न्यूयॉर्क कॉर्नेल गैंगरेप मामला: 'सहमति से बने थे संबंध...', पीड़िता की शुरुआती बयान ने पलट दी पूरी कहानी
न्यूयॉर्क के कॉर्नेल यूनिवर्सिटी गैंगरेप मामले में DA के खुलासे ने नया मोड़ दिया है। पीड़िता के शुरुआती पुलिस बयान के मुताबिक यौन संबंध आपसी सहमति से बने थे।

न्यूयॉर्क कॉर्नेल गैंग-रेप मामले में नया मोड़।
HighLights
डीए ने कॉर्नेल यूनिवर्सिटी मामले में पीड़िता का शुरुआती बयान जारी किया।
पीड़िता ने नवंबर 2024 में सहमति से यौन संबंध और नशा स्वीकार किया था।
'वॉलंटरी इंटॉक्सिकेशन' पर न्यूयॉर्क के कानूनों की कमजोरी पर बहस छिड़ी।
डिजिटल डेस्क, वाशिंगटन। अमेरिका के जाने माने कॉर्नेल यूनिवर्सिटी से जुड़े एक हाई-प्रोफाइल मामले में अब एक नया मोड़ आ गया है। इस मामले में टॉमपकिंस काउंटी के डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी (DA) मैथ्यू वैन हाउटन ने एक प्रेस बयान जारी कर चौंकाने वाले खुलासे किए हैं।
डीए ने अपने बयान में इस बात पर जोर दिया कि क्यों उन्होंने इस मामले की जांच को दोबारा खोला था और क्यों शुरुआती दौर में इसमें क्रिमिनल चार्ज नहीं लगाए गए थे? साथ ही उन्होंने पीड़िता के उस शुरुआती बयान का भी खुलासा किया है, जो उसने नवंबर 2024 में पुलिस को दिया था।
पहले समझिए क्या है पूरा मामला?
बता दें कि इस मामले में हाल ही में पीड़िता, जिसे सिविल मुकदमे में 'जेन डो' नाम दिया गया है... ने कॉर्नेल यूनिवर्सिटी और सात 'काई फी' फ्रेटरनिटी भाइयों के खिलाफ एक सिविल मुकदमा दायर किया है। इसके बाद से ही इस मामले पर तीखी बहस छिड़ गई है और लोग न्याय की मांग कर रहे हैं।
समुदाय और सोशल मीडिया पर बढ़ते गुस्से और अधूरी खबरों के बीच, डीए मैथ्यू वैन हाउटन ने स्पष्टीकरण देते हुए पीड़िता के नवंबर 2024 के उस 6-पन्ने के शपथ पत्र वाले बयान को सार्वजनिक कर दिया, जो उसने घटना के एक हफ्ते बाद कैंपस पुलिस को दिया था।
शुरुआती बयान में क्या कहा गया था?
डीए हाउटन के अनुसार, नवंबर 2024 में दिए गए पुलिस बयान और अब नए सिविल मुकदमे में लगाए गए आरोपों के बीच काफी अंतर है। डीए का कहना है कि उस समय पीड़िता ने अपनी मर्जी से ड्रग्स लेने और यौन संबंध में शामिल होने की बात कही थी, जिसे उसने होश में रहते हुए आपसी सहमति बताया था।
शुरुआत से इस मामले को समझे तो 20-वर्षीय पीड़िता ने पुलिस को बताया था कि 19 अक्टूबर 2024 की शाम को वह अपने एक दोस्त से मिलने 'काई फी' फ्रेटरनिटी हाउस गई थी। वहां पहुंचने पर उसने अपनी ड्रिंक खुद ली और दोनों ने थोड़ी फ्लर्टिंग की।
बयान के मुताबिक, उसके उसी दोस्त ने उसे एक शांत जगह पर ले जाकर तीन लोगों के बीच संबंध का प्रस्ताव रखा। पीड़िता ने पुलिस को बताया कि वह उस शख्स की ओर आकर्षित थी और अपनी ड्रंकन क्यूरोसिटी के कारण इसके लिए राजी हो गई। बाद में इसमें एक और छात्र भी शामिल हुआ।
पीड़िता ने बताया कि शुरुआत में वह इस पूरी स्थिति से सहज थी। हालांकि, रात के वक्त जब वहां फ्रेटरनिटी के अन्य सदस्य भी आ गए और माहौल बदला, तो कई बातें उसके लिए याद रखना मुश्किल हो गया।
पीड़िता ने पुलिस को बताया कि एक आरोपी ने उससे बहुत बदतमीजी से बात की थी, जिसके बाद उसने माफी भी मांगी और जबरन किस करने की कोशिश की, जिसे उसने तुरंत पीछे हटकर रोक दिया था। पीड़िता के मुताबिक, यह सब करीब चार घंटे तक चला और सुबह 5:45 बजे के आसपास वह वहां से निकली। उस समय तक उसने काफी नशा कर लिया था।
टेक्स्ट मैसेज और चैट का जिक्र
दूसरी ओर सीबीएस न्यूज ने कुछ ऐसे टेक्स्ट संदेश भी जारी किए हैं, जो कथित तौर पर घटना के कुछ दिनों बाद आरोपी और पीड़िता के बीच हुए थे। संदेश में एक आरोपी महिला से माफी मांगते हुए कह रहा है कि उसका खुद का दिमाग नशे के कारण सुन्न हो गया था।
इसके जवाब में पीड़िता ने लिखा था कि उसका खुद का भी दिमाग सुस्त हो चुका था और पीड़िता ने कथित तौर पर यह भी माना था कि यौन संबंधों में से कुछ भी अवैध नहीं था और वह उन लोगों के साथ अपनी मर्जी से थी। हालांकि, उसने यह भी जोड़ा कि अगली बार वह बिना बाकी लोगों और केटामाइन के मिलना चाहेगी।
अब समझिए क्यों हो रहा है विवाद और क्या है वॉलंटरी इंटॉक्सिकेशन लूपहोल?
गौरतलब है कि इस मामले के सामने आने के बाद अमेरिका में एक बार फिर कड़े कानूनों को लेकर बहस छिड़ गई है। आलोचकों और महिला अधिकारों के संगठनों ने डीए की तरफ से पीड़िता के पुराने बयान को सार्वजनिक करने को पीड़िता को दोषी ठहराना करार दिया है।
न्यूयॉर्क के कानून हाल भी जानिए
दूसरी ओर कानूनी जानकारों का कहना है कि न्यूयॉर्क के कानूनों में एक बड़ी कमजोरी है। यदि कोई व्यक्ति अपनी मर्जी से अत्यधिक नशा कर लेता है और ऐसी स्थिति में संबंध बनाता है जहां वह 'हां' या 'ना' कहने की पूरी क्षमता में नहीं होता, तो उस स्थिति में दुष्कर्म के आरोप साबित करना अभियोजन पक्ष के लिए बेहद कठिन हो जाता है।
कानून के तहत इसके लिए जबरदस्ती, साफ इंकार या शारीरिक रूप से पूरी तरह असमर्थ होने के ठोस सबूत होने जरूरी हैं। फिलहाल, इस खुलासे के बाद कॉर्नेल यूनिवर्सिटी और 'कॉर्नेल 7' कहे जाने वाले इन सातों छात्रों के मामले ने तूल पकड़ लिया है और इस पर कानूनी व सामाजिक स्तर पर घमासान जारी है।
