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ट्रंप को चिनफिंग का संदेश: एशिया में चीन के प्रभाव को चुनौती न दे अमेरिका, ताइवान-जापान पर जताई चिंता

Published: Sat, 26 Sep 2026 09:50 PM (IST)Updated: Sat, 26 Sep 2026 10:07 PM (IST)

चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने अपनी अमेरिकी यात्रा के दौरान ट्रंप को संदेश दिया कि चीन को हल्के में न ...और पढ़ें

चिनफिंग के दौरे का बड़ा संदेश। (रॉयटर्स)

 चिनफिंग के दौरे का बड़ा संदेश। (रॉयटर्स)

HighLights

  1. चिनफिंग ने अमेरिका को एशिया में चीन के प्रभाव को चुनौती न देने को कहा।

  2. ताइवान को हथियार देने और जापान से सुरक्षा सहयोग पर चिंता जताई गई।

  3. यात्रा का उद्देश्य ट्रंप की नीतियों को चीन के हितों के अनुरूप प्रभावित करना था।

डिजिटल डेस्क, वाशिंगटन। तीन दिन का ऐतिहासिक दौरा पूरा कर चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग बीजिंग लौट गए। इस यात्रा के जरिए उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप को यह संदेश देने की कोशिश की कि चीन को अब हल्के में नहीं लिया जा सकता और एशिया में उसके बढ़ते प्रभाव को अमेरिका चुनौती देने से बचे।

खासतौर पर ताइवान को अमेरिकी हथियार देने और जापान के साथ सुरक्षा सहयोग के मुद्दे पर चीन ने अपनी चिंताएं स्पष्ट कीं।

विशेषज्ञों के अनुसार, चिनफिंग की यात्रा का मकसद अमेरिका से तत्काल कोई बड़ा समझौता हासिल करने से ज्यादा ट्रंप के सोच और नीतियों को प्रभावित करना था। ट्रंप के साथ लगातार मुलाकातों ने चीन को अमेरिकी नीतियों की कमजोरियों को समझने और अपने हितों के अनुरूप उन्हें प्रभावित करने का अवसर दिया।

ताइवान और जापान पर चीन का संदेश

ताइवान के मुद्दे पर चिनफिंग ने ट्रंप से अमेरिका का समर्थन सीमित रखने पर जोर दिया। बीजिंग ताइवान को अपना हिस्सा मानता है, जबकि अमेरिका ताइवान को हथियार और अन्य सुरक्षा सहयोग देता रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप के गर्मजोशी भरे स्वागत से यह संकेत मिल सकता है कि अमेरिका ताइवान को लेकर अपने कदमों में सावधानी बरते।

जापान के मामले में चिनफिंग ने इतिहास का सहारा लेते हुए टोक्यो को फिर से उभरते सैन्य खतरे के रूप में पेश किया। उन्होंने ट्रंप को यह भी याद दिलाया कि चीन और अमेरिका द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान एक ही पक्ष में थे। इसके जरिए चीन ने एशिया की सुरक्षा व्यवस्था में जापान की भूमिका को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई।

व्यापार पर सीमित बढ़त

व्यापार के मोर्चे पर दोनों देश अपने समझौते को केवल दो महीने आगे बढ़ाने पर सहमत हुए। पश्चिम एशिया और यूक्रेन के युद्धों पर भी दोनों नेताओं के बीच चर्चा हुई, लेकिन इन संघर्षों को समाप्त करने की दिशा में कोई ठोस उपाय सामने नहीं आया।

बैठक में संबंधों में स्थिरता और सहयोग की बात जरूर हुई, लेकिन व्यापार असंतुलन, तकनीकी प्रतिबंध और ताइवान जैसे प्रमुख मुद्दों पर कोई बड़ा समझौता नहीं हुआ।

चीन में चिनफिंग की छवि को प्रमुख

ताइस यात्रा का इस्तेमाल चिनफिंग ने वैश्विक मंच पर चीन की बढ़ती हैसियत दिखाने के लिए भी किया। चीन की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी के मुखपत्र ‘पीपुल्स डेली’ ने व्हाइट हाउस में उनके स्वागत, सैन्य फ्लाइओवर और ज्वाइंट बेस एंड्रयूज पर ट्रंप के स्वागत से जुड़ी तस्वीरों को पहले पन्ने पर प्रमुखता दी।

चीन के सोशल मीडिया मंचों पर भी इस दौरे की खूब चर्चा हुई। जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी में एशियाई अध्ययन के प्रोफेसर इवान मेडिरोस के अनुसार, यह चीन की ताकत की ऐतिहासिक स्वीकृति है। उनके मुताबिक, चिनफिंग ने चीन को अमेरिका के बराबर दिखाने की कोशिश की, जो चीन की विदेश नीति का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य रहा है।