ट्रंप का दोहरा रवैया... खुद रूस से खरीदेंगे यूरेनियम, लेकिन भारत को नहीं खरीदने देंगे तेल
अमेरिका रूस से तेल खरीदने पर भारत पर 100% टैरिफ की धमकी दे रहा है, पर खुद परमाणु ऊर्जा के ...और पढ़ें

रूस को लेकर ट्रंप का दोहरा रवैया।
HighLights
अमेरिका रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर टैरिफ लगाने की तैयारी।
भारत के रूसी तेल आयात पर 100% तक शुल्क का संभावित खतरा।
अमेरिका खुद रूस से परमाणु ऊर्जा हेतु यूरेनियम आयात कर रहा।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते पर बातचीत चल रही है। इसी बीच रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने की अमेरिकी पहल ने नई दिल्ली के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है।
खास बात यह है कि अमेरिका खुद रूस से परमाणु ऊर्जा उद्योग के लिए जरूरी संवर्धित यूरेनियम खरीदता है। इससे अमेरिकी नीति की प्राथमिकताओं और उसके संभावित दोहरे मानदंडों पर सवाल उठ रहे हैं।
नए अमेरिकी प्रतिबंध कानून
अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों से पारित लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट, 2026 में रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले बड़े देशों पर कार्रवाई का प्रविधान है। इसके तहत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत और चीन के सामान पर 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त टैरिफ लगा सकते हैं। इसका उद्देश्य रूस की तेल आय से होने वाली कमाई को कम करना और यूक्रेन युद्ध पर आर्थिक दबाव बढ़ाना है।
हालांकि, इसी कानून में रूस से अमेरिका आने वाले कम-संवर्धित यूरेनियम को प्रतिबंधों से अलग रखा गया है। यह सामग्री अमेरिकी परमाणु ऊर्जा उद्योग के लिए महत्वपूर्ण है। आलोचकों के अनुसार, इससे अमेरिकी नीति में असमानता दिखाई देती है, दूसरों को रूसी ऊर्जा खरीदने से रोकना, लेकिन अपनी जरूरत के लिए आयात जारी रखना।
रूस से यूरेनियम खरीदता है अमेरिका
अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय व्यापार आयोग के आंकड़ों के अनुसार, रूस से अमेरिका का संवर्धित यूरेनियम आयात 2022 में 82.98 करोड़ डालर से बढ़कर 2025 में 102.68 करोड़ डालर हो गया। इस अवधि में रूस अमेरिकी संवर्धित यूरेनियम आयात का करीब 23.42 प्रतिशत हिस्सा था। ब्रिटेन की आपूर्ति इससे अधिक रही, जबकि फ्रांस और नीदरलैंड भी प्रमुख आपूर्तिकर्ता रहे।
भारत पर दबाव बढ़ाने की राजनीति
भारत के कुल कच्चे तेल आयात में रूसी तेल की हिस्सेदारी करीब आधी है। केप्लर के जहाज-निगरानी आंकड़ों के अनुसार, अगस्त में भारत ने प्रतिदिन लगभग 21 लाख बैरल रूसी तेल खरीदा, जो उसके कुल तेल आयात का करीब 45 प्रतिशत था। इससे पहले के दो महीनों में यह हिस्सा 50 प्रतिशत से अधिक था।
अमेरिका ने पिछले साल अगस्त में रूस से तेल खरीदने के कारण भारत पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाया था, जिसे इस साल फरवरी में हटा दिया गया। इसके बावजूद अब प्रस्तावित नए प्रतिबंध भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता पर दबाव बढ़ा सकते हैं। चीन रूस से भारत से अधिक तेल खरीदता है, लेकिन उसके खिलाफ कार्रवाई के संभावित आर्थिक और राजनयिक असर को देखते हुए अमेरिकी रुख अलग रहा है—ऐसा विशेषज्ञों का आकलन है।
भारत के सामने चुनौती
भारत ने व्यापार वार्ता के दौरान अमेरिकी ऊर्जा आयात बढ़ाने, परमाणु क्षेत्र खोलने और डिजिटल क्षेत्र से जुड़े कुछ कदमों सहित कई मांगों पर सहमति के संकेत दिए हैं। इसके बावजूद रूसी तेल पर दबाव बना हुआ है।
विशेषज्ञों का आकलन है कि अमेरिका भारत पर अपना तेल खरीदने का दबाव बढ़ाने के लिए ये तरीका अपना रहा है। हालांकि, भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा है कि भारत अलग-अलग स्रोतों और बदलते बाजार हालात के आधार पर अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
अचानक तेल खरीद घटाने का असर
पश्चिम एशिया संकट के बीच ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित है। ऐसे में रूस से तेल खरीद अचानक घटाना भारत के लिए महंगा पड़ सकता है। दूसरी ओर, वैश्विक बाजार से रूसी तेल की बड़ी मात्रा हटाने से तेल की कीमतों और आपूर्ति पर असर पड़ सकता है। यही कारण है कि अमेरिकी प्रतिबंध कानून भारत के साथ-साथ वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए भी संकट खड़ा कर सकता है।
