विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

जो ग्रीनलैंड पर राज करेगा वही बनेगा अंतरिक्ष का सिकंदर, धमकियों के बीच छिपा है ट्रंप का असली सैन्य मकसद

Published: Sat, 24 Jan 2026 05:58 AM (IST)Updated: Sat, 24 Jan 2026 06:53 AM (IST)

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ग्रीनलैंड को लेकर अपनी बात हर रोज बदल रहे हैं। कभी धमकी देते हैं तो ...और पढ़ें

जो ग्रीनलैंड पर राज करेगा वही बनेगा अंतरिक्ष का सिकंदर (फोटो- रॉयटर)

जो ग्रीनलैंड पर राज करेगा वही बनेगा अंतरिक्ष का सिकंदर (फोटो- रॉयटर)

HighLights

  1. ग्रीनलैंड में हैं ऑर्बिट में पेलोड लांच करने के लिए आदर्श स्थितियां, यहां से संभव है बेहतर निगरानी 

  2. ग्रीनलैंड हासिल करके अमेरिका वैश्विक अंतरिक्ष निगरानी क्षमताओं का बड़ा हिस्सा नियंत्रित कर सकेगा

  3. आउटर स्पेस में दिनों-दिन बढ़ रही है सैन्य इस्तेमाल के लिए तैनात किए वाले सेटेलाइट की संख्या 

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ग्रीनलैंड को लेकर अपनी बात हर रोज बदल रहे हैं। कभी धमकी देते हैं तो कभी अमेरिका के अहसान याद दिलाते हैं और कभी सेना का इस्तेमाल न करने की बात कहते हैं। इन सबके बीच एक चीज में निरंतरता है। वह इस बात पर लगातार जोर दे रहे हैं कि आर्कटिक आइसलैंड अमेरिका के लिए रणनीतिक नजरिये से बेहद अहम है।

ट्रंप ऐसा इसलिए कर रहे हैं क्योंकि आउटर स्पेस (बाहरी अंतरिक्ष) में सैन्य इस्तेमाल के लिए तैनात किए गए सेटेलाइट की संख्या दिनों दिन बढ़ रही है। ऐसे में ग्रीनलैंड आने वाले समय में आउटर स्पेस की निगरानी करने और उसे कंट्रोल करने का सबसे मजबूत बेस बनेगा।

इसके अलावा जलवायु परिवर्तन की वजह से आर्कटिक की बर्फ पिघल रही है और ऐसे में नए समुद्री मार्ग खुलेंगे। ऐसे में यहां से व्यापार के नए रूट भी निकलेंगे। यह बात ग्रीनलैंड की रणनीतिक स्थिति को और भी अधिक महत्वपूर्ण बना देती है।

ऑर्बिट बना नया रणनीतिक हथियार

जैसे-जैसे दुनिया भर में तनाव बढ़ रहा है, यह द्वीप भू-राजनीतिक दबाव का केंद्र बिंदु बन गया है। यह दिखाता है कि पुराना अंतरराष्ट्रीय कानूनी तंत्र कैसे कमजोर पड़ने लगा है। इन सबके केंद्र में पिटुफिक स्पेस बेस है, जिसे पहले थुले एयर बेस के नाम से जाना जाता था। शीत युद्ध के दौर में अहम पोस्ट रहा यह बेस अब अमेरिकी सेना के स्पेस फोर्स हब का एक अहम हिस्सा है, जो मिसाइल का पता लगाने से लेकर मौसम की निगरानी तक हर चीज के लिए जरूरी है।

आज की दुनिया में ऑर्बिट नई रणनीतिक संपत्ति है। ऐसे में इस पर नजर रखने की सहूलियत किसी भी देश को रणनीतिक तौर पर बड़ी बढ़त देता है। अंतरिक्ष को कंट्रोल करने के लिए कारगर है ग्रीनलैंड ट्रंप अंतरिक्ष को कंट्रोल करने में ग्रीनलैंड की भूमिका को समझ गए हैं। इसीलिए उन्होंने बार-बार थुले की तारीफ़ की है और इसे धरती के ऊपर होने वाली चीजों पर नजर रखने के लिए सबसे जरूरी संपत्तियों में से एक बताया है।

