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'आतंकियों के हाथ न लगें परमाणु हथियार', यूएन में भारत ने दुनिया को किया आगाह

Published: Tue, 20 Oct 2026 06:30 PM (IST)

संयुक्त राष्ट्र में भारत ने आतंकवादियों के हाथों सामूहिक विनाश के हथियार पड़ने के खतरे पर गहरी चिंता व्यक्त की है।

यूएन में भारत ने दुनिया को किया आगाह।

यूएन में भारत ने दुनिया को किया आगाह।

HighLights

  1. आतंकवादियों के हाथों WMDs पड़ने के खतरे पर चिंता व्यक्त की।

  2. संवेदनशील तकनीक हस्तांतरण पर वैश्विक सतर्कता का आह्वान किया।

  3. परमाणु अप्रसार व आतंकवाद से जुड़े देशों पर कड़ी नजर रखने को कहा।

डिजिटल डेस्क, संयुक्त राष्ट्र। सामूहिक विनाश के हथियारों के आतंकवादियों के हाथों में पड़ने के खतरे पर चिंता जताते हुए भारत ने वैश्विक समुदाय से संवेदनशील तकनीक के हस्तांतरण को लेकर सतर्क रहने का आह्वान किया है।

संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) की पहली समिति में भारत ने विशेष रूप से उन देशों के प्रति सतर्क रहने को कहा है, जिनका परमाणु हथियारों के प्रसार और आतंकवाद से जुड़े रहने का 'रिकॉर्ड' रहा है - जो कि पाकिस्तान की ओर एक परोक्ष इशारा है। भारत ने दो टूक कहा कि यह पूरी मानवता के लिए एक गंभीर चुनौती है, जिसे रोकने के लिए वैश्विक स्तर पर तुरंत सख्त कदम उठाने की आवश्यकता है।

संवेदनशील तकनीक के हस्तांतरण को लेकर अत्यंत सतर्क रहना चाहिए

लोकसभा सदस्य आलोक कुमार सुमन ने संयुक्त राष्ट्र में भारत का पक्ष रखते हुए कहा कि सभी सदस्य देशों को संवेदनशील तकनीक के हस्तांतरण को लेकर अत्यंत सतर्क रहना चाहिए।

विशेष रूप से उन देशों पर कड़ी नजर रखी जाए जिनका आतंकवाद और परमाणु प्रसार का पुराना और काला इतिहास रहा है। भारत का यह स्पष्ट संकेत पाकिस्तान और उसके कुख्यात ए.क्यू. खान परमाणु प्रसार नेटवर्क की ओर था, जिसने अतीत में मानवता को भारी खतरे में डाला था।

भारत ने याद दिलाया कि आतंकवाद आज भी अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा अभिशाप बना हुआ है। भारत साल 2002 से लगातार "आतंकवादियों को जनसंहार के हथियार हासिल करने से रोकने के उपाय" शीर्षक से प्रस्ताव पेश करता आ रहा है और केमिकल-बायोलॉजिकल वेपन कन्वेंशन को प्रभावी और बिना किसी भेदभाव के लागू करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

मनीष तिवारी ने परमाणु निरस्त्रीकरण पर भारत के संकल्प को दुनिया के सामने रखा

इस गंभीर चिंता के साथ-साथ, कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने परमाणु निरस्त्रीकरण पर भारत के संकल्प को दुनिया के सामने रखा। भारत ने सार्वभौमिक, गैर-भेदभावपूर्ण और सत्यापन योग्य वैश्विक परमाणु निरस्त्रीकरण की पुरजोर मांग की है।

आज के तकनीकी युग में जब रक्षा प्रणालियों और परमाणु कमांड-कंट्रोल में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) तेजी से शामिल हो रही है, तब भारत ने यह मानवीय अपील की है कि परमाणु हथियारों के इस्तेमाल का निर्णय कभी भी मशीनों के भरोसे नहीं छोड़ा जाना चाहिए, बल्कि यह पूरी तरह से इंसानों के नियंत्रण में होना चाहिए।

भारत ने स्पष्ट किया कि उसकी सामरिक क्षमताएं विशुद्ध रूप से रक्षात्मक हैं और किसी भी विशिष्ट देश के खिलाफ नहीं हैं। एक जिम्मेदार परमाणु शक्ति संपन्न देश के रूप में, भारत नो फर्स्ट यूज की नीति पर दृढ़ता से कायम है।

(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)