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अमेरिका में 50 देशों के लिए वीजा बॉन्ड लागू, भारत को छूट

Published: Sat, 03 Oct 2026 08:17 PM (IST)Updated: Sat, 03 Oct 2026 08:18 PM (IST)

अमेरिका ने 50 देशों के नागरिकों के लिए बिजनेस और टूरिस्ट वीजा (बी1/बी2) हेतु 20 हजार डॉलर तक का वीजा ...और पढ़ें

अमेरिका में 50 देशों के लिए वीजा बॉन्ड लागू।

अमेरिका में 50 देशों के लिए वीजा बॉन्ड लागू।

HighLights

  1. अमेरिका ने 50 देशों के लिए 20 हजार डॉलर तक का वीजा बॉन्ड लागू किया।

  2. भारत को इस नए वीजा बॉन्ड नियम से पूरी तरह छूट मिली है।

  3. बांग्लादेश, भूटान, नेपाल जैसे दक्षिण एशियाई देश सूची में शामिल हैं।

डिजिटल डेस्क, वाशिंगटन। अमेरिका की ओर से एक बड़ा और महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय अपडेट सामने आया है, जो भारतीय नागरिकों के लिए एक बड़ी राहत लेकर आया है।

अमेरिकी विदेश विभाग द्वारा जारी की गई 50 देशों की उस सूची में भारत का नाम शामिल नहीं किया गया है, जिसके नागरिकों को अब बिजनेस और टूरिस्ट वीजा (बी1/बी2) के लिए 20 हजार डॉलर तक का भारी वीजा बॉन्ड (जमानत राशि) चुकाना होगा।

अमेरिका ने उन 50 देशों की सूची जारी की है जिनके नागरिकों को बिजनेस और टूरिस्ट वीजा के लिए 20 हजार डॉलर तक का वीजा बॉन्ड जमा करना होगा। भारत को इससे छूट दी गई है, लेकिन बांग्लादेश, भूटान और नेपाल जैसे दक्षिण एशियाई देशों को इस सूची में शामिल किया गया है।

अमेरिकी विदेश विभाग ने शुक्रवार को उन देशों की अद्यतन सूची प्रकाशित की जिनके नागरिकों को बी1/बी2 वीजा के लिए पात्र पाए जाने पर बॉन्ड जमा करना आवश्यक है।

अमेरिकी विदेश विभाग के मुताबिक, इस सख्त कार्यक्रम का उद्देश्य उन देशों के नागरिकों पर लगाम कसना है, जिनके यहां से अमेरिका जाने वाले लोग तय समय से अधिक समय तक (ओवरस्टे) वहां रुक जाते हैं। यह फैसला डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी की ओवरस्टे रिपोर्ट के आधार पर लिया गया है।

इस व्यवस्था के तहत, सूचीबद्ध देशों के यात्रियों को कांसुलर ऑफिसर के निर्देशानुसार 10 हजार, 15 हजार या 20 हजार डॉलर (लगभग 8 से 16 लाख रुपये) तक की राशि बॉन्ड के रूप में जमा करनी होगी।

इसके अलावा, इन यात्रियों को अमेरिका में प्रवेश और वापसी के लिए केवल कमर्शियल विमानों और अधिकृत हवाई अड्डों का ही उपयोग करना होगा, वे चार्टर उड़ानों या समुद्री बंदरगाहों का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे।

हालांकि, शर्तों का पालन करने पर यह राशि वापस मिल जाती है, लेकिन इसके बावजूद यह प्रक्रिया आम यात्रियों के लिए आर्थिक रूप से काफी चुनौतीपूर्ण है।

(समाचार एजेंसी आईएएनएस के इनपुट के साथ)