निकोसिया, एएनआइ। तुर्की के विदेश मंत्री मेवलुत कावुसोग्लू (Mevlut Cavusoglu) ने राष्ट्रपति रेसेप तैय्यप एर्दोगन (Recep Tayyip Erdogan) के आदेशों पर काम करते हुए पिछले बुधवार को फिनलैंड (Finland) और स्वीडन (Sweden) के साथ नाटो (उत्तर अटलांटिक संधि संगठन) सदस्यता वार्ता की शुरुआत को रोक कर यूरोपीय सुरक्षा में सबसे बड़े ऐतिहासिक बदलाव धराशायी कर दिया है। हालांकि समाचार एजेंसी एएनआइ की रिपोर्ट के मुताबिक तुर्की का यह कदम उसे अगल थलग भी कर सकता है।

तुर्की का आरोप है कि फिनलैंड (Finland) और स्वीडन (Sweden) पीकेके आतंकवादियों और गुलेन आंदोलन के समर्थकों को प्रश्रय देते हैं। तुर्की ने इन संगठनों पर साल 2016 में एर्दोगन के खिलाफ तख्तापलट की कोशिश करने का आरोप लगाया है। सनद रहे अमेरिका ने फिनलैंड (Finland) और स्वीडन (Sweden) का साथ देने की बात कही है जबकि तुर्की का झुकाव ने रूस की ओर रहा है। तुर्की रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों को लागू करने से भी इनकार कर चुका है।

मालूम हो कि नाटो में कौन शामिल होगा इस पर फैसला लेने के लिए नाटो के 30 सदस्य देशों में से हर एक के पास वीटो पावर है। चूंकि नाटो में सभी निर्णय सर्वसम्मति से लिए जाते हैं इसलिए ऐसे संकटकालीन समय में वीटो पावर का इस्तेमाल करना बहुत जोखिम भरा होगा। यह तुर्की के अलगाव की वजह बन सकता है। यह घटना ऐसे वक्‍त हुई है जब दूसरी ओर अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने व्हाइट हाउस में फिनलैंड के राष्ट्रपति और स्वीडन की प्रधानमंत्री के साथ संयुक्त बैठक की है।

अमेरिकी राष्‍ट्रपति जो बाइडन (US President Joe Biden) का कहना है कि फिनलैंड और स्वीडन दोनों ही मुल्‍क अपनी सैन्य क्षमताओं के बजाय अपने मजबूत लोकतंत्र के साथ नाटो को मजबूत करेंगे। उन्‍होंने यह भी घोषणा की है कि फिनलैंड और स्वीडन के पास नाटो के सदस्य बनने के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका का पूर्ण समर्थन है। बाइडन ने कहा कि भले ही तुर्की ने फिनलैंड और स्वीडन की सदस्यता को रोकने की कोशिश की है लेकिन अमेरिका रूस के खिलाफ इन देशों के साथ खड़ा रहेगा।  

Edited By: Krishna Bihari Singh