वाशिंगटन, प्रेट्र। अमेरिका ने साफ कर दिया है कि चीन के साथ चल रहे सीमा विवाद में भारत को जरूरत पड़ी तो वह उसे मजबूत और प्रत्यक्ष समर्थन देगा। भारतीय सीमा पर यह स्थिति इसलिए बनी है क्योंकि कोरोना वायरस के प्रकोप के बीच भी चीन पूरे हिंद-प्रशांत महासागर क्षेत्र में अपना आक्रामक व्यवहार नहीं छोड़ रहा। वह अपनी विस्तारवादी नीति पर आगे बढ़ रहा है। यह बात अमेरिका के राष्ट्रपति कार्यालय व्हाइट हाउस की वरिष्ठ अधिकारी ने कही है।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उप सहायक लीजा कर्टिस ने कहा, चीन की वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर ताजा हरकत ने अमेरिका और भारत की रणनीतिक साझेदारी के महत्व को और बढ़ा दिया है। वियतनाम को समुद्र में मछली पकड़ने के अधिकार से वंचित करना, हांगकांग के स्वशासन के फॉर्मूले को कमजोर करना, जापान के नजदीक समुद्र में युद्धपोत की तैनाती और भारतीय सीमा में घुसपैठ ऐसी हरकतें हैं, जो चीन ने हाल के दिनों में की हैं।

चीन ने यह सब तब किया जब सभी देश उसकी पैदा की हुई कोविड महामारी से जूझ रहे हैं। चीन ने मानवता पर छाए संकट के दौर का गलत फायदा उठाने की कोशिश की। इस मुश्किल दौर में अमेरिका को भारत के साथ अपने संबंध और मजबूत करने का मौका मिला है। वह चीनी घुसपैठ के खिलाफ भारत के साथ है। लीजा ने यह बात थिंक टैंक कार्नेगी एंडोवमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस द्वारा आयोजित वर्चुअल पैनल डिस्कसन में कही। इस दौरान भारतीय मूल की शोधकर्ता दर्शना बरुआ का हिंद-प्रशांत महासागर क्षेत्र में भारत की बढ़ती भूमिका पर शोध पत्र का भी विमोचन हुआ।

व्हाइट हाउस की नेशनल सिक्युरिटी काउंसिल में दक्षिण एवं मध्य एशिया मामलों की सीनियर डायरेक्टर लीजा ने कहा, संकट के समय अमेरिका पूरी तरह से भारत के साथ है। वह भारत को मजबूत और प्रत्यक्ष समर्थन दे रहा है। चीन के आक्रामक रवैये के खिलाफ भारत को खड़ा होने में अमेरिका पूरा साथ दे रहा है। अमेरिका चाहता है कि समस्या का बातचीत के जरिये शांतिपूर्वक निदान हो जाए। लेकिन भारत के समक्ष सैन्य और आर्थिक विकल्प भी खुले हुए हैं। अमेरिका दुनिया के हर क्षेत्र में बेरोक-टोक आवागमन और विधि सम्मत शासन व्यवस्था का पक्षधर है।

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