'ऑपरेशन इपिक फ्यूरी' ने ट्रंप ने कितने रुपये फूंके, पढ़ें मिडिल ईस्ट में अब तक हुए युद्ध में US ने कितना किया खर्च
अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष में 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' के तहत अमेरिका ने ईरान पर हवाई हमले ...और पढ़ें
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच हमलों और मिसाइल अटैक का दौर जारी है। शनिवार को अमेरिका और इजराइल ने मिलकर ईरान पर हवाई हमले किए, जिससे दोनों देशों का लंबा टकराव अब सीधी सैन्य लड़ाई में बदल गया।
राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि यह ऑपरेशन चार से पांच हफ्तों तक चल सकता है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या अमेरिका मध्य पूर्व में एक नई जंग को झेल पाएगा? यानी क्या ट्रंप इसकी जंग की कीमत अदा कर पाएंगे? और अगर अमेरिका इस जंग में पूरी ताकत झोंकता है तो इसका कितना खर्च आएगा?
अमेरिकी सेना ने बताया कि शनिवार से अब तक ईरान में 1,250 से ज्यादा ठिकानों पर हमले किए गए हैं। सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने अलग से कहा कि 11 ईरानी जहाजों को तबाह कर दिया गया। इन हमलों में हवाई हमले, समुद्र से दागी गई क्रूज मिसाइलें और ईरान के परमाणु सुविधाओं पर हमले शामिल हैं। ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई, जब उनके तेहरान कंपाउंड पर पहले दौर के हमलों में भारी नुकसान हुआ।

पश्चिमी एशिया में जंग की क्या कीमत चुका रहा अमेरिका?
ट्रंप ने सोमवार को कहा कि जंग जितनी जरूरी हो, उतनी चलेगी, जो कई हफ्तों तक खिंच सकती है। ईरानी रेड क्रिसेंट के मुताबिक, सोमवार तक ईरान के 130 इलाकों में 555 लोग मारे जा चुके हैं। 2023 से अब तक अमेरिका ने इजरायल और मध्य पूर्व में 21.7 अरब डॉलर की सैन्य मदद दी है।
ब्राउन यूनिवर्सिटी की 2025 की 'कॉस्ट्स ऑफ वॉर' रिपोर्ट के अनुसार, 7 अक्टूबर 2023 से अमेरिका ने इजरायल को 21.7 अरब डॉलर की सैन्य मदद दी है। इसके अलावा, यमन, ईरान और पूरे मध्य पूर्व में अमेरिकी ऑपरेशन पर 9.65 से 12.07 अरब डॉलर खर्च हुए हैं। कुल मिलाकर, संघर्ष से जुड़ा अमेरिकी खर्च 31.35 से 33.77 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है और यह बढ़ता जा रहा है।
ईरान जंग में CENTCOM के मुताबिक, 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' में हवा, समुद्र, जमीन और मिसाइल डिफेंस से जुड़े 20 से ज्यादा हथियार सिस्टम इस्तेमाल हो रहे हैं। अब तक ईरान में 1,000 से ज्यादा ठिकानों पर हमले किए गए।

ईरान से सीधी जंग में अमेरिकी हवाई ताकत पर खास जोर है। इसमें बी-1 बॉम्बर्स, बी-2 स्टेल्थ बॉम्बर्स (परमाणु और सैन्य सुविधाओं पर हमले के लिए), एफ-35 लाइटनिंग II और एफ-22 रैप्टर जैसे स्टेल्थ फाइटर्स शामिल हैं। एफ-15 फाइटर जेट्स का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हो रहा है, जिनमें से तीन 1 मार्च को कुवैत के ऊपर एक हादसे में खो गए।
एफ-16 फाइटिंग फाल्कन, एफ/ए-18 सुपर हॉर्नेट और ए-10 अटैकर जेट्स हमलों और सपोर्ट में लगे हैं। ईए-18जी ग्राउलर दुश्मन की एयर डिफेंस को दबाने के लिए इस्तेमाल हो रहा है, जबकि AWACS विमान कमांड और बैटल मैनेजमेंट का काम संभाल रहे हैं।

ड्रोन्स और मिसाइल सिस्टम का भरसक इस्तेमाल कर रहा अमेरिका
ड्रोन्स और लंबी दूरी के हमलों में LUCAS ड्रोन्स का पहली बार कॉम्बैट इस्तेमाल हो रहा है। ये सस्ते, एकतरफा अटैक ड्रोन्स हैं, जो ईरानी डिजाइनों से रिवर्स इंजीनियर किए गए। MQ-9 रीपर ड्रोन्स निगरानी और सटीक हमलों में सक्रिय हैं। जमीन से एम-142 HIMARS रॉकेट आर्टिलरी सिस्टम काम कर रहा है। टॉमहॉक क्रूज मिसाइलें नौसेना से दागी जा रही हैं।
मिसाइल डिफेंस में पैट्रियट इंटरसेप्टर और THAAD सिस्टम ईरानी बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन्स को रोक रहे हैं। काउंटर-ड्रोन सिस्टम भी लगे हैं। नौसेना की ताकत में USS गेराल्ड आर फोर्ड और USS अब्राहम लिंकन जैसे दो कैरियर स्ट्राइक ग्रुप्स शामिल हैं, जो समुद्र से बड़ी ताकत दे रहे हैं। पी-8 पोसाइडन समुद्री गश्त कर रहा है। लॉजिस्टिक्स के लिए सी-17 ग्लोबमास्टर, सी-130 हरक्यूलिस और एरियल रिफ्यूलिंग टैंकर काम कर रहे हैं।
Operation Epic Fury: The first 48 hours pic.twitter.com/uCQqHq5Ajx
— U.S. Central Command (@CENTCOM) March 2, 2026
ऑपरेशन एपिक फ्यूरी का कुल खर्च कितना?
इन सबके बीच एक सवाल फिर से आता है कि आखिरी इसमें अमेरिका को कितना खर्च करना पड़ रहा है। हालांकि ईरान की जंग का कुल खर्च सटीक अनुमान लगाना मुश्किल है। अनाडोलू न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट्स के मुताबिक, 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' के पहले 24 घंटों में अमेरिका ने करीब 779 मिलियन डॉलर खर्च किए।

हमलों से पहले की तैयारी, जैसे विमानों की पोजिशनिंग, दर्जनभर नौसेना जहाजों की तैनाती और क्षेत्रीय संसाधनों की मोबिलाइजेशन पर 630 मिलियन डॉलर लगे। सेंटर फॉर न्यू अमेरिकन सिक्योरिटी के अनुसार, USS गेराल्ड आर फोर्ड जैसे कैरियर स्ट्राइक ग्रुप को चलाने में रोजाना 6.5 मिलियन डॉलर खर्च होते हैं।
