नई दिल्‍ली, जागरण स्‍पेशल। अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप की भारत यात्रा पर चीन और पाकिस्‍तान की पैनी नजर है। भारत के नमस्‍ते ट्रंप कार्यक्रम से वह पूरी तरह से तिलमिलाया है। भारत में ट्रंप के भव्‍य स्‍वागत के बीच चीन की निगाहें ट्रंप और मोदी की दोस्‍ती पर टिकी है। चीन सरकार ने अपने मुखपत्र ग्‍लोबल टाइम्‍स में इस पर बड़ी चिंता जाहिर की है। वहीं, दूसरी तरफ पाकिस्‍तान ने इस पर सधी हुई प्रतिक्रिया दी है? आखिर क्‍या है उसकी मजबूरी ?  

ग्‍लोबल टाइम्‍स में चीन की बड़ी चिंता

  •  पत्र कहता है कि अमेरिका हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सामरिक संतुलन बनाने में जुटा है। वह अपने लक्ष्यों को हासिल करने के लिए चीन के पड़ोसियों को लुभाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा है।
  • भारत और इस क्षेत्र में चीन के प्रभाव को संतुलित करने के लिए वॉशिंगटन और नई दिल्ली के साथ सहयोग बढ़ाने में जुटा है। 
  • इसलिए पेइचिंग को इस पर पूरी तरह से गौर करना चाहिए। अमेरिका चीन को प्रतिद्वंद्वी मानता है। अमेरिकी के रुख में निकट भविष्य में कोई बदलाव आने वाला नहीं है।
  • नई दिल्ली के साथ वॉशिंगटन का असली हित चीनी हितों को रोकना है। इसलिए भारत के साथ टैरिफ वॉर के बावजूद ट्रंप ने सितंबर 2019 में भारतीय पीएम नरेंद्र मोदी का अमेरिका में गर्मजोशी से स्वागत किया था। अंतरराष्ट्रीय स्थिति बदल रही है, इसलिए चीन इसे हल्के में नहीं ले सकता है।
  • अमेरिका ने भारत को कभी अपने प्रतिद्वंद्वी के तौर पर नहीं देखा है। वह इसे एशिया में शक्ति संतुलन के रूप में देखता है।
  • ट्रंप के भारत दौरे का मकसद महज केवल हथियार बेचना है, लेकिन वह केवल पैसे नहीं चाहते हैं। ट्रंप इसके जरिए वैश्विक रिश्तों को नया आयाम देने पर जोर दे रहे हैं, जो कि अमेरिका के हिंद-प्रशांत रणनीति का हिस्सा है।
  • ग्‍लोबल टाइम्‍स ने लिखा है कि दोनों देशों के मजबूत होते रिश्‍तों के पीछे चीन को रोकने की कोशिश है। यह दौरा अमेरिका की ओर से नई दिल्ली को दिए जाने वाले सामरिक-राजनीतिक महत्व को दर्शाता है।
  • इसमें चिंता जाहिर की गई है दोनों देशों के बीच रक्षा खरीद में लगातार इजाफा हो रहा है। वर्ष 2008 में जहां दोनों देशों के बीच रक्षा खरीद नगण्य थी, वहीं वर्ष 2019 तक 15 अरब डॉलर का हो चुका है।   
  • ट्रंप ने आने वाले अमेर‍िकी राष्ट्रपति चुनाव के लिए अमेरिका में भारतीय मूल के लोगों से समर्थन प्राप्त करने के लिए इस यात्रा का उपयोग करने के इरादे से किया है। अमेरिका में कई भारतीय सोशल मीडिया, प्रौद्योगिकी और सॉफ्टवेयर आउटसोर्सिंग के क्षेत्र में महत्वपूर्ण पदों पर रहते हैं और अमेरिकी समाज में बहुत प्रभाव रखते हैं।

आर्थिक तंगी से जूझ रहा पाक ने नमस्‍ते ट्रंप पर दी सधी हुई प्रतिक्रिया 

आर्थिक तंगी से जूझ रहा पाकिस्‍तान ने नमस्‍ते ट्रंप पर बहुत सधी हुई प्रतिक्रिया दी है। उसने दावा किया है कि अमेरिकी राष्‍ट्रपति ट्रंप ने पाकिस्‍तान के साथ बे‍हतर रिश्‍तों की बात की है। पाक जानता है कि आर्थिक तंगी से जूझ रहे पाक को अमेरिका की बेहद जरूरत है। गुजरात के अहमदाबाद में बोलते हुए ट्रंप ने कहा था कि हम कट्टर इस्लामिक आतंकवाद से निपटने के लिए एक साथ हैं। हालांकि, पाकिस्‍तानी मीडिया ट्रंप के भाषण के इन बातों का जिक्र न करते हुए पाकिस्‍तान समर्थक बताकर उसका प्रचार कर रहा है।

पाक मीडिया के अनुसार, ट्रंप ने अपने भाषण में पाकिस्‍तान की तारीफ की है। पाकिस्‍तान सरकार ने बड़ी चतुराई से इस्‍लामिक कट्टरवाद से अपने आपको अलग कर लिया, जबकि भारत पाकिस्‍तान में पोषित आतंकवाद से पीडि़त है। ट्रंप का इशारा उस ओर ही था, लेकिन पाकिस्‍तान ने उसकी पूरी तरह से अनदेखी की। 

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