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बीजिंग, एएफपी।  दुनिया के सबसे अमीर लोगों में शुमार बिल गेट्स सोमवार को बीजिंग में एक मंच पर मानव मल से भरे जार के साथ आए। उनका ऐसा करने का मकसद लोगों का ध्यान विकासशील देशों में शौचालयों की कमी की ओर आकृष्ट कराना था।

बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन द्वारा आयोजित 'रीइन्वेंटेड टॉयलेट एक्सपो' में लोगों को संबोधित करते हुए बिल गेट्स ने जार की ओर इशारा करते हुए कहा कि बच्चे जब बाहर खेलते हैं तो वे इसके संपर्क में आते हैं। इसलिए इसे हम सिर्फ जीवन की गुणवत्ता के साथ ही नहीं, बल्कि बीमारियों और कुपोषण से होने वाली मौतों से भी जोड़ते हैं।

उन्होंने कहा कि दुनिया की आधी से ज्यादा आबादी के पास स्वच्छ सैनिटेशन की सुविधा नहीं है। गेट्स ने कहा कि जब भी बुनियादी अधिकारों के बारे में विचार किया जाता है तो स्वास्थ्य और पर्याप्त भोजन के बारे में सोचा जाता है, लेकिन इस सूची में पर्याप्त संख्या में शौचालय भी शामिल हैं।

मालूम हो कि बीमारियों से लड़ने के प्रयासों के तहत बिल गेट्स पहले भी भौचक्का करने की रणनीति का इस्तेमाल कर चुके हैं। 2009 में मलेरिया रोग की तरफ लोगों का ध्यान आकर्षित करने के लिए उन्होंने कैलिफोर्निया में टेक्नोलॉजी, एंटरटेनमेंट, डिजायन (टीईडी) कांफ्रेंस में मच्छरों को छोड़ दिया था। करीब एक मिनट तक इंतजार करने के बाद उन्होंने लोगों को आश्वस्त किया था कि छोड़े गए मच्छर रोगमुक्त हैं।

चीन में भी शौचालय निर्माण का अभियान

भारत की तरह चीन में भी इन दिनों शौचालयों के निर्माण का अभियान चल रहा है। राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने इसे 'टॉयलेट रिवोल्यूशन' कहा है। गेट्स ने भी कहा कि चीन ने करोड़ों लोगों के लिए स्वास्थ्य एवं सैनिटेशन सुविधाओं में सुधार की दिशा में काफी प्रगति की है। वहीं, भारत सरकार का भी कहना है कि देश में खुले में शौच करने वाले लोगों की संख्या में उल्लेखनीय कमी आई है। 2014 में यह संख्या लगभग 55 करोड़ थी जो घटकर 15 करोड़ के आसपास रह गई है। यूनीसेफ के मुताबिक, दुनियाभर में करीब 89 करोड़ लोगों के पास खुले में शौच करने के अलावा कोई विकल्प ही नहीं है।

 

Posted By: Tanisk

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