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Mission Iran: ट्रंप ने एक पायलट को बचाने में खर्च किए कितने अरब रुपए, अपने ही फाइटर जेट को क्यों उड़ाया? Inside Story

Published: Mon, 06 Apr 2026 04:23 PM (IST)Updated: Mon, 06 Apr 2026 04:38 PM (IST)

अमेरिकी सेना ने ईरान में मार गिराए गए F-15E जेट के पायलट और एयरमैन को सफलतापूर्वक बचाया। इस चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन ...और पढ़ें

HighLights

  1. अमेरिकी सेना ने ईरान से पायलट और एयरमैन को बचाया।

  2. बचाव अभियान पर 500 मिलियन डॉलर का भारी खर्च आया।

  3. तकनीक बचाने हेतु अमेरिकी सेना ने अपने विमान नष्ट किए।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिका सेना ने अपने साथी पायलट और एयरमैन को ईरानी इलाके से बचाकर बाहर निकाल लिया है। अमेरिकी सेना का ये ऑपरेशन उनकी बहादुरी के साथ ही एक बड़े बजट के लिए भी जाना जा रहा है।

अमेरिका ने पायलट और एयरमैन को बचाने के लिए इस ऑपरेशन पर 500 मिलियन डॉलर खर्च कर दिए, जो कि भारतीय करेंसी में 46 अरब रुपए से भी ज्यादा है।

अमेरिका का F-15E स्ट्राइक ईगल जेट ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने मार गिराया था, जो कि ईरान के इस्फहान प्रांत के दक्षिण में चला गया। लेकिन अमेरिकी सेना ने अपने पायलट और एयरमैन को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

ऑपरेशन में खर्च हुए 500 मिलियन डॉलर

अमेरिकी अधिकारियों ने इस बचाव अभियान को सबसे चुनौतीपूर्ण अभियानों में से एक बताया है। इस ऑपरेशन में कई तरह के आधुनिक सैन्य हथियारों का इस्तेमाल किया गया, जिनमें A-10 थंडरबोल्ट II जेट, MC-130J कमांडो II विमान, ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर और MQ-9 रीपर ड्रोन शामिल थे। इनमें से कई हथियार इस मिशन के दौरान नष्ट हो गए।

शुक्रवार 3 अप्रैल को ईरान ने दावा किया कि उसकी रक्षा सेनाओं ने अमेरिका के एक F-15E स्ट्राइक ईगल को मार गिराया है। यह एक ऐसा जेट है जो हर मौसम में उड़ सकता है और इसे हवा से जमीन और हवा से हवा में मार करने वाले मिशनों के लिए डिजाइन किया गया है।

अमेरिका के इस F-15E स्ट्राइक ईगल की कीमत करीब 100 मिलियन डॉलर है। ईरान ने जब इस जेट को मार गिराया गया, तब इसमें दो क्रू सदस्य सवार थे, एक पायलट और पीछे की सीट पर बैठा एक वेपन-सिस्टम ऑफिसर, जिसका काम लक्ष्यों को चुनना और यह पक्का करना था कि हथियार लक्ष्यों के हिसाब से ठीक से सेट किए गए हैं या नहीं।

अमेरिकी सेना ने बचाव अभियान में पायलट को तो जल्द ही बचा लिया गया, लेकिन दूसरे एयरमैन को जिसे ट्रंप ने बेहद सम्मानित कर्नल बताया था, पहाड़ी इलाके में पकड़े जाने से बचने के लिए 24 घंटे से भी ज्यादा समय लगा।

कई हथियारों के साथ चला बचाव अभियान

अमेरिकी सेना ने अंधेरे की आड़ में जमीन पर काम करने वाली एक विशेष टीम को उस जगह पर उतारा गया। खबरों के मुताबिक, अमेरिकी सेना ने बमों और कवर फायर का इस्तेमाल करके ईरानी सैनिकों को उस जगह से दूर रखा, जहां घायल एयरमैन के छिपे होने की संभावना थी।

इस ऑपरेशन से जुड़े एक व्यक्ति ने 'एयर एंड स्पेस फोर्सेज मैगजीन' को बताया कि बचाव दल के सदस्य की सुरक्षा के लिए MQ-9 रीपर ड्रोनों का भी इस्तेमाल किया गया। इन ड्रोनों ने उन ईरानी लोगों पर हमला किया, जिन्हें खतरा माना जा रहा था।

सेना जब एयरमैन को लेकर वहां से निकल रही थी तो उनके कम से कम दो लॉकहीड मार्टिन C-130 विमान, MC-130J कमांडो II वैरिएंट वाले, जिनकी हर एक की कीमत 100 मिलियन डॉलर से ज्यादा थी, जो कि तकनीकी खराबी के कारण बेकार हो गए।

अमेरिकी सेना ने खुद बम से उड़ा दिए अपने विमान

अमेरिकी सेना ने इस मिशन के दौरान दो C-130 कार्गो विमानों को नष्ट कर दिया, जिससे ईरानी सेना के पास इन विमानों की टेक्नोलॉजी न पहुंच पाए।

सबूत यह भी बताते हैं कि कम से कम दो MH-6 लिटिल बर्ड हेलीकॉप्टर, जिनकी कीमत हर एक की लगभग $7.5 मिलियन थी, एक फॉरवर्ड बेस पर नष्ट कर दिए गए।

ईरानी सेना ने दावा किया कि उन्होंने कुछ MQ-9 रीपर ड्रोन भी मार गिराए, जिनकी हर एक की कीमत 30 मिलियन डॉलर से 60 मिलियन डॉलर के बीच थी। अमेरिका ने इस दावे की पुष्टि नहीं की है।

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