शिक्षा के नाम पर टॉर्चर? अमेरिकी स्कूल में दिल की धड़कन नापकर हो रहे एडमिशन, पास-फेल का फंडा भी अजीब
अमेरिकी स्कूलों में भविष्य की शिक्षा के नाम पर एक चौंकाने वाला मॉडल सामने आया है, जहां बच्चों को हार्ट ...और पढ़ें

अमेरिकी स्कूल में दिल की धड़कन नापकर हो रहे एडमिशन। (यह तस्वीर एआई द्वारा बनाई गई है)
HighLights
अमेरिकी स्कूलों में एडमिशन के लिए बच्चों को हार्ट मॉनिटर से जोड़ा जाता है।
माता-पिता की आलोचनात्मक वीडियो दिखाकर बच्चों की सहनशीलता परखी जाती है।
यह अमानवीय AI मॉडल बच्चों की मानसिक सेहत पर बुरा असर डाल रहा है।
डिजिटल डेस्क, न्यूयॉर्क। अमेरिकी स्कूलों में भविष्य की शिक्षा के नाम पर चौंकाने वाला सच सामने आया है। यहां एडमिशन के लिए बच्चों को हार्ट मॉनिटर से जोड़कर पूरी क्लास के सामने उनके पैरेंट्स की आलोचनात्मक वीडियो दिखाये जाते हैं, जहां दिल की धड़कन बढ़ने पर वे फेल हो जाते हैं।
सहनशीलता सिखाने का यह अमानवीय एआई मॉडल बच्चों की मानसिक सेहत को कैसे प्रभावित कर रहा है। आइए जानते हैं।
सिलिकॉन वैली का अल्फा स्कूल, कमरे में ऐसा सन्नाटा था कि सिर्फ दीवार पर लगे विशाल मॉनीटर की बीप-बीर सुनाई दे रही थी। यह अस्पताल का आईसीयू नहीं, बल्कि भविष्य की शिक्षा का दावा करने वाला अत्याधुनिक एआई स्कूल है। कमरे में 14 साल के रेयान कुर्सी पर अकेला बैठा था, उसके सीने पर एक हर्ट मॉनीटर लगा था। उसके दिल की धड़कन पूरी क्लास के सामने बड़े पर्दे पर दिख रही थी।
उसकी धड़कन सामान्य थी, नियम था कि धड़कन 10 प्रतिशत से ऊपर नहीं जानी चाहिए। अगर गई तो वह फेल। तभी उसके माता-पिता का वाडियो चलाया गया। उस वीडियो में वे रेयान की कमियों, उसकी गलतियों और उसकी नाकामी की कड़ी आलोचना कर रहे थे।
पूरी क्लास यह वीडियो देख रही थी। रेयान के लिए यह बहुत मुश्किल था। उसकी धड़कन बढ़ने लगी, पहले 82, फिर 85 और अंत में 87, उसने अपनी मुठ्ठियां भींच लीं और आंखें बंद कर लीं।
वीडियो खत्म होने पर उसकी औसत धड़कन 87 थी, वह एक धड़कन से पास हो गया, लेकिन एक हफ्ते तक उसके हाथ कांपते रहे। यह सिर्फ एक टेस्ट नहीं है। इस स्कूल में बच्चों से बॉट्स की मदद से कुछ ही दिन में पूरा कोर्स खत्म करवाया जाता है। उनसे गंदे टॉयलेट साफ कराए जाते हैं और सोशल मीडिया पर खुद को बेचना सिखाया जाता है।
इन तरीकों को सहनशीलता और हिम्मत सिखाना कहा जा रहा है, लेकिन असल में यह बच्चों की भावनाओं के कुचलने जैसा है। मशीन ने दिल की रफ्तार तो नाप ली, पर बच्चे के अंदर का डर और घुटन नहीं नाप सकी।
