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ट्रंप प्रशासन को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, वोटर वेरिफिकेशन सिस्टम हुआ बहाल; गैर-नागरिकों के वोट डालने पर लगेगी रोक

Published: Fri, 25 Sep 2026 11:36 PM (IST)

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन के वोटर वेरिफिकेशन सिस्टम को फिर से इस्तेमाल करने की अनुमति दे दी है। ...और पढ़ें

ट्रंप के वोटर वेरिफिकेशन सिस्टम को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने दी हरी झंडी

ट्रंप के वोटर वेरिफिकेशन सिस्टम को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने दी हरी झंडी

HighLights

  1. सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के वोटर वेरिफिकेशन सिस्टम को बहाल किया।

  2. यह प्रणाली मतदाता रिकॉर्ड में नागरिकता की जांच में सहायक होगी।

  3. आलोचकों ने योग्य मतदाताओं के वंचित होने की आशंका जताई है।

डिजिटल डेस्क, न्यूयॉर्क। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप प्रशासन के वोटर वेरिफिकेशन सिस्टम को फिर से इस्तेमाल करने की शुक्रवार को अनुमति दे दी। यह सिस्टम राज्यों को मतदाता रिकार्ड में दर्ज लोगों की नागरिकता की जांच करने में मदद करता है।

इस आदेश के बाद राज्यों को आगामी मध्यावधि चुनावों से पहले मतदाता सूचियों की जांच के लिए केंद्रीय डेटाबेस का उपयोग करने की अनुमति मिल गई है। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि इसका मकसद गैर-नागरिकों को वोट देने से रोकना है, लेकिन आलोचकों का तर्क है कि इससे योग्य मतदाता वोट देने के अधिकार से वंचित हो सकते हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से न्याय विभाग की उस अपील को मंज़ूरी दे दी जिसमें एक फेडरल जज के आदेश पर रोक लगाने की मांग की गई थी। फेडरल जज ने अधिकारियों को पंजीकृत वोटरों की नागरिकता की बड़े पैमाने पर जांच करने से रोक दिया था।

यह मामला 'सिस्टमैटिक एलियन वेरिफिकेशन फार एंटाइटेलमेंट्स' (सेव) डाटा से जुड़ा है। ट्रंप प्रशासन ने इस सिस्टम का विस्तार कर इसमें सोशल सिक्योरिटी नंबर और अन्य सरकारी रिकार्ड के जरिए बड़ी संख्या में मतदाताओं की जानकारी जांचने की व्यवस्था की थी। इस सिस्टम का मकसद यह पता लगाना है कि मतदाता सूची में शामिल व्यक्ति अमेरिकी नागरिक है या नहीं।

आलोचकों का कहना है कि ऐसे कदमों के पीछे चुनाव की सुरक्षा की चिंता कम है, बल्कि मकसद वोटरों की संख्या कम करके राजनीतिक फायदा उठाना है। इससे योग्य और अक्सर डेमोक्रेटिक पार्टी की तरफ़ झुकाव रखने वाले वोटरों के वोट देने के अधिकार के छिनने का ख़तरा है।

वाशिंगटन डीसी में अमेरिकी डिस्ट्रिक्ट जज स्पार्कल सूकनानन ने इस सिस्टम पर रोक लगाते हुए कहा था कि यह सिस्टम बिना किसी योजना के बनाया गया था और इसमें नागरिकता से जुड़ा ऐसा डाटा था जिस पर भरोसा नहीं किया जा सकता।

चार सितंबर को डिस्ट्रिक्ट आफ कोलंबिया सर्किट के यूएस कोर्ट आफ अपील्स ने 2-1 के फ़ैसले में सूकनानान के फ़ैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया, जिसके बाद प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई। सुप्रीम कोर्ट में दायर दस्तावेज में, न्याय विभाग के वकीलों ने जज के आदेश को "अन्यायपूर्ण" बताया और तर्क दिया कि इससे मध्यावधि चुनावों की निष्पक्षता पर खतरा पैदा होगा।

(न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के इनपुट के साथ)