सिर्फ 48 घंटे में झोंक दिए 5.6 अरब डॉलर के हथियार... ईरान युद्ध में सब कुछ दांव पर क्यों लगा रहे हैं ट्रंप?
एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान के शुरुआती 48 घंटों में लगभग 5.6 अरब डॉलर ...और पढ़ें

5.6 अरब डॉलर के हथियार और गोला-बारूद खर्च

समय कम है?
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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान के शुरुआती चरण में अमेरिका ने भारी मात्रा में हथियारों का इस्तेमाल किया। एक रिपोर्ट के अनुसार, हमले के पहले 48 घंटों में ही अमेरिकी सेना ने लगभग 5.6 अरब डॉलर के हथियार और गोला-बारूद खर्च कर दिए। इससे अमेरिका के सबसे उन्नत और सीमित संख्या में उपलब्ध हथियारों के भंडार के तेजी से घटने को लेकर अधिकारियों में चिंता बढ़ गई है।
वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक यह अनुमान सोमवार को अमेरिकी कांग्रेस के समक्ष रखा गया। इसके बाद डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के उस दावे पर बहस तेज हो गई है जिसमें कहा गया था कि ईरान के खिलाफ चल रहा अभियान अमेरिकी सेना की युद्ध-तैयारी या हथियार भंडार को जल्दी प्रभावित नहीं करेगा।
रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई में अत्याधुनिक मिसाइलों, लंबी दूरी के सटीक मारक हथियारों और अन्य उच्च तकनीकी आयुधों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया। इन हथियारों की उपलब्धता सीमित होती है और इन्हें तैयार करने में भी लंबा समय लगता है।
पूरक रक्षा बजट की तैयारी
ईरान के खिलाफ जारी सैन्य अभियान को लंबे समय तक जारी रखने के लिए व्हाइट हाउस इस सप्ताह पूरक रक्षा बजट का प्रस्ताव रखने की तैयारी में है। यह अतिरिक्त बजट कई अरब डॉलर का हो सकता है और अनुमान है कि इसकी राशि दसियों अरब डॉलर तक पहुंच सकती है।
हालांकि, पेंटागन ने राष्ट्रीय हथियार भंडार को लेकर किसी भी प्रकार की कमी की आशंका को खारिज किया है। पेंटागन के मुख्य प्रवक्ता सीन पार्नेल ने कहा कि रक्षा विभाग के पास इतनी क्षमता है कि वह राष्ट्रपति द्वारा तय किए गए किसी भी स्थान और समय पर मिशन को पूरा कर सकता है।
उन्होंने कहा कि अमेरिकी सेना के पास अभियान को जारी रखने के लिए आवश्यक संसाधन और हथियार उपलब्ध हैं और आवश्यकता पड़ने पर उत्पादन तथा आपूर्ति की प्रक्रिया को भी तेज किया जा सकता है।
आगे लेजर-गाइडेड बमों के इस्तेमाल की तैयारी
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यदि संघर्ष आगे बढ़कर ईरान के भीतर जमीनी इलाकों तक पहुंचता है तो अमेरिका और इजरायल अपनी रणनीति में बदलाव कर सकते हैं। ऐसे में वे अपेक्षाकृत अधिक मात्रा में उपलब्ध लेजर-गाइडेड बमों का इस्तेमाल बढ़ा सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार ये बम सटीक लक्ष्यभेदी होते हैं और पारंपरिक बमों की तुलना में अधिक प्रभावी माने जाते हैं। बड़ी संख्या में उपलब्ध होने के कारण इन्हें लंबे सैन्य अभियानों में इस्तेमाल करना अपेक्षाकृत आसान होता है।
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