वाशिंगटन, पीटीआइ। अमेरिका के बाइडन प्रशासन ने एच-1बी वीजा पर ट्रंप काल की एक नीति को पलटने का फैसला किया है। 2018 में तत्कालीन ट्रंप प्रशासन ने इमीग्रेशन अधिकारियों को एच-1बी वीजा आवेदनों को तुरंत खारिज करने का अधिकार दे दिया था। अमेरिकी इमीग्रेशन एजेंसी ने बताया कि वह इस नीति को रद करेगी। इससे वीजा के लिए आवेदन की एक बड़ी बाधा दूर हो जाएगी। इस कदम से भारतीय आइटी पेशेवरों को राहत मिलने की उम्मीद है।

लिए जाएंगे अतिरिक्त साक्ष्य 

अमेरिकी सिटिजनशिप एंड इमीग्रेशन सर्विसेज (यूएससीआइएस) ने बुधवार को एक बयान में कहा कि आवेदन प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए नीतियों और दिशा-निर्देशों में बदलाव किया जा रहा है। यूएससीआइएस जून, 2013 के उस आदेश पर लौटने की तैयारी में है, जिसमें एजेंसी के अधिकारियों को यह निर्देश था कि वे आवेदन के संबंध में अतिरिक्त साक्ष्य मांगें। ऐसा नहीं होने पर आवेदन खारिज करने के इरादे वाला नोटिस जारी करें।

क्या है एच-1बी वीजा

एच-1बी वीजा भारतीय आइटी पेशेवरों में खासा लोकप्रिय है। इस वीजा के आधार पर अमेरिकी कंपनियां उच्च कुशल विदेशी कामगारों को रोजगार देती हैं। हर साल विभिन्न श्रेणियों में 85 हजार वीजा जारी किए जाते हैं। यह वीजा तीन साल के लिए जारी होता है। अमेरिकी सत्ता में आने के बाद ट्रंप ने वर्क वीजा के नियमों को सख्त कर दिया था। चुनाव प्रचार के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने यह वादा किया था कि वह एच-1बी वीजा पर लगे प्रतिबंधों को खत्म करेंगे।

 

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