टोरंटो, प्रेट्र। पृथ्वी और चंद्रमा पर मूल्यवान धातुओं की मौजूदगी के संबंध में किए गए एक अध्ययन के मुताबिक पृथ्वी के उपग्रह के गर्भ में कई मूल्यवान धातुओं का बड़ा भंडार छुपा हो सकता है। कनाडा की डलहौजी यूनिवसिर्टी के प्रोफेसर जेम्स ब्रेनन ने दावा किया है कि वह चंद्रमा पर मौजूद च्वालामुखी पत्थरों में पाए जाने वाले सल्फर का संबंध चांद के गर्भ में छुपे आयरन सल्फेट से जोड़ने में सफल रहे हैं। ब्रेनन ने कहा कि धरती पर मौजूद धातु भंडारों के विश्लेषण से पता चलता है कि प्लैटिनम और पैलेडियम जैसी मूल्यवान धातुओं की मौजूदगी के लिए आयरन सल्फाइड बहुत महत्वपूर्ण है।

4.5 अरब साल पहले हुआ था निर्माण
वैज्ञानिकों का अनुमान है कि चंद्रमा का निर्माण धरती से निकले एक बड़े ग्रह के आकार के गोले से करीब 4.5 अरब साल पहले हुआ है। दोनों के इतिहास में समानता की वजह के कारण माना जाता है कि दोनों की बनावट भी मिलती-जुलती है। नेचर जियोसाइंस पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन में चंद्रमा पर मौजूद धातुओं की संभावनाओं को बारे में विस्तार से बताया गया है।

दब गईं धातुएं
ब्रेनन ने कहा ‘अध्ययन के नतीजे बताते हैं कि चंद्रमा की चट्टानों में सल्फर की मौजूदगी, उसकी गहराई में आयरन सल्फाइड की उपस्थिति का अहम संकेत है। हमारे विचार से, जब लावा बना तब कई बहुमूल्य धातुएं नीचे दब गईं होंगी।’

सतह पर नहीं आ पाती धातु
पिछले अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया था कि चंद्रमा की ज्वालामुखी चट्टानों में कीमती धातुओं का मिश्रण आश्चर्यजनक रूप से कम था, जिसके बाद ब्रेनन ने कनाडा की कैरलटन यूनिवर्सिटी के सहयोगी जिम मुंगाल और भूभौतिकीय प्रयोगशाला के नील बेनेट के साथ आयरन सल्फाइड के निर्माण का निर्धारण करने के लिए प्रयोग किए। इस दौरान शोधकर्ताओं को ऐसे संकेत मिले जिसने आधार पर उन्होंने दावा किया कि आयरन सल्फेड से बनी चट्टानों में कीमती धातु मौजूद हैं पर ये आयरन सल्फेड से ही बंधी हुई हैं। जिसके कारण ये धातुएं लावा के साथ चंद्रमा की सतह पर नहीं आ पातीं।

अभी और अध्ययन की है जरूरत
ब्रेनन ने कहा कि हम काफी लंबे समय से पृथ्वी की सतह पर शोध कर रहे हैं, इसलिए हमें इसकी रचना के बारे में अच्छी जानकारी है, लेकिन चंद्रमा के साथ ऐसा बिल्कुल नहीं है। अभी हमारे पास कुल 400 किलोग्राम का चंद्रमा की चट्टानों और मिट्टी के नमूने हैं, जिसे अपोलो और चंद्र मिशनों द्वारा लाया गया था। यह सामग्री बहुत ज्यादा नहीं है, इसलिए चंद्रमा की सतह के बारे में अन्य जानकारियों के लिए अभी और अध्ययन की आवश्यकता है।

Posted By: Sanjay Pokhriyal

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