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क्या है Mother of All Bombs? ईरान के तेल और न्यूक्लियर सेंटर्स को तबाह करने की फिराक में है US, तैयार किया प्लान

Published: Thu, 15 Oct 2026 02:03 PM (IST)

अमेरिका ईरान पर नए सिरे से हमले की योजना बना रहा है, जिसमें बिजली उत्पादन और परमाणु ठिकानों को निशाना ...और पढ़ें

मदर ऑफ बॉम्ब्स की तस्वीर (फाइल)

मदर ऑफ बॉम्ब्स की तस्वीर (फाइल)

HighLights

  1. अमेरिका ईरान पर नए सिरे से हमले की योजना में।

  2. हमले में 'मदर ऑफ ऑल बॉम्ब्स' (MOAB) का उपयोग संभव।

  3. ईरान के बिजली, परमाणु ठिकानों को निशाना बनाया जाएगा।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिका एक बार फिर ईरान पर नए सिरे से हमले की योजना बना रहा है। इस बार के हमलों में ईरान के कुछ अहम जगहों जैसे बिजली उत्पादन केंद्र और परमाणु ठिकानों को निशाना बनाया जा सकता है।

इस बार की योजना में अमेरिका ईरान पर GB-43/B 'मैसिव ऑर्डनेंस एयर ब्लास्ट' से हमला कर सकता है। इस बम की सबसे ज्यादा चर्चा की वजह इसकी ताकत है। इसे आमतौर पर 'बमों की जननी' या 'मदर ऑफ ऑल बॉम्ब्स' (MOAB) भी कहते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स में ये भी दावा किया जा रहा है कि अगर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप एक बार दुबारा सेना के अभियान को हरी झंडी दिखाते हैं, तो इस शक्तिशाली बम का इस्तेमाल किया जा सकता है। इस बार का हमला ज्यादा तगड़ा और अहम ठिकानों पर होगा।

पर्दे के पीछे चल रही तैयारी

रिपोर्ट में कहा गया है कि हमले की योजना बन रही है लेकिन सरकार ने अभी इसे मंजूरी नहीं दी है। वहीं प्रशासन ने भी इस योजना पर कुछ बोलने से चुप्पी साध ली है। व्हाइट हाउस के एक अधिकारी के हवाले से ये बताया गया है कि राष्ट्रपति ट्रंप अपने लिए सारे रास्ते खुले रखते हैं। कई सारी चीजें पर्दे के पीछे चलती रहती है। सभी का एक ही लक्ष्य है ईरान किसी भी हाल में परमाणु हथियार हासिल ना कर सके।

गैर परमाणु बम


आइए जानते हैं ईरान पर जिस बम से हमले की तैयारी चल रही है वो बम कितना शक्तिशाली है और वो किस तरह से तबाही मचा सकता है। सबसे पहले तो आपको ये बता दें कि (MOAB) एक गैर परमाणु बम है। इस बम से परमाणु हमला नहीं किया जा सकता है। इससे ये साफ है कि परमाणु बम की तुलना में ये कम तबाही मचाएगा।

कितना ताकतवर है ये बम

इससे मचने वाली तबाही की बात की जाए तो अमेरिका के सैनिकों के जखीरे में ये इतना ताकतवर बम है कि GBU-43/B से एक बार हमला करने पर किसी भी इलाके के बड़े हिस्से को आसानी से तबाह किया जा सकता है। जमीन पर मौजूद किसी भी बड़े से बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर को ये आसानी से नेस्तनाबूत कर देगा। इसका वजह लगभग 9.8 टन है। बंकर को उड़ाने वाले बमों की तुलना में ये बम सतह के ऊपर ज्यादा नुकसान पहुंचाएगा।

पहली बार कब हुआ था इस्तेमाल

इस बम को ईराक युद्ध के दौरान विकसित किया गया था। इससे दुश्मन पर जोरदार और असरदार हमला कर उसे आत्मसमर्पण करने के लिए मजबूर किया जा सकता है। इसका पहली बार 2017 में इस्तेमाल हुआ था। उस वक्त अमेरिकी सैनिकों ने इसे अफगानिस्तान पर गिराया था। इस हमले में करीब 36 लड़ाके मारे गए थे।

बता दें कि ट्रंप सरकार अमेरिका -ईरान युद्ध का ऐसा अंत चाहते हैं जिससे आने वाले चुनाव में जनता को अपने पक्ष में कर सके और अपनी जीत के दावे कर सके। हालांकि अभी तक के युद्ध का बहुत ज्यादा असर किसी एक पक्ष में जाता हुआ नहीं दिख रहा है।