इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट पर कड़े प्रतिबंध लगाने की तैयारी में ट्रंप प्रशासन, ग्लोबल बैंकिंग से अलग-थलग करने का प्लान
ट्रंप प्रशासन इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट (ICC) के खिलाफ कड़े प्रतिबंध लगाने की तैयारी में है, जिससे अदालत का वित्तीय लेन-देन ...और पढ़ें

ICC के खिलाफ अमेरिकी शिकंजा

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डिजिटल डेस्क, वाशिंगटन। अमेरिका का ट्रंप प्रशासन इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट (ICC) के खिलाफ अब तक के सबसे कड़े प्रतिबंध लगाने की तैयारी में है।
वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी अधिकारियों और आधिकारिक दस्तावेजों से संकेत मिला है कि इन नए प्रतिबंधों के लागू होने से हेग स्थित इस अंतरराष्ट्रीय अदालत का लगभग पूरा वित्तीय लेन-देन ठप हो सकता है और यह ग्लोबल बैंकिंग सिस्टम के बड़े हिस्से से पूरी तरह अलग-थलग पड़ जाएगी।
अमेरिकी डॉलर में लेनदेन पर लगेगा रोक
रिपोर्ट के अनुसार, प्रस्तावित प्रतिबंधों को छह से सात महीने की अवधि के साथ लागू किया जाएगा। इसके तहत ICC को अमेरिकी डॉलर में किसी भी प्रकार का लेन-देन करने से प्रतिबंधित कर दिया जाएगा। हालांकि, बुनियादी संचार सेवाओं से जुड़े वित्तीय लेन-देन को इसमें राहत दी जाएगी।
वाशिंगटन में अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता ने विदेश मंत्री मार्को रुबियो के रुख को दोहराते हुए कहा कि ICC की गतिविधियां अमेरिका की राष्ट्रीय संप्रभुता के लिए सीधा खतरा हैं।
प्रशासन इस सप्ताह न्यूयॉर्क में जारी संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठकों के दौरान या उसके तुरंत बाद इन प्रतिबंधों को अंतिम रूप दे सकता है।
इजरायल पर वारंट के बाद बढ़ा टकराव
अमेरिका और ICC के बीच यह टकराव तब चरम पर पहुंचा, जब अदालत ने 2024 में गाजा युद्ध के दौरान कथित युद्ध अपराधों को लेकर इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और पूर्व रक्षा मंत्री योव गैलेंट के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किए थे।
अमेरिका और इजरायल दोनों ही ICC के सदस्य देश नहीं हैं। मार्को रुबियो का तर्क है कि ICC उन गैर-सदस्य देशों के अधिकारियों पर कार्यवाही करके अपने तय अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन कर रहा है। रुबियो ने यह चेतावनी भी दी है कि प्रशासन जरूरत पड़ने पर इस संस्था को ईंट-दर-ईंट खत्म कर देगा।
यह नए उपाय अमेरिका के उन मौजूदा प्रतिबंधों से कहीं अधिक सख्त होंगे, जो अब तक केवल ICC अध्यक्ष टोमोको अकाने, पूर्व मुख्य अभियोजक करीम खान और अन्य जजों जैसे व्यक्तियों तक सीमित थे।
दूसरी ओर, जापान और यूरोपीय देशों सहित ICC के प्रमुख सहयोगियों ने अमेरिकी दबाव के खिलाफ अदालत का बचाव करने की बात कही है, लेकिन प्रतिबंधों के बाद कोर्ट के कामकाज को कैसे सुचारू रखा जाएगा, इसे लेकर स्थिति फिलहाल स्पष्ट नहीं है।
