वाशिंगटन, पीटीआइ। कोरोना संक्रमण से बेहाल अमेरिका का चीन के प्रति रवैया पूरी तरह बदल चुका है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जोर देकर कहा कि चीन सरकार को वुहान में ही इस महामारी को रोक देना चाहिए था। कोरोना की रोकथाम को लेकर शुरू से ही चीन पर हमलावर रहे ट्रंप व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बात कर रहे थे। उन्होंने कहा, 'यह वायरस दुनियाभर में नहीं फैलना चाहिए था। वे इसे रोक सकते थे, लेकिन उन्होंने इसे फैलने दिया। इसी कारण चीन के प्रति अमेरिका को अपनी सोच बदलनी पड़ी। चीन पर अब भरोसा नहीं किया जा सकता'

पिछले महीने भी ट्रंप ने कहा था कि चीन ने वायरस की बात छिपाई, दुनिया को धोखे में रखा और अपनी करतूत को ढंकने की कोशिश की। उसकी इसी नीति के चलते वायरस पूरी दुनिया में फैलता चला गया। चीन को इसकी पूरी जिम्मेदारी लेनी होगी। चीन इन आरोपों को नकार चुका है। उधर अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोंपियो ने हांगकांग में चुनाव टालने के चीन सरकार की निंदा करते हुए कहा है कि इसकी एक मात्र वजह यह थी कि चुनाव होते तो कम्युनिस्ट पार्टी के प्रत्याशी बुरी तरह हार जाते।

ऑस्‍ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्‍कॉट मॉरिसन ने बुधवार को चीन पर करारा हमला बोला। उन्‍होंने कहा कि भारत-प्रशांत क्षेत्र में समान विचारधारा वाले देशों को एकजुट होना चाहिए। यह क्षेत्रीय स्थिरता एंव शांति के लिए बेहद जरूरी है। खुद के खिलाफ दुनिया में बढ़ती लामबंदी को देख चीन की बेचैनी भी बढ़ गई है। चीनी राजदूत कुई तियानकोई ने कहा है कि अमेरिका के लिए वाणिज्‍य दूतावास बंद करना दुर्भाग्‍यपूर्ण था। उन्‍होंने कहा, 'मुझे नहीं लगता कि एक नया शीत युद्ध किसी के हित में होगा।

उल्‍लेखनीय है कि वैश्विक स्तर पर कोरोना संक्रमितों का आंकड़ा 1.84 करोड़ को पार कर गया है जबकि लगभग सात लाख लोगों की जान जा चुकी है। महामारी लैटिन अमेरिका के देशों में तेज गति से पांव पसार रही है। अब तक 50 लाख से ज्यादा लोग संक्रमित पाए जा चुके हैं। मरने वालों की संख्या भी दो लाख के पार पहुंच गई है। लैटिन अमेरिका में ब्राजील महामारी से सबसे ज्यादा प्रभावित है। इस देश में ही अकेले 28 लाख से ज्यादा कोरोना के मामले हैं। जबकि 95 हजार से अधिक पीड़ितों की जान गई है।

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