द न्यूयॉर्क टाइम्स, वाशिंगटन। ब्रह्मांड हमारे लिए हमेशा से रहस्यमय रहा है। वैज्ञानिक धीरे-धीरे इसकी कई परतें खोल रहे हैं। इसी कड़ी में कुछ साल पहले वैज्ञानिकों ने दावा किया था कि हमारी आकाश गंगा पर खतरा मंडरा रहा है। यह अपनी नजदीकी आकाशगंगा से टकरा रही है, लेकिन अब एक अच्छी खबर आई है। हमारी आकाशगंगा (मिल्की वे) के नष्ट होने का खतरा टल गया है।

दरअसल, लंबे समय से वैज्ञानिक मान रहे थे कि पृथ्वी से 25 लाख प्रकाश वर्ष दूर स्थित गैलेक्सी ‘एंड्रोमेडा’ (मेजियर 31, एम31) 68 मील प्रति सेकंड की गति से आकाशगंगा की ओर बढ़ रही है। पांचसाल पहले अमेरिकी स्पेस एजेंसी हबल स्पेस टेलीस्कोप से जुटाए आंकड़ों का विश्लेषण करने के बाद खगोलविदों ने आशंका जताई थी कि यदि एंड्रोमेडा इसी गति से आगे बढ़ती रही तो करीब 3.9 अरब साल बाद वह आकाशगंगा से टकरा जाएगी।

टक्कर भीषण होगी जिससे कई सारे तारे नई कक्षा में चले जाएंगे। दोनों गैलेक्सी के ग्रह एक-दूसरे से बहुत दूर हैं लेकिन टक्कर के कारण उनकी कक्षा भी बदल जाएगी। टक्कर के कई सालों बाद एंड्रोमेडा व आकाशगंगा एक विशाल गैलेक्सी का रूप ले लेंगी। हाल में हुए एक अध्ययन ने इस पूर्वानुमान को गलत ठहरा दिया है।

एस्ट्रोफिजिकल जर्नल में छपे अध्ययन के मुताबिक एम31 68 मील प्रति सेकंड की जगह 23 मील प्रति सेकंड की रफ्तार से बढ़ रही है। इस गति के साथ आकाशगंगा व एम31 में आने वाले 4.5 अरब सालों तक कोई टक्कर नहीं होगी।

अध्ययन के मुख्य वैज्ञानिक रोलैंड वैन डेर मेरेल ने कहा कि 4.5 अरब साल बाद भी दोनों के बीच भीषण टक्कर होने की आशंका नहीं है। उस वक्त इन दोनों गैलेक्सी के किनारे ही आपस में टकराएंगे लेकिन टक्कर के बाद दोनों का मिलकर बड़ी गैलेक्सी का रूप लेना तय है। चूंकि, गैलेक्सी का ज्यादातर हिस्सा खाली होता है इसलिए किनारों से टकराने के कारण उनके ग्रहों या तारों पर इसका बहुत प्रभाव नहीं पड़ेगा। हालांकि, गुरुत्वाकर्षण के कारण कुछ तारों के छितराने की आशंका है।

एंड्रोमेडा में आकाशगंगा से दोगुना तारे मौजूद

एंड्रोमेडा को एम31 या एनजीसी 224 भी कहा जाता है। यह हमारी आकाशंगगा के सबसे करीब मौजूद गैलेक्सियों में से एक है। पृथ्वी से 25 लाख वर्ष दूर स्थित इस गैलेक्सी में एक लाख करोड़ सितारे होने का अनुमान है जो कि हमारी आकाशगंगा से दोगुना हैं। करीब 2,20,000 प्रकाश वर्ष में फैली इस गैलेक्सी का भार हमारीआकाशगंगा के बराबर ही है।

Posted By: Sanjay Pokhriyal