नई दिल्‍ली (आनलाइन डेस्‍क)। अमेरिका में बीते कुछ समय से गर्भपात पर आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले का व्‍यापक पैमाने पर विरोध हो रहा है। कई महिला संगठनों से लेकर कई सामाजिक कार्यकर्ता और आम आदमी तक इस फैसले को गलत बता रहा है। दरअसल, अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट ने गर्भपात कराने को गैर कानूनी बताते हुए पांच दशक पुराने अपने फैसले को ही पलट दिया है। इसको देखते हुए अमेरिका में कई जगहों पर इसका जबरदस्‍त विरोध हो रहा है। आपको बता दें कि ये कानून कन्‍वेंशन आन द एलिमिनेशन आफ आल फार्म्‍स आफ डिस्‍क्रीमिनेशन अगेंस्‍ट वूमेन या CEDAW के उन प्रावधानों में शामिल है, जिस पर दुनिया के अधिकतर देशों ने अपनी सहमति देते हुए हस्‍ताक्षर किए हैं। अमेरिका ने भी इस पर अपने हस्‍ताक्षर किए हैं लेकिन इसकी पुष्टि चार दशक बाद भी नहीं हुई है।

आपको जानकर हैरानी होगी कि अमेरिका के अलावा दुनिया के करीब ऐसे सात देश हैं जिन्‍होंने इस संधि पर अपने हस्‍ताक्षर नहीं किए हैं। इनमें होली सी, जो कि रोम के दायरे में आता है और इस पर पोप का शासन चलता है। इसके अलावा ईरान, सोमालिया, सुडान और टोंगो हैं। अमेरिका को छोड़कर यदि अन्‍य देशों के इतिहास और मौजूदा स्थिति पर नजर डाली जाए तो यहां पर महिलाओं की स्थिति काफी खराब है। इन देशों में महिलाओं को भोग विलास की वस्‍तु के रूप में माना जाता है। यही वजह है कि महिलाओं को इन देशों में अधिक अधिकार देने से भी परहेज किया जाता रहा है। आर्थिक रूप से कमजोर ये देश सामाजिक रूप से भी काफी पिछड़े हुए हैं।

गौरतलब है कि CEDAW, विश्‍व में उन प्रावधानों को इंगित करता है जिसमें महिलाओं को पूर्ण स्‍वतंत्रता दी जाती है। इसमें गर्भपात की मंजूरी देना भी शामिल है। अमेरिका में गर्भपात के प्रावधान को खत्‍म करने के खिलाफ सड़कों पर उतरे लोगों का कहना है कि महिला को इसका अधिकार दिया जाना चाहिए कि उसको गर्भ में पल रहे बच्‍चे को रखना है या नहीं। इसके अलावा इन लोगों का ये भी तर्क है कि दुष्‍कर्म के बाद किए गए गर्भधारण की सूरत में या गर्भ में किसी गंभीर समस्‍या से जूझ रहे बच्‍चे को जन्‍म देने का हक उसकी मां को ही मिलना चाहिए। वहीं दूसरी तरफ अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट या सरकार फिलहाल इस बारे में अपने कान बंद किए हुए है।

आपको यहां पर ये भी बता दें कि CEDAW 80 के दशक में विश्‍व में महिलाओं की स्थिति को सुधारने के मकसद से संयुक्‍त राष्‍ट्र के नेतृत्‍व में आयोजित किया गया था। इसमें सभी छोटे और बड़े देश शामिल हुए थे। इसके प्रावधानों को कुछ देशों ने तुरंत तो कुछ ने समय रहते अपना लिया था। लेकिन आज भी कुछ देश ऐसे हैं जो इसके प्रावधानों को लेकर अपनी सहमति नहीं दे रहे हैं।

Edited By: Kamal Verma