'मुकाबला करें, कुश्ती नहीं...', अमेरिका के किस डर को खत्म करने के लिए शी चिनफिंग ने दिया ऐसा संदेश?
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप से मुलाकात में शी चिनफिंग ने 'थ्यूसीडाइड्स ट्रैप' से बचने का संदेश दिया, कहा कि चीन की ...और पढ़ें

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और डोनल्ड ट्रंप।
HighLights
शी चिनफिंग ने 'थ्यूसीडाइड्स ट्रैप' से बचने पर जोर दिया।
कहा, चीन की बढ़ती ताकत अमेरिका के लिए खतरा नहीं है।
अमेरिका-चीन व्यापार युद्धविराम जनवरी 2027 तक बढ़ाया गया।
डिजिटल डेस्क, वॉशिंगटन। दुनिया की दो सबसे बड़ी महाशक्तियों अमेरिका और चीन के बीच के रिश्ते हमेशा से वैश्विक राजनीति का केंद्र रहे हैं। ऐसे में जब शुक्रवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग की मुलाकात हुई, तब कुछ ऐसा देखने को मिला, जिसने एक बार फिर वैश्विक कूटनीति का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।
अब इसकी वजह है कि, एक तरफ जहां चीन वैश्विक मंच पर अपनी ताकत तेजी से बढ़ा रहा है, वहीं दूसरी तरफ शी चिनफिंग ने अमेरिका को यह भरोसा दिलाने की कोशिश की है कि चीन की बढ़ती ताकत अमेरिका के लिए खतरा नहीं है।
क्या होता है थ्यूसीडाइड्स ट्रैप, चिनफिंग ने क्यों किया इसका जिक्र?
ट्रंप से मुलाकात के दौरान चिनफिंग ने एक शब्द का इस्तेमाल किया थ्यूसीडाइड्स ट्रैप, जो कि वैश्विक राजनीति में चर्चा का केंद्र बन गया। अब यह चर्चा का केंद्र क्यों बना? आइए पहले इस बात को समझते हैं।
बता दें कि हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के प्रसिद्ध राजनीतिक वैज्ञानिक ग्राहम एलिसन द्वारा गढ़े गए शब्द 'थ्यूसीडाइड्स ट्रैप' का मतलब उस ऐतिहासिक खतरे से है, जो तब पैदा होता है जब कोई उभरती हुई ताकत जैसे आज का चीन किसी स्थापित महाशक्ति जैसे अमेरिका को चुनौती देती है। इतिहास गवाह है कि ऐसी स्थिति में अक्सर युद्ध या बड़े टकराव की नौबत आ ही जाती है।
अच्छा, तो इसी डर की बात कर रहे थे ट्रंप...
गौर करने वाली बात यह है कि व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की मौजूदगी में बोलते हुए शी चिनफिंग ने इसी डर को दूर करने की कोशिश की। उन्होंने बड़े आत्मविश्वास के साथ कहा कि थ्यूसीडाइड्स ट्रैप से पार पाया जा सकता है। उनके कहने का साफ मतलब था कि चीन और अमेरिका इतिहास की उन खूनी गलतियों को दोहराने से बच सकते हैं।
'मुकाबला कीजिए, कुश्ती मत लड़िए...'
इस दौरान शी चिनफिंग ने बहुत ही शानदार कूटनीतिक मिसाल देते हुए कहा कि यह एक-दूसरे से आगे निकलने की दौड़ होनी चाहिए, न कि ऐसी कुश्ती जिसमें एक जीते और दूसरा हारे।
शी ने अपने भाषण में अमेरिकी जनता और प्रशासन को यह समझाने की कोशिश की कि चीन और अमेरिका के रास्ते अलग हो सकते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि दोनों देश एक-दूसरे को तबाह करने पर तुले हैं।
चिनफिंग ने सपनों के मेल का तर्क क्यों दिया?
चीनी राष्ट्रपति ने आगे कहा कि चीन का महान कायाकल्प और डोनल्ड ट्रंप का 'मेक अमेरिका ग्रेट अगेन' का नारा एक साथ आगे बढ़ सकता है। दोनों देश प्रतिस्पर्धी जरूर हैं, लेकिन उनके मतभेद ऐसे होने चाहिए जो प्रबंधनीय हों और शांति को बनाए रखें।
व्यापारिक मोर्चे पर भी मिली राहत
हालांकि गौर करने वाली बात यह है कि चिनफिंग और ट्रंप के मुलकात सिर्फ जुबानी जमा-खर्च ही नहीं, इस मुलाकात के दौरान एक बड़ा व्यावहारिक कदम भी उठाया गया।
वॉशिंगटन ने घोषणा की कि दोनों देशों ने अपने व्यापारिक संघर्ष को थामते हुए ट्रेड ट्रूस को जनवरी 2027 तक बढ़ा दिया है। इस फैसले ने फिलहाल दोनों देशों के बीच चल रहे आर्थिक तनाव के एक बड़े तात्कालिक मुद्दे को टाल दिया है।
