वाशिंगटन, प्रेट्र। अमेरिका ने इजरायल के प्रति अपनी नीतियों में बड़ा बदलाव किया है। ट्रंप प्रशासन ने पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के समय की नीति को पलटते हुए इजरायल के वेस्ट बैंक और पूर्वी यरुशलम में बनाई गई बस्तियों को मान्यता दे दी है। विदेश मंत्री माइक पोंपियो ने कहा कि अमेरिका अब वेस्ट बैंक में इजरायली बस्तियों को अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन के तौर पर नहीं देखता है। उन्होंने कहा कि वेस्ट बैंक हमेशा से इजरायल और फलस्तीन के बीच विवाद का कारण रहा है। इन बस्तियों को बार-बार अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन कहा गया, लेकिन इसका कोई फायदा नहीं हुआ है। यही वजह रही कि इस दौरान शांति की भी किसी तरह की कोशिशें नहीं हुई।

पोंपियो बोले - इजरायल का यह कदम अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन नहीं

पोंपियो ने कहा कि यह कटु सत्य है कि दोनों देशों के बीच विवाद का कोई न्यायिक हल नहीं निकल सकता है। साथ ही अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत कौन गलत है और कौन सही, इसका भी फैसला नहीं किया जा सकता है। यह एक जटिल राजनीतिक समस्या है, जिसे केवल इजरायल और फलस्तीन के बीच वार्ता के जरिये ही सुलझाया जा सकता है। दोनों देशों के बीच शांति बनाए रखने की अमेरिकी प्रतिबद्धता को दोहराते हुए पोंपियो ने कहा कि वह इसके लिए सब कुछ करेगा।

बता दें कि इससे पहले ट्रंप प्रशासन ने 2017 में यरुशलम को इजरायल की राजधानी के तौर पर मान्यता देने के साथ ही मार्च 2018 में अपना दूतावास यरुशलम में स्थानांतरित कर दिया था। मार्च 2019 में उसने विवादास्पद गोलन हाइट्स को इजरायल के अधिकृत क्षेत्र के तौर पर मान्यता दे दी थी। फलस्तीन के मुताबिक वेस्ट बैंक में बनी 135 बस्तियों और 100 अवैध चौकियों में लगभग चार लाख लोग रहते हैं जबकि यहां पर फलस्तीनी लोगों की संख्या लगभग 26 लाख है।

बस्तियों को लेकर अमेरिकी सरकारों में रहा है मतभेद

पोंपियो के मुताबिक वेस्ट बैंक में बस्तियों के कानूनी स्वरूप को लेकर अमेरिका कभी भी एकमत नहीं रहा है। 1978 में जिमी कार्टर प्रशासन ने जहां अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत इन बस्तियों को अवैध ठहराया था, वहीं 1981 में राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन ने इस निष्कर्ष पर असहमति जताई थी। दिसंबर 2016 में राष्ट्रपति बराक ओबामा ने बस्तियों को फिर से अवैध ठहरा दिया। पोंपियों ने कहा कि सभी कानूनी पहलुओं का अध्ययन करने के बाद ट्रंप प्रशासन पूर्व राष्ट्रपति रीगन के दृष्टिकोण से सहमत है।

नेतन्याहू ने ट्रंप प्रशासन का आभार जताया

वेस्ट बैंक में बनी बस्तियों को मान्यता देने के लिए इजरायल ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का आभार जताया है। प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा जारी बयान के मुताबिक इजरायल स्थायी शांति के लिए फलस्तीन के साथ वार्ता को तैयार है। वहीं टाइम्स ऑफ इजरायल के मुताबिक प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है कि यह नीति एक ऐतिहासिक सच्चाई को बयां करती है कि यहूदी लोग इस इलाके में विदेशी नहीं हैं।

फलस्तीन ने कहा, अमेरिका ने खोई विश्वसनीयता

अमेरिका के इस निर्णय से फलस्तीन के लोग नाराज हैं। फलस्तीन के राष्ट्रपति महमूद अब्बास के प्रवक्ता नबील अबू रेंधे ने पोंपियो की घोषणा की निंदा करते हुए कहा कि यह बस्तियां अंतरराष्ट्रीय कानून के मुताबिक अवैध हैं। उन्होंने कहा कि इस निर्णय के बाद अमेरिकी प्रशासन ने भविष्य में होने वाली शांति प्रक्रिया में किसी तरह की भूमिका निभाने में अपनी विश्वसनीयता खो दी है। वहीं फलस्तीन की तरफ से मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे साएब एरेकत ने कहा, अमेरिका का फैसला वैश्विक स्थिरता, सुरक्षा और शांति के लिए खतरा है। इस तरह का फैसला अंतरराष्ट्रीय कानून को जंगल के कानून से बदलने जैसा है।'

 

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