वाशिंगटन, प्रेट्र। अमेरिका में कॉल सेंटर संचालित करने वाली पांच कंपनियों और तीन लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया है। इन लोगों पर विदेश में स्थित कॉल सेंटर से फर्जी रोबोकॉल कर अमेरिकी नागरिकों से करोड़ों डॉलर ऐंठने का आरोप है। खास बात यह है कि ज्यादातर रोबोकॉल भारत से की गई थीं।

फर्जी रोबोकॉल का है आरोप

न्याय विभाग द्वारा दर्ज किए गए मामले में आरोप लगाया गया है कि इन कंपनियों को कई बार चेतावनी दी गई कि वे फर्जी रोबोकॉल नहीं करें। इसके बावजूद उन्होंने ऐसा करना जारी रखा और विदेश में चल रही फर्जी योजनाओं में अमेरिकी नागरिकों को फंसाते रहे। ज्यादातर कॉल भारत से की जाती थीं और इससे बुजुर्गों और कमजोर वर्ग के लोगों को बड़े पैमाने पर आर्थिक नुकसान हुआ।

न्याय विभाग के अनुसार, रोबोकॉल के माध्यम से लोगों को कई तरह की सरकारी कार्रवाई की धमकी दी जाती थी। इसमें सामाजिक सुरक्षा लाभ समाप्त करना, कथित कर धोखाधड़ी पर गिरफ्तारी, आव्रजन फार्म को सही तरीके से भरने में विफल रहने पर देश वापस भेजने जैसी धमकी शामिल हैं। इन रोबोकॉल का मुख्य मकसद अमेरिकियों को डरा-धमका कर बड़ी रकम हासिल करना था।

जानिए कैसे होता है फर्जीवाड़ा

टेक्नोलॉजी ने ग्रुप ईमेल से बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंचना आसान बना दिया है। धोखाधड़ी करने वाले टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल न केवल पहचान को छिपाने और जाली ईमेल और वेबसाइट तैयार करने, बल्कि दुनिया भर में बड़ी संख्या में लोगों तक बहुत कम कीमत पर पहुंचने के लिए भी करते हैं। हालांकि, धोखेबाजों की सफलता में केवल टेक्नोलॉजी का ही योगदान नहीं है। इसके लिए धोखेबाज हमारी भावनात्मक कमजोरियों और व्यवहार के दायरों का इस्तेमाल भी करते हैं।

धोखेबाज भावनाओं के प्रभाव में गलत फैसले करने की हमारी आदत का फायदा उठाते हैं। उदाहरण के लिए, सरकार, टैक्स विभाग, बैंकर या पुलिस जैसी किसी 'अथॉरिटी' से आने वाली ईमेल से डर पैदा होता है। आपके बैंक एकाउंट का एक्सेस बंद किया जा रहा है या डेबिट कॉर्ड को ब्लॉक किया गया है, इस तरह की चेतावनियों पर आपका ध्यान तुरंत जाता है और आप डर के कारण कोई कदम उठाते हैं। अथॉरिटी का नाम, पद और हस्ताक्षर ऐसे जाल होते हैं, जिनसे आप ईमेल खोलने और उसमें दिए गए लिंक को क्लिक करने के लिए खिंचे जाते हैं। इसके बाद से आपके साथ धोखाधड़ी की शुरुआत हो जाती है। 

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