वाश‍िंगटन, एपी। चीन से बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने आखिरकार न्यूक्लियर बमवर्षक बी-21 रेडर विमान को लान्च किया है। करीब कई वर्षों से अमेरिका गोपनीय तरीके से इस विमान को विकसित करने में लगा था। यह विमान राफेल से भी तेज बताया जा रहा है। राफेल पांचवें जेनरेशन का लड़ाकू विमान है, जबकि बी-21 रेडर छठे जेनरेशन का है। कैलिफोर्निया के पाल्मडेल में सैन्य अड्डे पर शुक्रवार को लान्चिंग से पहले इसकी खासियतों के बारे में बताया गया।

बी-2 स्पिरिट का स्थान लेगा बमवर्षक विमान

काले रंग का यह न्यूक्लियर स्टील्थ बमवर्षक विमान बी-2 स्पिरिट का स्थान लेगा। इसका निर्माण पेंटागन की न्यूक्लियर आधुनिकीकरण का हिस्सा है। इसमें साइलो लांच बैलिस्टिक मिसाइल और सबमरीन वारहेड भी शामिल हैं।

1500 न्यूक्लियर हथियार बना रहा चीन

बता दें कि पेंटागन ने इस सप्ताह अपनी चीन संबंधी वार्षिक रिपोर्ट में कहा था कि चीन 2035 तक 1500 न्यूक्लियर हथियार बनाने की तैयारी कर रहा है। अमेरिकी एयरफोर्स के सेक्रेटरी डेबोरे ली जेम्स ने कहा कि हमें 21वीं सदी के ऐसे बमबर्षकों की जरूरत है, जो हमें आने वाली कड़ी चुनौतियों से बचाने में सक्षम हों।

बमवर्षक विमानों की कीमत

बमवर्षक विमानों की कीमत अज्ञात है। वायु सेना ने पहले 2010 में 550 मिलियन डॉलर, आज लगभग 753 मिलियन डालर, की औसत लागत पर 100 विमानों की खरीद के लिए मूल्य निर्धारित किया था। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि वायु सेना वास्तव में कितना खर्च कर रही है।

कहां होगी बॉम्बर की तैनाती

प्रोजेक्ट ऑन गवर्नमेंट ओवरसाइट के एक वरिष्ठ रक्षा नीति फेलो डैन ग्राजियर ने कहा, 'इस तरह के एक प्रमुख कार्यक्रम का सामान्य विश्लेषण करना हमारे लिए एक बड़ी चुनौती हो सकती है।' दक्षिण डकोटा में एल्सवर्थ एयर फोर्स बेस में बॉम्बर का पहला प्रशिक्षण कार्यक्रम और स्क्वाड्रन होगा। हालांकि, बॉम्बर्स के टेक्सास और मिसौरी में स्थित ठिकानों पर तैनात होने की भी उम्मीद लगाई जा रही है।

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Edited By: Achyut Kumar

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