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महाविनाश की ओर बढ़ रही दुनिया... ईरान में जमीनी युद्ध शुरू करने की तैयारी में ट्रंप, क्या हैं इसके नुकसान?

Published: Mon, 30 Mar 2026 10:00 PM (IST)

पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच जमीनी युद्ध की आशंका बढ़ गई है। अमेरिका ने 57,000 से अधिक ...और पढ़ें

57,000 से अधिक अमेरिकी सैनिक या तो क्षेत्र में मौजूद हैं या तैनाती के लिए भेजे जा रहे हैं

57,000 से अधिक अमेरिकी सैनिक या तो क्षेत्र में मौजूद हैं या तैनाती के लिए भेजे जा रहे हैं

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जागरण न्यूज नेटवर्क, नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में हालात तेजी से युद्ध की ओर बढ़ते दिख रहे हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका ने अभूतपूर्व सैन्य जमावड़ा शुरू कर दिया है। अनुमान है कि 57,000 से अधिक अमेरिकी सैनिक या तो क्षेत्र में मौजूद हैं या तैनाती के लिए भेजे जा रहे हैं।

पहले से मौजूद लगभग 40,000 सैनिकों के साथ अब 82वीं एयरबोर्न डिवीजन और मरीन अभियान इकाइयों को जोड़ा जा रहा है, जो किसी भी समय जमीनी युद्ध शुरू करने में सक्षम हैं। समुद्र में भी ताकत का प्रदर्शन साफ दिखाई दे रहा है। यूएसएस अब्राहम लिंकन के साथ अब यूएसएस जॉर्ज एचडब्ल्यू बुश की तैनाती की खबरें हैं।

इसके अलावा बॉक्सर और ट्राइपोलि जैसे एम्फीबियस रेडी ग्रुप, जिनमें एफ-35बी स्टेल्थ फाइटर और ओस्प्रे हेलीकॉप्टर मौजूद हैं, यह संकेत देते हैं कि अमेरिका सिर्फ दबाव नहीं बना रहा, बल्कि जमीन पर उतरने की पूरी तैयारी कर चुका है। इस सबका कारण है ईरान द्वारा अमेरिका के कथित समर्पण वाले प्रस्ताव को ठुकराना और लगभग 400 किलोग्राम समृद्ध यूरेनियम को न सौंपना। अब हालात उस मोड़ पर हैं जहां बातचीत विफल हुई, तो अगला कदम सीधा जमीनी युद्ध होगा।

कई मोर्चों पर भड़केगी जंग

अगर अमेरिका ईरान में जमीनी युद्ध शुरू करता है, तो यह केवल दो देशों के बीच सीमित संघर्ष नहीं रहेगा, बल्कि पूरा पश्चिम एशिया कई मोर्चों पर जल उठेगा। ईरान के सहयोगी हाउती, हिज्बुल्लाह और हमास पहले से ही सक्रिय हैं और अलग-अलग दिशाओं से हमले कर सकते हैं।

इसके साथ ही इराक और बहरीन में मौजूद शिया मिलिशिया भी इस संघर्ष को और फैलाएंगे। विशेषज्ञ मानते हैं कि भले ही इजरायल के हमलों से हिज्बुल्लाह कुछ कमजोर हुआ हो, लेकिन वह अभी भी दुनिया के सबसे शक्तिशाली गैर-राज्य सैन्य संगठनों में से एक है और जमीनी युद्ध में बड़ा खतरा बना रहेगा। ऐसे में अमेरिका को एक साथ कई मोर्चों पर लड़ना पड़ेगा, जिससे युद्ध लंबा, जटिल और अत्यधिक रक्तरंजित हो सकता है।

ड्रोन और साइबर हमला, नई रणनीति से बढ़ेगा खतरा

इस संघर्ष में ईरान की सबसे बड़ी ताकत उसकी पारंपरिक सेना नहीं, बल्कि उसकी असिमेट्रिक वॉरफेयर रणनीति है। फरवरी में शुरू हुई झड़पों में ईरान ने हजारों शाहेद ड्रोन का इस्तेमाल कर अमेरिका और उसके सहयोगियों को चौंका दिया था। ये ड्रोन सस्ते हैं, लेकिन इन्हें रोकने के लिए अमेरिका को महंगे मिसाइल खर्च करने पड़ते हैं, जिससे युद्ध आर्थिक रूप से भी भारी पड़ रहा है।

