'अपनी हरकतें सुधारें', रूसी तेल खरीदने पर भड़की ट्रंप की टीम; भारत पर पड़ेगा असर?
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने रूस के तेल व्यापार को लेकर भारत और चीन को कड़ा संदेश दिया है, जिसमें रूसी ...और पढ़ें
HighLights
ट्रंप ने भारत-चीन को रूसी तेल व्यापार पर दी चेतावनी।
भारत ने ऊर्जा सुरक्षा का हवाला देते हुए अमेरिकी चेतावनी को नकारा।
लिंडसे ओ. ग्राहम कानून 2026 रूसी तेल खरीदारों पर प्रतिबंध लगाएगा।
डिजिटल डेस्क, वाशिंगटन। रूस के तेल व्यापार को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने भारत और चीन को कड़ा संदेश दिया है। ट्रंप ने कहा, 'रूसी तेल और गैस पर निर्भरता कम करें, वरना अमेरिका से अभूतपूर्व आर्थिक प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है।'
अमेरिका ने भारत और चीन को दी चेतावनी
अमेरिकी कांग्रेस में रूस पर प्रतिबंध लगाने वाला बिल पास होने के बाद मीडिया से बात करते हुए रिपब्लिकन सीनेटर रिचर्ड ब्लुमेंथल ने नई दिल्ली और बीजिंग को चेतावनी दी और कहा, 'बेहतर होगा कि अपनी हरकतें सुधारें। अपना तेल और गैस कहीं और से खरीदें। तुष्टीकरण कोई रणनीति नहीं है।'
भारत का अमेरिका को जवाब
इस बीच, भारत ने कहा कि वो अपने लोगों के लिए ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। अमेरिका द्वारा ऐसे खरीदारों को दंडित करने के नए कदम के बाद भी भारत बाजार की स्थितियों के आधार पर अलग-अलग विक्रेताओं से आपूर्ति लेना जारी रखेगा।
नई दिल्ली की वाशिंगटन को चेतावनी
नई दिल्ली ने वाशिंगटन को चेतावनी देते हुए कहा, 'ऐसे किसी भी नए कदम से दोनों देश के संबंधों पर असर पड़ सकता है।' विदेश मंत्रालय ने कहा कि उसने बिल पास होने पर ध्यान दिया है। साथ ही, मंत्रालय ने बताया कि नई दिल्ली ने हाल के महीनों में अमेरिका के कई अधिकारियों के सामने ये मुद्दा उठाया था और द्विपक्षीय संबंधों और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर इसके संभावित असर के बारे में बहुत साफ-साफ अपनी बात रखी थी।
रूस के साथ तेल व्यापार कम करने का दबाव का विरोध
नई दिल्ली ने रूस के साथ तेल व्यापार कम करने के दबाव का बार-बार विरोध किया है। उसका कहना है कि उसकी बड़ी आबादी और अर्थव्यवस्था को सुरक्षित, किफायती और भरोसेमंद ऊर्जा सप्लाई की जरूरत है। मंत्रालय ने एक बयान में कहा,'भारत ने अपने व्यापार और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाने का पक्का इरादा जाहिर किया है।'
मंत्रालय ने आगे कहा कि सरकार इस कानून के असर से निपटने के लिए व्यापार और उद्योग संगठनों के साथ मिलकर काम करेगी।
रूसी तेल के बड़े खरीददारों में एक भारत
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है, साथ ही रूसी तेल के सबसे बड़े खरीददारों में से भी एक है। माना जाता है कि 2022 में यूक्रेन पर पूर्ण पैमाने पर आक्रमण शुरू करने और पश्चिमी देशों द्वारा कड़े प्रतिबंध लगाए जाने के बाद इससे मॉस्को को अपना बजट भरने में मदद मिलती है।
क्या है लिंडसे ओ. ग्राहम कानून 2026 ?
अमेरिका का नया लिंडसे ओ. ग्राहम कानून 2026 मुख्य रूप से रूस और ईरान पर आर्थिक शिकंजा कसने के लिए तैयार किया गया है। इसके जरिए रूस द्वारा ऊर्जा आपूर्ति के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले गुप्त तेल टैंकरों, बैंकों और अधिकारियों पर कड़े प्रतिबंध लगाए जाएंगे।
यह कानून अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को उन शीर्ष पांच देशों पर 100 प्रतिशत तक का भारी टैरिफ लगाने का अधिकार देता है जो रूस से तेल या प्राकृतिक गैस खरीदते हैं, जिनमें भारत और चीन भी शामिल हैं। हालांकि, जो देश रूस से 15 प्रतिशत से कम गैस आयात करते हैं और इसे लगातार घटाने के प्रयास कर रहे हैं, उन्हें इस टैरिफ से राहत दी जाएगी। हाल ही में अमेरिकी संसद के निचले सदन ने इसे 262-159 वोटों से पारित कर दिया है और अब यह अंतिम मंजूरी और कानून बनने के लिए राष्ट्रपति ट्रंप के पास जाएगा।
