वाशिंगटन, पीटीआइ। अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोंपियो ने कोरोना महामारी के लिए चीन को दोषी ठहराते हुए एक बार फिर हमला किया है। उन्होंने बुधवार को आरोप लगया कि चीन ने कोविड-19 के जीवित नमूनों को साझा करने के बजाय नष्ट कर दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया सहित दुनिया के 120 से अधिक देशों के साथ खड़ा है जो चाहते हैं कि कोरोना वायरस की उत्पत्ति की जांच।

उन्होंने कहा कि आस्ट्रेलिया द्वारा जांच करने की मांग पर चीन ने उसके यहां से आने वाले गोमांस के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया है। साथ ही ऑस्ट्रेलियाई जौ पर 80 फीसद टैक्स थोप दिया है। पोंपियो ने कहा कि आस्ट्रेलिया द्वारा जांच की मांग पर चीन उससे आर्थिक प्रतिशोध ले रहा है। यह सही नहीं है। हम आस्ट्रेलिया और 120 से अधिक देशों के साथ खड़े हैं, जिन्होंने वायरस की उत्पत्ति की जांच के लिए अमेरिकी मांग का समर्थन किया है। हम समझ सकते हैं कि क्या गलत हुआ। हम अभी और भविष्य में जिंदगियां बचा सकते हैं।

उन्होंने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि वुहान में कोविड-19 के प्रकोप पर चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की प्रतिक्रिया ने कम्युनिस्ट चीन के प्रति हमारी धारणा को बदल दिया है। पार्टी ने कोरोना के नमूनों को हमसे साझा करके मदद लेने के बजाय उन्हें नष्ट कर दिया। हालांकि चीन ने कोविड-19 के प्रकोप के संबंध में अमेरिका द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को खारिज कर दिया है।

इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि इस साल की शुरुआत में चीन के साथ अमेरिका ने जिस व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। उस समझौते को लेकर उनका विचार बदल गया है। अपनी नाराजगी एक बार फिर जाहिर करते हुए अमेरिकी राष्‍ट्रपति ने चीन पर कोरोना को फैलने देने का आरोप लगाया। ट्रंप ने कहा कि जब यह समझौता हुआ था तो वह बहुत उत्साहित थे लेकिन फिर वायरस आ गया। चीन ने ऐसा कैसे होने दिया?

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