वाशिंगटन (एजेंसी)। खाने-पीने व रखरखाव से कहीं अधिक सोच मायने रखता है यह तो जानते हैं लेकिन इसी सोच के बदौलत उम्र भी लंबी हो जाएगी यह शायद ही कोई जानता होगा। लेकिन अब एक नवीनतम रिसर्च की रिपोर्ट के अनुसार, घटकर छोटी होती जा रही औसत उम्र बढ़ सकती है बशर्ते लोग अपनी सोच व नजरिया में बदलाव को तैयार हो जाएं।

आजकल की लाइफस्‍टाइल, खान पान में मिलावट को देखते हुए लंबी उम्र की मात्र कामना की जा सकती है। उम्र की औसतन लंबाई घटती जा रही है। इस पर लोगों के जेहन में चिंता के बादल उमड़ रहे हैं। इस विषय पर किए गए एक नए शोध का परिणाम सामने आया है। इसके अनुसार, जो लोग सकारात्‍मक सोच और आशावादी सोच रखते हैं उनकी उम्र लंबी होती है और इनके जीवित रहने के चांसेज 80-85 साल तक हो जाती है।

सिन्‍हुआ न्‍यूज के अनुसार, अमेरिकी शोधकर्ताओं ने 69,744 महिलाएं व 1,429 पुरुषों पर रिसर्च किया। इन सभी महिलाओं व पुरुषों को अपने आशावादी नजरिए व सकारात्‍मक सोच के साथ आदतों की समीक्षा करने के लिए कहा गया। इसके बाद शोधकर्ताओं ने इनकी आशावादी नजरिए को परखा और निष्‍कर्ष निकाला कि वे महिलाएं और पुरुष जिनका जीवन जीने का नजरिया अधिक पॉजिटिव था उनकी उम्र में 15 फीसद की बढ़त हुई। निगेटिव सोच रखने वाले लोगों की तुलना में इनके लंबे उम्र की संभावना 50 से 70 फीसद अधिक थी।

बॉस्टन यूनिवर्सिटी में साइकायट्री की असिस्टेंट प्रफेसर ल्युविना ली कहती हैं, हालांकि रिसर्च में समय से पहले मौत होने के लिए कई रिस्क फैक्टर्स सामने आए हैं, लेकिन हम पॉजिटिव साइकोसोशल फैक्टर्स के बारे में बहुत कम जानते हैं जिससे हेल्दी एजिंग को प्रमोट किया जा सकता है। इस स्टडी के जरिए यह बात सामने आयी है कि आशावादी दृष्टिकोण के जरिए इंसान की जीवन जीने की उम्र को बढ़ाया जा सकता है।

स्‍टडी रिपोर्ट के एक लेखक लारा कुब्‍जांस्‍की ने बताया, ‘अन्‍य रिसर्च से पता चलता है कि अधिक आशावान लोग इमोशंस व बिहेवियर को बेहतर तरीके से मैनेज करते हैं और उसी तरीके से बड़ी आसानी के साथ अपने तनावों और मुश्‍किलों का हल निकाल लेते हैं। यह स्‍टडी सोमवार को नेशनल अकेडमी ऑफ साइंसेज के जर्नल में प्रकाशित की गई।

Posted By: Monika Minal

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