च की शुरुआत में अमेरिका ने कहा था कि वह देश में चीन के मीडिया संस्थानों में काम करने वाले कर्मचारियों की संख्या 160 से घटाकर 100 करेगा।

पोंपियो ने फैसले पर पुनर्विचार के लिए कहा

अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोंपियो ने चीन से इस निर्णय पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है। पोंपियो ने कहा, मुझे चीन के फैसले पर दुख है। इससे दुनिया में स्वतंत्र पत्रकारिता के मकसद को धक्का लगेगा। वैश्विक संकट के दौर में चीन के लोगों को अधिक सूचनाएं और ज्यादा पारदर्शिता का जरूरत है ताकि उनकी जान बच सके।

ट्रंप ने कोरोना को बताया था 'चीनी वायरस'

अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा कोरोना को चीनी वायरस कहे जाने के बाद दोनों देशों में तल्खी बढ़ गई थी। इसके बाद दोनों देशों ने एक-दूसरे पर आरोप नहीं लगाए जाने की मांग की थी। ट्रंप से पहले उनके एक सहयोगी और रिपब्लिकन सीनेटर ने भी इसे चीनी वायरस कहा था।

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