क्या भारत पर लगेगा 100% टैरिफ? रूस पर प्रतिबंध लगाने वाले बिल तैयार, कल होगी वोटिंग
अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में रूस पर प्रतिबंध लगाने वाला एक बिल पेश किया गया है। यदि यह कानून बनता ...और पढ़ें

रूस पर प्रतिबंध लगाने वाले बिल तैयार।
HighLights
रूस पर प्रतिबंध लगाने वाला अमेरिकी बिल।
भारत पर 100% टैरिफ का कानूनी रास्ता।
अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में वोटिंग।
डिजिटल डेस्क, वाशिंगटन। अगर रूस पर प्रतिबंध लगाने वाला प्रस्तावित बिल US हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव्स से पास होकर कानून बन जाता है, तो अमेरिकी राष्ट्रपित डोनल्ड ट्रंप की टैरिफ से जुड़ी योजनाओं को भारत पर 100% तक टैरिफ लगाने का कानूनी रास्ता मिल सकता है।
अमेरिकी संसद के निचले सदन प्रतिनिधि सभा में एक ऐसे विधेयक को आगे बढ़ाया गया है, जिसमें राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप को रूस से तेल-गैस खरीदने पर भारत और चीन जैसे देशों पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने और ईरान पर मौजूदा प्रतिबंधों को बढ़ाने का अधिकार देने की बात है। प्रतिनिधि सभा में रूस पर प्रतिबंध लगाने से जुड़े इस विधेयक पर बहुत जल्द अंतिम मतदान होने की संभावना है।
बिल ने एक पड़ाव किया पार
'लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026' ने मंगलवार शाम प्रतिनिधि सभा में एक प्रक्रियागत बाधा पार कर ली। दो डेमोक्रेट सांसदों ने अपनी पार्टी से अलग रुख अपनाते हुए रिपब्लिकन सांसदों के साथ विधेयक के पक्ष में मतदान किया।
रूस पर प्रतिबंध संबंधी विधेयक और कई अन्य विधेयकों को आगे बढ़ाने का प्रस्ताव 211 के मुकाबले 214 मतों से पारित हुआ, जिससे सदन में डेमोक्रेटिक नेतृत्व को झटका लगा। डेमोक्रेटिक सांसद और प्रतिनिधि सभा की विदेश मामलों की समिति के वरिष्ठ सदस्य ग्रेगरी मीक्स ने सोमवार को रूस पर प्रतिबंध लगाने वाले विधेयक का विरोध किया।
ट्रंप को टैरिफ लगाने का मनमाना अधिकार मिल जाएगा
उन्होंने तर्क दिया कि इससे ट्रंप को बिना किसी अंकुश के टैरिफ लगाने का मनमाना अधिकार मिल जाएगा। उल्लेखनीय है कि पिछले महीने अमेरिकी संसद के ऊपरी सदन सीनेट ने इस विधेयक को 86-11 के भारी बहुमत से पारित किया था।
इस विधेयक में न केवल रूस के नेतृत्व और एनर्जी सेक्टर बल्कि उन जहाजों के शैडो बेड़े पर भी प्रतिबंध लगाने का प्रविधान है, जो मॉस्को को तेल की आपूर्ति पर लगे प्रतिबंधों से बचने में मदद करते हैं।
प्रतिनिधि सभा से पारित होने पर ट्रंप के पास जाएगा बिल
अमेरिका का मानना है कि रूस का कच्चा तेल व्यापार यूक्रेन के खिलाफ युद्ध को वित्त पोषित कर रहा है। अमेरिकी सीनेट द्वारा सात अगस्त को पारित विधेयक में रूस के व्यापारिक साझेदार देशों के नाम नहीं लिए गए हैं, लेकिन तेल और गैस के पांच सबसे बड़े आयातकों का उल्लेख किया गया है।
राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के लिए भेजे जाने जाने से पहले विधेयक को प्रतिनिधि सभा से पारित होना जरूरी है।
(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)
