वाशिंगटन, पीटीआइ। अमेरिका अब भारत में हथियारों की बिक्री बढ़ाने की योजना बना रहा है। इन हथियारों में सशस्त्र ड्रोन भी शामिल हैं, जो एक हजार पाउंड से अधिक भार वाले बम और मिसाइल ले जा सकते हैं। भारत और चीन के सैनिकों के बीच पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद यह कदम काफी मायने रखता है। यह रुख इसलिए भी अहमियत रखता है क्‍योंकि चीन अभी भी अपनी विस्‍तारवादी नीति पर अड़ा हुआ है।

'फॉरेन पॉलिसी' पत्रिका ने अमेरिकी अधिकारियों और संसद के सहयोगियों के साक्षात्कारों के आधार पर एक रिपोर्ट में कहा, 'अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन भारत और चीन के बीच सीमा पर हिंसक झड़प के मद्देनजर भारत में हथियारों की बिक्री बढ़ाने की योजना बना रहा है, जिससे अमेरिका और चीन के बीच तनाव का एक और मुद्दा खड़ा हो जाएगा।'

पत्रिका ने अधिकारियों के हवाले से कहा कि अमेरिका ने हाल के महीनों में भारत को नए हथियारों की बिक्री की योजना तैयार की है। इसमें सशस्त्र ड्रोन जैसी उच्च स्तर की हथियार प्रणाली और उच्च स्तर की प्रौद्योगिकी शामिल हैं। ट्रंप ने आधिकारिक रूप से उन नियमों में संशोधन किया है, जो भारत जैसे विदेशी भागीदारों के लिए सैन्य-स्तर ड्रोन की बिक्री को प्रतिबंधित करते थे।

रिपोर्ट में कहा गया है कि इससे अमेरिका को सशस्त्र ड्रोन की बिक्री पर विचार करने की अनुमति मिलेगी, जो पहले उनकी गति और पेलोड के कारण प्रतिबंधित था। मामले से अवगत एक सांसद ने कहा कि भारत को सशस्त्र (श्रेणी-1) प्रीडेटर्स मुहैया कराने वाले हैं। उन्होंने बताया कि एमक्यू-1 प्रीडेटर ड्रोन एक हजार पाउंड से अधिक भार वाले बम और मिसाइल ले जा सकता है।

उल्‍लेखनीय है कि बीते 15 जून को गलवन घाटी में चीनी सैनिकों के साथ झड़प में भारतीय सेना के 20 जवान वीरगति को प्राप्‍त हो गए थे। चीनी सैनिक भी हताहत हुए थे लेकिन उसने आज तक इस बारे में आधिकारिक तौर पर इसकी कोई जानकारी नहीं दी है। हालांकि अमेरिकी खुफिया एजेंसी की एक रिपोर्ट के अनुसार चीन के 35 सैनिक हताहत हुए थे।

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