विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

अंतरिक्ष में स्टार वॉर... महाशक्तियों की जंग में भारत का 'मिशन शक्ति' कैसे बनेगा गेमचेंजर?

Published: Wed, 16 Sep 2026 06:41 PM (IST)

अमेरिका द्वारा अंतरिक्ष में हथियार तैनात करने की स्वीकारोक्ति और रूस-चीन की गतिविधियों ने वैश्विक 'स्टार वॉर्स' की होड़ बढ़ा ...और पढ़ें

अमेरिका ने अंतरिक्ष में स्पेस कंट्रोल हथियार तैनात करने की बात मानी (फोटो- AI जेनरेटेड)

अमेरिका ने अंतरिक्ष में स्पेस कंट्रोल हथियार तैनात करने की बात मानी (फोटो- AI जेनरेटेड)

HighLights

  1. अमेरिका ने अंतरिक्ष में स्पेस कंट्रोल हथियार तैनात करने की बात मानी।

  2. भारत ने 2019 में 'मिशन शक्ति' से ASAT क्षमता का प्रदर्शन किया।

  3. युद्ध की स्थिति में भारत पूरी तरह तैयार है।

डिजिटल डेस्क, वाशिंगटन। अंतरिक्ष अब आधुनिक युद्ध का नया और खतरनाक मोर्चा बन कर सामने आ रहा है। हाल ही में पहली बार अमेरिका ने इस बात को स्वीकार किया कि उसने पृथ्वी की कक्षा में स्पेस कंट्रोल हथियार तैनात कर रखे हैं जो अभी पृथ्वी की कक्षा में घूम रहे हैं।

हालांकि सैन्य उपकरण लंबे समय से वायुमंडल के बाहर तैनात किए जाते रहे हैं, लेकिन ये पहली बार है जब किसी हथियार को कक्षा में रखने की बात मानी गई है। इसके साथ ही रूस और चीन जैसे देश भी इसी तरह की तकनीकों पर तेजी से काम कर रहे हैं, जिसने वैश्विक स्तर पर "स्टार वॉर्स" यानी अंतरिक्ष में हथियारों की एक नई होड़ को जन्म दे दिया है। लेकिन इन सबके बीच सवाल ये है कि इन उभरते स्टॉर वॉर्स में भारत कहाँ खड़ा है और क्या उसके पास दुश्मन के सैटेलाइट को गिराने की क्षमता है?

अंतरिक्ष में ही लड़ाई की तैयारी

कोल्ड वॉर के दौर से ही अंतरिक्ष का इस्तेमाल सैन्य निगरानी, नेविगेशन और संचार के लिए किया जा रहा है। आज अमेरिका के GPS और भारत के NavIC जैसे सिस्टम सैन्य अभियानों की रीढ़ हैं। हालांकि, अब स्थिति बदल गई है। और देश ऐसे यान और सैटेलाइट विकसित कर रहे हैं जो सीधे दुश्मनों के अंतरिक्ष यानों पर हमला कर सकें और उन्हें निष्क्रिय कर सकें।

चीन और रूस के पास है तकनीक

2022 में चीन ने शिजियान-21 सैटेलाइट के जरिए एक बेकार सैटेलाइन को रोबोटिक आर्म से पकड़कर उसकी कक्षा बदल दी थी। वहीं 2024 में एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, 'अमेरिका की तत्कालीन बाइडेन प्रशासन ने दावा किया था कि रूस एक अंतरिक्ष- आधारिक परमाणु हथियार विकसित कर रहा है, जो लंबे समय तक अंतरिक्ष में रह सकता है और अपने आस-पास के सैटेलाइट को नष्ट करने में सफल हो सकता है।

अमेरिका की घोषणा का चीन, रूस ने किया विरोध

न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, 'अमेरिका की इस घोषणा के बाद रूस और चीन ने अंतरिक्ष के हथियारीकरण का विरोध किया है और जल्द इसे रोकने की मांग की है। हालांकि अमेरिका की घोषणा ने तीनों देशों के बीच तनाव को और ज्यादा बढ़ा दिया है।

क्या भारत के पास है अंतरिक्ष आधारित हथियार?

जानकारी के मुताबिक भारत अभी अंतरिक्ष आधारिक हथियार विकसित या तैनात नहीं कर रहा है लेकिन फिर भी अपनी सुरक्षा के लिए भारत के पास दुश्मन के सैटेलाइट को मार गिराने की पूरी क्षमता मौजूद है। भारत ने 2019 में मिशन शक्ति के जरिए ये क्षमता दिखाई थी और ऑर्बिट में सैटेलाइट को सफलतापूर्वक नष्ट कर दिया था।

मिशन शक्ति के तहत, DRDO ने ओडिशा के APJ अब्दुल कलाम द्वीप से 'पृथ्वी डिफेंस व्हीकल मार्क-II' इंटरसेप्टर मिसाइल के ज़रिए लो-अर्थ ऑर्बिट में मौजूद अपने ही 'माइक्रोसैट-R' सैटेलाइट को बिना किसी विस्फोटक के, केवल सीधी टक्कर (हिट-टू-किल) से सफलतापूर्वक नष्ट कर दिया था। इस सफलता के साथ ही भारत अमेरिका, रूस और चीन के बाद ASAT क्षमता हासिल करने वाला चौथा देश बन गया था।


क्या होती है ASAT क्षमता?

अंतरिक्ष में सैटेलाइट्स को नष्ट करने वाली तकनीक को एंटी-सैटेलाइट हथियार यानी ASAT कहा जाता है। इसका सबसे सीधा तरीका मिसाइल हमला है, जिसे 'काइनेटिक डायरेक्ट-एसेंट ASAT' कहा जाता है। इसमें जमीन, हवा या समुद्र से लॉन्च की गई मिसाइल बेहद तेज रफ़्तार से सीधे सैटेलाइट से टकराकर उसे नष्ट कर देती है।


युद्ध की स्थिति में भारत है तैयार

मिशन शक्ति के बाद हालांकि भारत ने ऐसे और कोई परीक्षण नहीं किए हैं, क्योंकि भारत को अंतरिक्ष में मलबे के फैलने जैसी चिंताएं थीं। लेकिन मिशन शक्ति ने दुनिया को ये स्पष्ट संदेश जरूर दे दिया था कि अगर भविष्य में अंतरिक्ष में कोई युद्ध छिड़ता है, तो भारत के पास दुश्मनों के सैटेलाइटों को हवा में ही ढेर करने की न केवल क्षमता है बल्कि पर्याप्त तकनीक भी मौजूद है।

यह भी पढ़ें- सैन्य ताकत का महा-प्रदर्शन:भारत-अमेरिका का संयुक्त 'युद्ध अभ्यास' शुरू, पाकिस्तान में मची हलचल