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अमेरिका में 'नॉर-ईस्टर' तूफान का तांडव: भारी बारिश, बाढ़ ने मचाई तबाही; 20 फीट तक ऊंची उठ रही लहरें

By Shubham KumarEdited By: Shubham Kumar
Published: Sun, 27 Sep 2026 01:44 PM (IST)Updated: Sun, 27 Sep 2026 01:46 PM (IST)

अमेरिका के पूर्वी तट पर 'नॉरईस्टर' तूफान का भयंकर तांडव जारी है। भारी बारिश, बाढ़ और 20 फीट ऊंची लहरों ने तबाही मचाकर जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है।

HighLights

  1. पूर्वी तट पर नॉर-ईस्टर तूफान से भारी बारिश और बाढ़।

  2. लाखों घरों में बिजली गुल, सैकड़ों उड़ानें रद्द हुईं।

  3. अल नीनो के कारण तूफान की तीव्रता और बढ़ी।

डिजिटल डेस्क, वाशिंगटन। अमेरिका का पूर्वी तट इस समय प्रकृति के एक बेहद खतरनाक और विनाशकारी रूप का सामना कर रहा है। मिड-अटलांटिक से लेकर न्यू इंग्लैंड तक एक शक्तिशाली 'नॉर-ईस्टर' तूफान ने तबाही मचा रखी है।

इस भीषण तूफान के कारण लगातार मूसलाधार बारिश, तेज हवाएं, खतरनाक समुद्री लहरें और भारी तटीय बाढ़ आ गई है, जिससे आम जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। बता दें कि 'नॉर-ईस्टर' एक बेहद शक्तिशाली मौसमी प्रणाली तूफान है जो अमेरिका के पूर्वी तट के पास या उसके ऊपर विकसित होती है।

'Nor'easter' storm wreaks havoc in the US (1)

तबाही का मंजर- बिजली गुल, उड़ानें रद्द और सड़कों पर चली नावें

इस खतरनाक तूफान ने अमेरिका के कई राज्यों में भारी तबाही मचाई है। तूफान के कारण गिरे पेड़ों, शाखाओं और बिजली के तारों की वजह से एक समय पर 100000 से अधिक घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की बिजली गुल हो गई थी। शनिवार दोपहर तक भी न्यू जर्सी, कनेक्टिकट, न्यूयॉर्क और पेंसिलवेनिया में 88000 से अधिक उपभोक्ता बिना बिजली के रहने को मजबूर थे।

प्रभावित हुई यातायात

विमानन डेटा कंपनी 'फ्लाइटअवेयर' के अनुसार, तूफान के चलते अमेरिकी हवाई अड्डों पर करीब 425 उड़ानें रद्द करनी पड़ीं और 1300 से अधिक उड़ानें देरी से चलीं। इसके अलावा खेलकूद के आयोजन, संगीत कार्यक्रम और कई बड़े फेस्टिवल्स भी रद करने पड़े।

'Nor'easter' storm wreaks havoc in the US (2)

सड़कों पर नावें, अलग-अलग राज्यों में असर

इतना ही नहीं इस तबाही का असर इतना भयावह है कि न्योजर्सी और न्यूयॉर्क में बाढ़ का पानी पूरा भर गया है। इसके चलते कुछ स्थानीय लोगों को सड़कों पर आने-जाने के लिए छोटी नावों का सहारा लेना पड़ा। दूसरी तरफ न्यू जर्सी के सर्फ सिटी में घरों के अंदर पानी घुस गया है, ओशन सिटी में तेज लहरों ने समुद्र तटों का कटाव कर दिया है, और वर्जीनिया के नोरफोक में पानी से भरी सड़कों पर वाहन संघर्ष करते नजर आए।

कैसे पड़ा 'नॉर-ईस्टर' तूफान नाम?

इस बात को ऐसे समझा जा सकता है कि उत्तर की ओर से आने वाली ठंडी हवाओं और अटलांटिक व दक्षिण से आने वाली गर्म-नम हवाओं के बीच टकराव से यह ऊर्जा प्राप्त करता है। जैसे-जैसे यह मजबूत होता है, तट से टकराने वाली हवाएं उत्तर-पूर्व दिशा से चलती हैं, इसलिए इसे 'नॉर-ईस्टर' कहा जाता है।

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क्यों बढ़ जाता है खतरा?

यह तूफान अपने साथ भारी बारिश, तेज हवाएं, तटीय बाढ़ और विशालकाय लहरों का खतरनाक संयोजन लेकर आता है। भारी बारिश से ड्रेनेज सिस्टम फेल हो जाता है और अंदरूनी हिस्सों में बाढ़ आ जाती है।

इसके अलावा यह विशेष तूफान इसलिए भी ज्यादा खतरनाक है क्योंकि यह बहुत धीमी गति से आगे बढ़ रहा है। इसका मतलब है कि तटीय इलाकों के लोगों को जल्दी राहत मिलने के बजाय लंबे समय तक तेज हवाओं, ऊंची लहरों और बाढ़ का सामना करना पड़ रहा है।

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इस भयानक तूफान को भड़काने के पीछे क्या वजह है?

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, इस तूफान के पीछे तात्कालिक वायुमंडलीय स्थितियां, तेज हवाएं और तापमान का अंतर तो जिम्मेदार है ही, लेकिन इसके बैकग्राउंड में एक बहुत बड़ा जलवायु चक्र काम कर रहा है, जिसे 'अल नीनो' कहते हैं।

अल नीनो का असर को ऐसे समझिए कि अल नीनो उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर में एक प्राकृतिक चक्र है, जिसमें महासागर का तापमान असामान्य रूप से गर्म हो जाता है। इस साल का अल नीनो काफी मजबूत है।

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तूफानों को ऐसे मिल जाता है बढ़ावा...

पूर्वोत्तर अमेरिका के लिए अल नीनो प्रशांत जेट स्ट्रीम को दक्षिण की ओर खिसका सकता है, जो दक्षिण-पूर्वी अमेरिका के पास बनने वाले तूफानों को आवश्यक ऊर्जा और नमी प्रदान करता है। यही वजह है कि अल नीनो के वर्षों में नॉर-ईस्टर जैसे तूफान अधिक बार और तीव्रता से आते हैं।

आगे क्या स्थिति रहने की संभावना है?

गौरतलब है कि राष्ट्रीय मौसम सेवा ने चेतावनी दी है कि यह खतरनाक मौसम अभी थमा नहीं है। अटलांटिक सिटी के उत्तर में शनिवार रात से रविवार तक सबसे ऊंचे ज्वार आने की आशंका जताई गई है, जिससे तटीय इलाकों में बाढ़ का खतरा और बढ़ गया है।

हालांकि नॉर-ईस्टर आमतौर पर ठंड के महीनों में आते हैं, लेकिन इस बार इतनी ताकतवर प्रणाली का इतनी जल्दी आ जाना मौसम वैज्ञानिकों के लिए भी चिंता का विषय बना हुआ है। प्रशासन और आपातकालीन एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं, क्योंकि करोड़ों लोगों की आबादी अभी भी इस खतरनाक तूफान के रास्ते में बनी हुई है।