बीजिंग, प्रेट्र। अगले महीने चीन में भारत-चीन के बीच 21वें दौर की सीमा वार्ता होगी। इस वार्ता में भारतीय पक्ष का नेतृत्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीन की ओर से स्टेट काउंसलर एवं विदेश मंत्री वांग यी करेंगे। 23 से 25 नवंबर तक होने वाली सीमा वार्ता में डोभाल और वांग मानद विशेष प्रतिनिधि बनाए गए हैं। इस साल के शुरू में हुए फेरबदल में स्टेट काउंसलर के रूप में यांग जिएची की जगह लेने वाले वांग के लिए यह वार्ता का पहला दौर होगा।

बीजिंग से बाहर हो सकती है वार्ता
सूत्रों ने कहा कि वार्ता की तारीख तय कर ली गई है लेकिन स्थान अभी तक निर्धारित नहीं किया गया है। उम्मीद है कि इस बार बीजिंग से बाहर वार्ता आयोजित की जाएगी। विशेष प्रतिनिधि वार्ता दोनों देशों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसका कारण यह है कि सीमा विवाद के समाधान का प्रयास करने के अलावा इसमें द्विपक्षीय रिश्ते के हर पहलू शामिल हैं।

दो दशकों से नहीं हो पाया है विवाद का समाधान
दोनों ओर के अधिकारियों ने माना है कि दो दशकों से सीमा विवाद का समाधान नहीं हो पाया है। 20वें दौर की वार्ता में काफी प्रयास किया गया था। इसमें सीमा पर शांति और तनाव कम करने की दिशा में तंत्र तैयार किया था। यह कदम दोनों देशों की ओर से आक्रामक पेट्रोलिंग के कारण तनाव पैदा होता है।

नई दिल्ली में हुई थी पिछले दौर की वार्ता
वार्ता का पिछला दौर नई दिल्ली में आयोजित हुआ था। पिछले वर्ष डोकलाम में चीन की सेना द्वारा भारत के रणनीतिक गलियारे के समीप सड़क बनाने के प्रयास के कारण 73 दिनों तक चले गतिरोध के बाद डोभाल और यांग के बीच वार्ता हुई थी। चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के पीछे हटने के बाद गतिरोध खत्म हुआ था।

वार्ता के बाद हुई थी शिखर वार्ता
डोभाल और यांग के बीच वार्ता से ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के बीच अनौपचारिक शिखर वार्ता की राह तैयार हुई थी। दोनों नेताओं के बीच इस वर्ष अप्रैल में वार्ता हुई जिससे न केवल दोनों देशों के बीच संबंध सामान्य हुए, बल्कि सीमा विवाद को परे रखते हुए सभी क्षेत्रों में संबंधों में सुधार आया।

Posted By: Ravindra Pratap Sing

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