जमीनी युद्ध की स्थिति में यही ड्रोन सीधे अमेरिकी सैनिकों को निशाना बनाएंगे, जिससे मानव हानि कई गुना बढ़ सकती है। इसके अलावा ईरान की साइबर क्षमताएं बिजली नेटवर्क, संचार तंत्र और रक्षा प्रणालियों पर हमले इस युद्ध को पारंपरिक सीमाओं से आगे ले जाकर पूरी तरह आधुनिक और खतरनाक बना देंगी।

तेल संकट का विस्फोट, दुनिया की अर्थव्यवस्था पर सीधा प्रहार

पश्चिम एशिया वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का केंद्र है और इस पूरे संकट की धुरी बना हुआ है होमुर्ज स्ट्रेट। इस संकरे जलमार्ग से रोजाना दो से 2.5 करोड़ बैरल तेल गुजरता था, जो दुनिया की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा है। लेकिन मौजूदा हालात में ईरान ने इस मार्ग पर दबाव बनाकर जहाजों की आवाजाही लगभग रोक दी है। यदि अमेरिका जमीनी युद्ध शुरू करता है, तो ईरान इसे और आक्रामक रूप से बाधित करेगा।

तेल टैंकरों, पाइपलाइनों और रिफाइनरियों पर हमले तेज होंगे। विशेषज्ञों के अनुसार, इस स्थिति में कच्चे तेल की कीमतें 150 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जा सकती हैं। इसका सबसे ज्यादा असर चीन जैसे आयातक देशों पर पड़ेगा, जहां महंगाई, ईंधन संकट और आर्थिक दबाव तेजी से बढ़ेगा। युद्ध खत्म होने के बाद भी तेल ढांचे की मरम्मत और आपूर्ति बहाली में वर्षों लग सकते हैं।

खाड़ी देशों की भूमिका, तटस्थता से युद्ध में खिंचाव तक

अब तक सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर और कुवैत जैसे देशों ने खुद को इस संघर्ष से दूर बताया है। उन्होंने दावा किया है कि उनकी जमीन का इस्तेमाल ईरान पर हमलों के लिए नहीं किया गया। लेकिन वास्तविकता यह है कि इन देशों में अमेरिकी सैन्य अड्डे मौजूद हैं और ईरान पहले ही इन क्षेत्रों में ऊर्जा ढांचे और सैन्य ठिकानों को निशाना बना चुका है।

जमीनी युद्ध शुरू होते ही यह तटस्थता टूट सकती है और ये देश सीधे या परोक्ष रूप से युद्ध में शामिल हो सकते हैं, जिससे पश्चिम एशिया पूरी तरह युद्धक्षेत्र में बदल जाएगा।

मौत, विस्थापन और विनाश की भयावह तस्वीर

इस संघर्ष में अब तक चार हजार से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें ईरान, लेबनान, इजरायल और खाड़ी देशों के लोग शामिल हैं। लेकिन जमीनी युद्ध की स्थिति में यह आंकड़ा कई गुना बढ़ सकता है। इतिहास गवाह है इराक युद्ध के दौरान लगभग 4,400 अमेरिकी सैनिक मारे गए थे, जबकि नागरिक मौतों का आंकड़ा लाखों में पहुंच गया था।

वर्तमान परिदृश्य उससे भी अधिक जटिल और व्यापक है, इसलिए आशंका है कि यह युद्ध लाखों मौतों और करोड़ों विस्थापित लोगों का कारण बन सकता है। शरणार्थियों की लहरें सीमाओं को पार करेंगी, जिससे वैश्विक मानवीय संकट खड़ा होगा, जिसका असर यूरोप, एशिया और बाकी दुनिया तक पहुंचेगा।

अमेरिका और ईरान के बीच संभावित जमीनी युद्ध केवल क्षेत्रीय संघर्ष नहीं रहेगा, बल्कि यह पश्चिम एशिया को केंद्र बनाकर पूरी दुनिया को प्रभावित करेगा। यह युद्ध ऊर्जा आपूर्ति को हिलाएगा, वैश्विक अर्थव्यवस्था को झकझोरेगा और इंसानी जीवन पर गहरा आघात करेगा।

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