उन्होंने अमेरिका से यहां अपनी मौजूदगी बढ़ाने के लिए हर विकल्प पर विचार करने की बात कही है। जबरन,भुगतान करके खरीदना या बातचीत जो भी तरीका काम करे। उनका मूल संदेश एक ही है। ग्रीनलैंड अमेरिका की आर्कटिक और अंतरिक्ष की महत्वाकांक्षाओं के लिए बहुत जरूरी है। यह सिर्फ सैन्य निगरानी के बारे में नहीं है।

निजी क्षेत्र की कंपनियां रिकॉर्ड गति से रॉकेट लांच कर रही हैं

जैसे-जैसे निजी क्षेत्र की कंपनियां रिकॉर्ड गति से रॉकेट लांच कर रही हैं, ग्रीनलैंड की भौगोलिक स्थिति कुछ खास चीजें देती हैं। रॉकेट लांच के लिए आदर्श स्थिति। ऊंचे अक्षांश वाली जगहें पेलोड को पोलर एक और सन-सिंक्रोनस ऑर्बिट में लांच करने के लिए आदर्श हैं। सन सिंक्रोनस ऑर्बिट एक खास तरह का पोलर ऑर्बिट है जिसमें सेटेलाइट उसी दर से पृथ्वी का चक्कर लगता है, जिस दर से पृथ्वी सूर्य के चारों ओर घूमती है।

ग्रीनलैंड के खाली मैदान और खुले समुद्री रास्ते इसे एक संभावित आर्कटिक लांच हब बनाते हैं। लांच के लिए उपलब्ध स्थानों की कमी और एक्सेस की समस्या के कारण वैश्विक लांच क्षमता कम है।

यह द्वीप अचानक प्रीमियम रियल एस्टेट बन गया है

इसकी वजह से यह द्वीप अचानक प्रीमियम रियल एस्टेट बन गया है। ग्रीनलैंड में अमेरिकी दिलचस्पी उसी समय बढ़ रही है, जब ''नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था'' शांति और सुरक्षा बनाए रखने में अप्रभावी साबित हो रही है। अंतरिक्ष कानून काफी कमजोर हैं।

1967 की आउटर स्पेस ट्रीटी दो महाशक्तियों अमेरिका और सोवियत संघ और सीमित सेटेलाइट वाली दुनिया के लिए बनाई थी। उस समय यह नहीं सोचा गया था कि आने वाले निजी क्षेत्र की कंपनियों के सेटेलाइट की भीड़ होगी। चांद पर व्यासायिक परियोजनाएं शुरू की जा सकेंगी।

ऑर्बिट को नियंत्रित करने की क्षमता इसने कभी यह भी अनुमान नहीं लगाया था कि थुले/पिटुफिक जैसी धरती-आधारित जगहें यह तय करेंगी कि कौन आबिर्ट की निगरानी कर सकता है या उस पर हावी हो सकता है। जैसे-जैसे देश रणनीतिक जगहों के लिए होड़ कर रहे हैं, संधि के मूल सिद्धांतों को टूटने की कगार पर धकेला जा रहा है।

प्रमुख शक्तियां अब धरती और आर्बिट दोनों क्षेत्रों को साझा संपत्ति की तरह कम और नियंत्रित करने और बचाव करने के लिए रणनीतिक संपत्ति की तरह ज्यादा देखती हैं। ग्रीनलैंड ठीक इसी फॉल्ट लाइन पर है। अगर अमेरिका द्वीप पर अपना नियंत्रण बढ़ाता है, तो वह वैश्विक अंतरिक्ष निगरानी क्षमताओं का एक बहुत बड़ा हिस्सा नियंत्रित करेगा।

यह असंतुलन असहज सवाल खड़े करता है। जब इसकी देखरेख के लिए जरूरी उपकरण इतने कम हाथों में केंद्रित हों तो अंतरिक्ष एक साझा विरासत के रूप में कैसे काम कर सकता है? जब धरती पर भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा सीधे आर्बिट में फैल जाती है तो क्या होता है?