वाशिंगटन [द न्यूयार्क टाइम्स]। अमेरिका के जो बाइडन प्रशासन ने मंगलवार को घरेलू चरमपंथ से निपटने के लिए एक राष्ट्रीय रणनीति की घोषणा की है। इसमें अधिक संख्या में खुफिया विश्लेषकों की नियुक्ति और घृणा फैलाने वाले समूहों से सरकारी कर्मचारियों की साठगांठ की जांच जैसे कदमों की पैरवी की गई है। 32 पेज की योजना में आतंकवाद से निपटने के सरकारी रुख में बदलाव को रेखांकित किया गया है जिसमें दशकों से विदेशी आतंकियों से लड़ाई को प्राथमिकता दी गई है।

हिंसक हमलों में हो रही वृद्धि

ऐसे में अमेरिकी चरमपंथियों द्वारा हिंसक हमलों में वृद्धि हो रही है और छह जनवरी को अमेरिकी संसद पर हुए दंगों में यह समस्या सामने आई है। रणनीति दस्तावेज में राष्ट्रपति बाइडन ने लिखा, 'हम इस खतरे की अनदेखी नहीं कर सकते या इसे दूर करना चाहते हैं। घरेलू आतंकवाद की रोकथाम और इसे भड़काने वाले कारकों में कमी लाने के लिए संघीय सरकार की ओर से बहुआयामी कदमों को उठाने की जरूरत है।'

यह है रणनीति का मकसद 

कार्यभार संभालने के तुरंत बाद बाइडन ने घरेलू चरमपंथ से निपटने के संघीय एजेंसियों के तौरतरीकों की समीक्षा करने के आदेश दिए थे जो श्वेत वर्चस्ववादियों और मिलीशिया समूहों को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए शीर्ष खतरा मानने के प्रयास का हिस्सा है। रणनीति का मकसद सरकार के प्रयासों में समन्वय स्थापित करना है।

चार प्राथमिकताएं निर्धारित 

इसमें चार प्राथमिकताएं रेखांकित की गई हैं - सुरक्षा एजेंसियों के बीच जानकारियां साझा करने में सुधार, चरमपंथी समूहों को भर्तियां करने से रोकना, ऐसे समूहों की जांच और घरेलू आतंकवाद (नस्लवाद व कट्टरता) के लंबे समय से चले रहे प्रेरकों का मुकाबला करना।

हर साजिश नाकाम करने का वादा 

न्याय विभाग के ग्रेट हाल में संबोधन के दौरान अटार्नी जनरल मेरिक गार्लेंड ने मंगलवार को कहा, 'हम इस बात का वादा नहीं कर सकते कि हम हर साजिश को नाकाम कर देंगे, हर बम को निष्कि्रय कर देंगे या हर साजिशकर्ता को गिरफ्तार कर लेंगे, लेकिन हम यह वादा कर सकते हैं कि ऐसी दुखद घटनाओं को रोकने के लिए हम यथाशक्ति हरमुमकिन कोशिश करेंगे।'

बजट बढ़ाने की मांग 

प्रशासन ने अभियोजकों, जांचकर्ताओं और विश्लेषकों की नियुक्ति के लिए न्याय विभाग को 10 करोड़ डालर (करीब 730 करोड़ रुपये) से अधिक की राशि प्रदान करने का अनुरोध किया है। राष्ट्रीय सुरक्षा अधिकारी अरसे से शिकायत करते रहे हैं कि घरेलू चरमपंथ पर उतना ध्यान नहीं दिया गया जितना देना चाहिए था।

राजनीतिक नुकसान की आशंका

दरअसल, इसकी वजह कुछ हद तक राजनीतिक तकरार रही है। चरमपंथियों की संलिप्तता वाले हमलों की जांच के कुछ प्रयासों को रिपब्लिकनों ने राजनीतिक नुकसान की आशंका से रोक दिया था, इसमें संसद पर हमले की जांच करने वाला आयोग शामिल है।

नई नहीं है समस्‍या 

राजनीतिक समस्या भी नई नहीं है। वर्ष 2009 में होमलैंड सिक्यूरिटी की एक रिपोर्ट में चेतावनी दी गई थी कि लड़ाइयों से लौटने वाले पूर्व सैन्यकर्मियों को आतंकी या चरमपंथी समूह भर्ती कर सकते हैं जिस पर कंजरवेटिव्स ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी। इसके बाद होमलैंड सिक्यूरिटी की तत्कालीन सचिव जैनेट नैपोलितानो को उस समय माफी मांगने और रिपोर्ट वापस लेने पर मजबूर होना पड़ा था।