वाशिंगटन, एपी। राष्ट्रपति चुनाव से एक सप्ताह पहले अमेरिका के रक्षा और विदेश मंत्रियों के भारत आकर अपने समकक्ष मंत्रियों से टू-प्लस-टू बातचीत के दूरगामी परिणाम होंगे। इस वार्ता से अमेरिका चीन को कड़ा संदेश देना चाहता है। माना जा रहा है कि ये बातचीत अमेरिका की सामरिक नीति को आगे बढ़ाने के साथ ही अमेरिकी मतदाताओं पर भी अच्छा प्रभाव डालेगी।

वार्ता में प्रमुख रूप से चीन के आक्रामक रुख पर ही बात होगी। इसके साथ व्यापार, ताइवान, तिब्बत, हांगकांग और मानवाधिकार पर भी बात हो सकती है।

अमेरिकी मीडिया के अनुसार भारत-अमेरिका की इस बातचीत के राजनीतिक संदर्भ भी तलाशे जा रहे हैं। चीन के मामले में प्रतिद्वंदी जो बिडेन की कमजोर स्थिति के कारण इस यात्रा से भारतीय मतदाताओं पर ट्रंप का अच्छा प्रभाव पड़ने की संभावना है।

वहीं, दूसरी ओर अमेरिका में भारतीय-अमेरिकी एक राजनीतिक शक्ति बन कर उभरे हैं। राष्ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप के चुनाव अभियान कार्यालय से जुड़े बयान में कहा गया है कि भारतीय-अमेरिकी राजनीतिक रूप से शक्तिशाली हुए हैं। बयान में आगे कहा गया है कि आपको अपनी शक्ति का भले ही एहसास न हो, लेकिन राष्‍ट्रपति ट्रंप आपकी शक्ति को बेहतर समझते हैं।

ट्रंप विक्ट्री इंडियन अमेरिकन फाइनेंस कमेटी के सह-अध्यक्ष अल मेसन ने एक कार्यक्रम में कहा कि भारतीय अमेरिकी एक शक्ति के रूप में उभरे हैं। उन्‍होंने कहा अमेररिकी राष्‍ट्रपति चुनाव के इतिहास में पहली बार भारतीय अमेरिकी डेमोक्रेटिक समर्थकों ने रिपब्लिकन की ओर रुख किया है। उन्‍होंने कहा कि भारतीयों में यह बदलाव ट्रंप की जीत का बड़ा कारक हो सकता है। भारतीय अमेरिकी इस चुनाव में एक महत्‍वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। मेसन ने कहा कि हालिया सर्वे में यह बात सामने आई है कि भारतीय अमेरिकी बड़े पैमाने पर राष्‍ट्रपति ट्रंप का समर्थन कर रहे हैं। उन्‍होंने कहा कि राष्‍ट्रपति चुनाव के इतिहास में पहली बार 50 फीसद से अधिक भारतीय अमेरिकी डेमोक्रेट्स का साथ छोड़ चुके हैं। अब वह रिपब्लिकन पार्टी के पक्ष में हैं।

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